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सत्संग से हमेशा धर्म बढ़ता है: स्वामी धीरेंद्राचार्य
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हाईवे होटल परिसर में चल रहे पितृ पक्ष मोक्ष यज्ञ व श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धालु भक्ति में सरा?
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सत्संग से हमेशा धर्म बढ़ता है: स्वामी धीरेंद्राचार्य
झांसी। रामानंदाचार्य स्वामी धीरेंद्राचार्य महाराज ने कहा कि सत्संग से हमेशा धर्म बढ़ता है। अच्छे विचार हर पल रहे, इसके लिए आवश्यक है कि सत्संग में शामिल हो।
सीपरी स्थित एक होटल में आयोजित श्री मद भागवत कथा में उन्होंने कहा कि यह मानव शरीर बढे़ भाग्य से मिलता है। इसे ईश्वर को पाने में और जीव की सेवा में लगाए। सेवा, भक्ति और सत्य का आचरण हमेशा जीवन क ो सफल बनाता है।
इस अवसर पर भागवत कथा व्यास मनोज चतुर्वेदी ने कहा कि जीव और ब्रह्म तभी लीलाएं कर पाती है, जब वासना को खत्म किया जाए। भागवत कथा के अंतर्गत आयोजित हुए नंदोत्सव में श्रद्धालुओं ने संगीत की धुन पर बधाई गीत गाए और भजनों पर जमकर नृत्य किया। कथा व्यास ने कहा कि भव सागर को पार करना है तो गाय माता की सेवा जरुर करो। उन्हें भोजन अर्पण करो। गाय की पूजा करने वालों को कभी नरक की प्राप्ति नहीं होती है। भगवान ने भी गाय की सेवा की। प्रवचन अवसर पर डीआईजी सुभाष चंद्र बघेल, समाज कल्याण बोर्ड की पूर्व सदस्या अनुराधा शर्मा, हरपाल सिंह परमार, अमित पांडेय, सियाराम शरण चतुर्वेदी, आदर्श चतुर्वेदी, बाला प्रसाद चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।
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झांसी। रामानंदाचार्य स्वामी धीरेंद्राचार्य महाराज ने कहा कि सत्संग से हमेशा धर्म बढ़ता है। अच्छे विचार हर पल रहे, इसके लिए आवश्यक है कि सत्संग में शामिल हो।
सीपरी स्थित एक होटल में आयोजित श्री मद भागवत कथा में उन्होंने कहा कि यह मानव शरीर बढे़ भाग्य से मिलता है। इसे ईश्वर को पाने में और जीव की सेवा में लगाए। सेवा, भक्ति और सत्य का आचरण हमेशा जीवन क ो सफल बनाता है।
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इस अवसर पर भागवत कथा व्यास मनोज चतुर्वेदी ने कहा कि जीव और ब्रह्म तभी लीलाएं कर पाती है, जब वासना को खत्म किया जाए। भागवत कथा के अंतर्गत आयोजित हुए नंदोत्सव में श्रद्धालुओं ने संगीत की धुन पर बधाई गीत गाए और भजनों पर जमकर नृत्य किया। कथा व्यास ने कहा कि भव सागर को पार करना है तो गाय माता की सेवा जरुर करो। उन्हें भोजन अर्पण करो। गाय की पूजा करने वालों को कभी नरक की प्राप्ति नहीं होती है। भगवान ने भी गाय की सेवा की। प्रवचन अवसर पर डीआईजी सुभाष चंद्र बघेल, समाज कल्याण बोर्ड की पूर्व सदस्या अनुराधा शर्मा, हरपाल सिंह परमार, अमित पांडेय, सियाराम शरण चतुर्वेदी, आदर्श चतुर्वेदी, बाला प्रसाद चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।
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