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बीपीएल कार्ड होने के बाद भी नहीं आयुष्मान के पात्र

Sat, 28 Sep 2019 02:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2019 02:18 AM IST
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बीपीएल कार्ड होने के बाद भी नहीं आयुष्मान के पात्र
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झांसी। बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) कार्ड बना होने के बावजूद जनपद के कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना से वंचित हैं। सर्वे में नाम न आने के कारण वह योजना के पात्र नहीं बन सके हैं। सिस्टम की इस खामी के चलते एक बड़ा तबका बेहतर इलाज कराने में अक्षम है। आर्थिक स्थिति बदतर होने के कारण इन परिवारों का कोई सदस्य यदि बीमार पड़ जाता है, तो इलाज कराना मुश्किल हो जाता है।
आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की सूची तैयार हुई तो उसमें धनाढ्य लोगों के भी नाम शामिल कर लिए गए। इसमें नेता, व्यापारी के नाम आने के बाद हंगामा हुआ तो बाद में सूची से उनके नाम काटे गए। कुछ लोगों ने खुद भी आगे आकर अपने नाम कटवाए। इसके बावजूद एक बड़ा गरीब तबका इस योजना का लाभ पाने से वंचित है। सूची में बीपीएल कार्ड धारकों तक के नाम नहीं हैं। नाम जुड़वाने के लिए जब वह शिविरों, अस्पतालों में संपर्क करते हैं, तो उनसे दोबारा सर्वे होने पर नाम जुड़वाने की बात कह दी जाती है।
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केस-1
मऊरानीपुर के ग्राम धनाई निवासी दशरथ विश्वकर्मा पुत्र रामरतन विश्वकर्मा बीपीएल कार्डधारक हैं। वह बटाई का काम करते हैं। परिवार में उनके पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। दशरथ ने बताया कि गरीबी रेखा के नीचे होने के बावजूद उनका आयुष्मान भारत योजना का कार्ड नहीं बन सका है। इस योजना में पहला हक गरीबों का है। यदि परिवार को कोई सदस्य बीमार पड़ जाता है तो बहुत समस्या हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं है कि महंगी-महंगी दवाएं लेकर इलाज करा सकें। उन्होंने अपना नाम योजना में जोड़ने की मांग की है।
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केस-2
तालपुरा निवासी दीपक वर्मा पुत्र जमुना प्रसाद का भी बीपीएल कार्ड बना हुआ है। उन्होंने कहा कि वह कच्चे मकान में रहते हैं। मौजूदा समय में परिवार में माता-पिता, दो भाई और एक बहन हैं। उनके पिता मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना की सूची में उनका नाम नहीं है। परिवार का कोई न कोई सदस्य अक्सर बीमार होता रहता है। चूंकि, पिता मासिक पांच हजार रुपये कमा पाते हैं। इतने कम पैसे में दवाओं का भार उठा पाना संभव नहीं है। हमारा भी आयुष्मान का गोल्डन कार्ड बनना चाहिए।
सामाजिक, आर्थिक, जातिगत आधार पर 2011 में सर्वे किया गया। उसमें से जो पात्र लोगों की सूची बनाई गई है, वहीं केंद्र सरकार की ओर से पोर्टल पर अपलोड की गई है। इस सूची में कोई भी नया नाम नहीं जोड़ा जा सकता है। जो गरीब लोग छूट गए हैं, इनके लिए भविष्य में सरकार जो भी निर्णय लेगी, उसका अनुपालन किया जाएगा। - डॉ. सुशील प्रकाश, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
अमर उजाला का अभियान
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को एक साल पूरे हो चुके हैं। इतना लंबा समय गुजरने के बाद भी सरकार की नि:शुल्क इलाज देने की मंशा अब तक अधूरी है। इस योजना के अंतर्गत जनपद की स्थिति और लाभार्थियों की समस्याओं को लेकर अमर उजाला अभियान चला रहा है। अभियान के तहत लगातार सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित कर योजना की हकीकत बयां की जा रही है।
आप भी दे सकते सुझाव
योजना के संबंध में कोई भी सुझाव या जानकारी देने के लिए आप हमारे मोबाइल नंबर 7617566165 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं। इसके अलावा jhs-cityreporter@jhs.amarujala.com पर ई-मेल भी कर सकते हैं।

योजना के बारे में जानें
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को की गई थी। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को लाभार्थी बनाया गया। योजना के पैनल में शामिल सरकारी और निजी अस्पतालों में लाभार्थी इलाज करा सकते हैं। योजना के तहत लाभार्थी को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
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