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बबीना छावनी का पराक्रम बढ़ाएंगी ‘के-9 थंडर’ आर्टिलरी गन

Thu, 19 Dec 2019 02:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Dec 2019 02:00 AM IST
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army power increase k9 thundee artilery gun
वैभव शर्मा
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झांसी। झांसी की बबीना छावनी को जल्द ही विश्व की आधुनिकतम आर्टिलरी गन ‘के-9 थंडर’ मिलेंगी। दक्षिण कोरिया द्वारा विकसित इस आर्टिलरी गन को भारतीय परिस्थितियों के लिए खास तौर पर ‘के-9 वज्र’ के रूप में तैयार किया है। यह हर मौसम और किसी भी तापमान पर विषम परिस्थितियों में जीरो रेडियस पर अचूक आक्रमण की क्षमता रखती है। अपनी खास तकनीकी खूबियों और मारक क्षमता के कारण युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान के रेगिस्तान से लगे बॉर्डर में इसकी मौजूदगी उपयोगी साबित होगी। भारत-रूस संयुक्त सैन्याभ्यास ‘इंद्र 2019’ के समापन समारोह में शामिल होने बुधवार को बबीना छावनी आ चुके रक्षा राज्यमंत्री इस संबंध में शीर्ष सैन्य अधिकारियों से बबीना में ‘के-9 वज्र’ की संख्या पर गोपनीय बैठक कर सकते हैं।
शीर्ष रक्षा सूत्रों के अनुसार शुरुआत में भारतीय सेना की दो यूनिट को ये गन दी जा चुकी हैं। जल्द ही यह गन बबीना छावनी के बेड़े की शान और पराक्रम को बढ़ाएंगी। यह 155 मिलीमीटर एल 52 हविट्जर बैरल वाली गन है। पूरी तरह ऑटोमेटिक इस गन की अधिकतम मारक क्षमता 40 किलोमीटर है। करीब 50 टन वजन वाली यह आर्टिलरी गन 47 किलो वजन वाले बम के गोले दाग सकती है। यह एक मिनट में छह राउंड फायर कर सकती है। साथ ही, 15 सेकंड में तीन राउंड अलग-अलग दिशाओं में इस तरह दाग सकती है कि वे अपने लक्ष्य को एक साथ निशाना बनाएंगे।
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यह ऑटोमेटिक फायर कंट्रोल सिस्टम और नैवीगेशन (पथ प्रदर्शन) तकनीक से लैस है, स्थिर अवस्था में यह तीस सेकंड में फायर कर सकती है, जबकि गतिमान अवस्था में 60 सेकंड में हमला करने की क्षमता रखती है। दुश्मन के किसी भी हमले की स्थिति में यह तत्काल अपनी जगह से हटने की विशेषता भी रखती है। यह खास स्टील की 19 मिलीमीटर मोटी चादर से बनी है। इसमें कमांडर, गनर, सहायक गनर, लोडर और ड्राइवर कुल पांच लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसका इंजन एक हजार हॉर्स पावर वाला जर्मन एमटीयू एमटी 881 केए-500 डीजल इंजन है। दुश्मन के हमले के दौरान इसके अंदर बैठे लोग बिना बाहर निकले इसे ऑटोमेटिक मोड में रीलोड कर सकते हैं।
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100 गन आएंगी भारतीय सेना के हिस्से
‘के-9 वज्र’ की सौ आर्टिलरी गन भारतीय सेना के हिस्सा आएंगी। इनमें दस अर्धनिर्मित अवस्था में दक्षिणी कोरिया से आई हैं, इन्हें मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत गुजरात में सूरत के पास हजारिया में निजी कंपनी एलएंड टी द्वारा आर्मर्ड सिस्टम कांपलेक्स में पूरा किया जाएगा। शेष 90 गन भी भारत में ही तैयार होंगी।
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