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पैसा बचाने के लिए ताक पर रखी बैंकों की सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2016 12:45 AM IST
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झांसी। बैंकों में सुरक्षा उपायों को ताक पर रख दिया गया है। नियमानुसार बैंक में कर्मचारी व ग्राहकों की सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त होने चाहिए, लेकिन झांसी की ज्यादातर बैंक शाखाओं में इसका पालन नहीं हो रहा है। हालांकि, यहां यह तर्क दिया जा सकता है कि बैंकों के खजाने और वहां के कर्मचारियों का बीमा होता है, लेकिन सवाल यह है कि यदि किसी वारदात में ग्राहकों को कुछ हो जाए, तब क्या होगा? दौलत किसी की जान से ज्यादा कीमती नहीं हो सकती है।
किसी जमाने में बैंक की हर शाखा में सशस्त्र गार्ड मुस्तैदी से तैनात नजर आता था। लेकिन, बैंकों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ बैंक प्रबंधन गार्डों की व्यवस्था खत्म करते जा रहे हैं। इक्का दुक्का बैंक शाखाओं में ही अब गार्ड नजर आते हैं। बैंक प्रबंधन शहर से दूरदराज के इलाकों में स्थित बैंक शाखाओं व मिश्रित आबादी क्षेत्र की शाखाओं में ही गार्ड रख रहे हैं। ऐसा खर्चे में कटौती के लिए किया जा रहा है, परंतु यहां सवाल यह है कि एक बैंक शाखा के रखरखाव, किराये, बिजली, वेतन व अन्य मदों में करोड़ों खर्च होते हैं, तो सुरक्षा के लिए 20-25 हजार रुपये खर्च कर गार्ड नहीं रखे जा सकते।
घटना के बाद रखे जाते हैं गार्ड
बैंक अब गार्ड रखने की जगह शाखा का इंश्योरेंस करा देते हैं। यह गार्ड पर खर्च होने वाली रकम से सस्ता पड़ता है। बैंक का बीमा शाखा के व्यवसाय के अनुसार तय होता है। केवल रिस्की शाखाओं में ही अब गार्ड रखे जा रहे हैं। किसी भी बैंक शाखा में घटना होने के बाद उसे रिस्की मान लिया जाता है और वहां गार्ड की व्यवस्था कर दी जाती है। जबकि, पहले बैंक की हर शाखा में गार्ड की व्यवस्था होती थी।
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- गोपाल जी अग्रवाल, रिटायर्ड बैंक अधिकारी
कर्मचारियों की सुरक्षा है ताक पर
गार्ड की तनख्वाह बचाने के चक्कर में बैंकों के उच्च प्रबंधन कर्मचारियों व अधिकारियों की सुरक्षा ताक पर रखे हुए हैं। बीते रोज नगर में स्थित बैंक शाखा में हुई डकैती की घटना से उच्चाधिकारियों को सबक लेना चाहिए। सशस्त्र गार्ड को तैनात देखकर असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त पड़ जाते हैं। सभी बैंक शाखाओं में अनिवार्य रूप से गार्ड व अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए।
- बी बी मेहता, सह संयोजक - यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बाद भी दिखा खौफ
अन्य दिनों की अपेक्षा काफी कम आए ग्राहक
घायल बैंक प्रबंधक समेत तीनों कर्मी नहीं आए
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भले ही नंदनपुरा के पंजाब नेशनल बैंक में शुक्रवार को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, मगर मौजूद कर्मियों के चेहरों पर दहशत नजर आ रही थी। बम के धमाकों में घायल होने की वजह से शाखा प्रबंधक, सहायक प्रबंधक समेत तीनों कर्मी नहीं आए थे। वहीं, अन्य दिनों की अपेक्षा ग्राहक भी कम आए थे।
बृहस्पतिवार को सशस्त्र बदमाशों ने दिनदहाड़े बैंक के अंदर दुस्साहसिक तरीके से बम फेंककर लूटपाट की थी। बम के धमाकों से बैंक प्रबंधक एमबी आर्या, सहायक बैंक प्रबंधक प्रदीप कुमार व बैंक कर्मी नेहा घायल हो गईं थीं। इस वारदात से बैंक कर्मियों में दहशत फैल गई थी जिसका असर शुक्रवार को भी नजर आया। सुबह 10 बजे बैंक खुलने के बाद सुरक्षा में चार बंदूकधारी पुलिस कर्मियों को वहां पर तैनात किया गया था। मुख्य गेट को एक आदमी के आनेजाने के लिए खोला गया था। इतने सख्त सुरक्षा के इंतजाम होने के बावजूद बैंक कर्मियों के चेहरे पर खौफ नजर आ रहा था। वह अपने-अपने पटल पर बैठकर काम करने के साथ-साथ बृहस्पतिवार को हुई घटना के बारे में चर्चा करते दिखे।
कई बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आकर भी अपने परिचितों से हालचाल पूछे और पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी की। वहीं, शुक्रवार को बैंक के अंदर अन्य दिनों की अपेक्षा काफी कम ग्राहक आए।
बैंकों की सुरक्षा के लिए यह होना है जरूरी
-----------------------------------
- बैंक के मुख्य द्वार पर सशस्त्र गार्ड की तैनाती
- बैंक के भीतर व बाहर सीसी टीवी कैमरे
- आकस्मिक स्थिति से निपटे को सायरन
- मुख्य द्वार पर जंजीर, जिससे एक बार में एक व्यक्ति ही आ जा सके
- हथियार व लाठी-डंडा लेकर नहीं जा सकते भीतर
- मुंह ढंककर बैंक में दाखिल होना है प्रतिबंधित
- बैंक परिसर में नहीं किया जा सकता मोबाइल का प्रयोग
किसी जमाने में बैंक की हर शाखा में सशस्त्र गार्ड मुस्तैदी से तैनात नजर आता था। लेकिन, बैंकों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ बैंक प्रबंधन गार्डों की व्यवस्था खत्म करते जा रहे हैं। इक्का दुक्का बैंक शाखाओं में ही अब गार्ड नजर आते हैं। बैंक प्रबंधन शहर से दूरदराज के इलाकों में स्थित बैंक शाखाओं व मिश्रित आबादी क्षेत्र की शाखाओं में ही गार्ड रख रहे हैं। ऐसा खर्चे में कटौती के लिए किया जा रहा है, परंतु यहां सवाल यह है कि एक बैंक शाखा के रखरखाव, किराये, बिजली, वेतन व अन्य मदों में करोड़ों खर्च होते हैं, तो सुरक्षा के लिए 20-25 हजार रुपये खर्च कर गार्ड नहीं रखे जा सकते।
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घटना के बाद रखे जाते हैं गार्ड
बैंक अब गार्ड रखने की जगह शाखा का इंश्योरेंस करा देते हैं। यह गार्ड पर खर्च होने वाली रकम से सस्ता पड़ता है। बैंक का बीमा शाखा के व्यवसाय के अनुसार तय होता है। केवल रिस्की शाखाओं में ही अब गार्ड रखे जा रहे हैं। किसी भी बैंक शाखा में घटना होने के बाद उसे रिस्की मान लिया जाता है और वहां गार्ड की व्यवस्था कर दी जाती है। जबकि, पहले बैंक की हर शाखा में गार्ड की व्यवस्था होती थी।
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- गोपाल जी अग्रवाल, रिटायर्ड बैंक अधिकारी
कर्मचारियों की सुरक्षा है ताक पर
गार्ड की तनख्वाह बचाने के चक्कर में बैंकों के उच्च प्रबंधन कर्मचारियों व अधिकारियों की सुरक्षा ताक पर रखे हुए हैं। बीते रोज नगर में स्थित बैंक शाखा में हुई डकैती की घटना से उच्चाधिकारियों को सबक लेना चाहिए। सशस्त्र गार्ड को तैनात देखकर असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त पड़ जाते हैं। सभी बैंक शाखाओं में अनिवार्य रूप से गार्ड व अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए।
- बी बी मेहता, सह संयोजक - यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बाद भी दिखा खौफ
अन्य दिनों की अपेक्षा काफी कम आए ग्राहक
घायल बैंक प्रबंधक समेत तीनों कर्मी नहीं आए
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भले ही नंदनपुरा के पंजाब नेशनल बैंक में शुक्रवार को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, मगर मौजूद कर्मियों के चेहरों पर दहशत नजर आ रही थी। बम के धमाकों में घायल होने की वजह से शाखा प्रबंधक, सहायक प्रबंधक समेत तीनों कर्मी नहीं आए थे। वहीं, अन्य दिनों की अपेक्षा ग्राहक भी कम आए थे।
बृहस्पतिवार को सशस्त्र बदमाशों ने दिनदहाड़े बैंक के अंदर दुस्साहसिक तरीके से बम फेंककर लूटपाट की थी। बम के धमाकों से बैंक प्रबंधक एमबी आर्या, सहायक बैंक प्रबंधक प्रदीप कुमार व बैंक कर्मी नेहा घायल हो गईं थीं। इस वारदात से बैंक कर्मियों में दहशत फैल गई थी जिसका असर शुक्रवार को भी नजर आया। सुबह 10 बजे बैंक खुलने के बाद सुरक्षा में चार बंदूकधारी पुलिस कर्मियों को वहां पर तैनात किया गया था। मुख्य गेट को एक आदमी के आनेजाने के लिए खोला गया था। इतने सख्त सुरक्षा के इंतजाम होने के बावजूद बैंक कर्मियों के चेहरे पर खौफ नजर आ रहा था। वह अपने-अपने पटल पर बैठकर काम करने के साथ-साथ बृहस्पतिवार को हुई घटना के बारे में चर्चा करते दिखे।
कई बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आकर भी अपने परिचितों से हालचाल पूछे और पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी की। वहीं, शुक्रवार को बैंक के अंदर अन्य दिनों की अपेक्षा काफी कम ग्राहक आए।
बैंकों की सुरक्षा के लिए यह होना है जरूरी
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- बैंक के मुख्य द्वार पर सशस्त्र गार्ड की तैनाती
- बैंक के भीतर व बाहर सीसी टीवी कैमरे
- आकस्मिक स्थिति से निपटे को सायरन
- मुख्य द्वार पर जंजीर, जिससे एक बार में एक व्यक्ति ही आ जा सके
- हथियार व लाठी-डंडा लेकर नहीं जा सकते भीतर
- मुंह ढंककर बैंक में दाखिल होना है प्रतिबंधित
- बैंक परिसर में नहीं किया जा सकता मोबाइल का प्रयोग