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झांसी में नर्सिंगहोम से 30 से 40 फीसदी कमीशन लेकर मरीज पहुंचा रहे एंबुलेंस वाले
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झांसी। नर्सिंग होम और एंबुलेंस वालों के बीच कमीशनबाजी का बड़ा खेल चल रहा है। एंबुलेंस वाले 30 से 40 फीसदी कमीशन लेकर निजी अस्पतालों में मरीज पहुंचा रहे हैं। यह लोग रास्ते में मरीज और उनके घर वालों को एक ऐसा डाक्टर सुझाते हैं जिससे उनकी सेटिंग होती है। बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर एक ऐसा ऑडियो सामने आया जिसने कमीशनबाजी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करके रख दिया है।
अगर झांसी की बात की जाए तो यहां 110 नर्सिंगहोम स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं। इनमें से कई नर्सिंगहोमों ने मरीजों को भर्ती करने के लिए अपने-अपने एंबुलेंस चालक सेट कर रखे हैं। सड़कों पर दौड़ रहीं कई एंबुलेंस के चालक नर्सिंगहोमों के लिए बाकायदा एजेंट का काम कर रहे हैं। झांसी के आसपास के जिलों और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को गुमराह करके एंबुलेंस चालक अपनी सेटिंग वाले अस्पतालों में ले जाते हैं। पहले से ही नर्सिंगहोम और चालक के बीच कमीशन सेट रहता है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद मरीज के बिल का मीटर चलना शुरू हो जाता है। महंगी-महंगी दवाएं और तरह-तरह के शुल्क लगाकर रोगियों का हजारों रुपये का बिल बना दिया जाता है। अक्सर बिल को लेकर नर्सिंगहोमों में मरीजों के परिजनों की स्टाफ से तू-तू, मैं-मैं और झड़प तक हो जाती है। मरीज के डिस्चार्ज होते ही एंबुलेंस चालक के पास अस्पताल का बुलावा आता है। किसी चालक को बिल का 30 तो किसी को 40 प्रतिशत कमीशन दिया जाता है। झांसी ही नहीं ललितपुर, टीकमगढ़, दतिया, उरई, हमीरपुर, महोबा से लेकर बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के आसपास के कई एंबुलेंस चालकों की नर्सिंगहोंमों के साथ सांठगांठ है।
डॉक्टर बोला-20 हजार का बिल बना तो सीधे-सीधे छह हजार मिल जाएंगे
सोशल मीडिया पर डॉक्टर और एंबुलेंस चालक की बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ है। ये ऑडियो कब का है, जिन लोगों के बीच बातचीत हो रही है, वो कौन है, इसकी सत्यता तो जांच के बाद ही पता चलेगी। मगर ऑडियो में हुई बातचीत से इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा हो गया है। इस कांफ्रेंस कॉल में तीन लोग जुड़े हैं। एंबुलेंस चालक डॉक्टर से पूछता है कि आपका अस्पताल कहां है। डॉक्टर मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित एक नर्सिंगहोम का नाम लेता है। चालक बोलता है कि वह तालबेहट के पास है। अभी ढाबे पर रुका हुआ है। मरीज एंबुलेंस में है। बताइये कितना कमीशन मिलेगा? इस पर डॉक्टर बोलता है कि बिल का 30 परसेंट। फिर एंबुलेंस चालक बोलता है कि हम तो सोच रहे थे, अच्छा खासा हिसाब-किताब बन जाएगा। हमें भी कुछ मिल जाए और आपको भी। तब डॉक्टर बोलता है कि अगर 20 हजार बिल बना तो छह हजार सीधा-सीधा मिल जाएगा और 30 हजार बनता तो नौ हजार मिलेगा। चालक के पूछने पर डॉक्टर अपना नाम भी बताता है। फिर बोलता है कि वह तो कहीं और बैठता है मगर एक नर्सिंगहोम का नाम लेकर कहता है कि वहां भर्ती करेंगे। वहीं, इस मामले में संबंधित नर्सिंगहोम संचालक का कहना है कि उन्हें ऑडियो के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न ही उनके यहां ऐसा कोई काम होता है। जिस डॉक्टर के नाम का जिक्र ऑडियो में हुआ है, उसे वह जानते नहीं हैं।
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खुद के अस्पताल में मेडिकल स्टोर खोले
कई नर्सिंगहोमों ने अपने ही अस्पताल में मेडिकल स्टोर खोल रखे हैं। डॉक्टर ऐसी ही दवाएं लिखते हैं, जो कि उनके ही मेडिकल स्टोरों पर मिले। दूरदराज के मरीजों को दवाएं खत्म होने पर इधर-उधर भटकते रहते हैं मगर उन्हें कहीं दवा नहीं मिलती। थक हारकर नर्सिंगहोम में बने मेडिकल स्टोर ही आना पड़ता है। बताया गया कि 30 से लेकर 50 फीसदी तक दवाओं में डॉक्टरों को कमीशन मिलता है।
कोरोना काल में भी वायरल हो चुका ऑडियो
कोरोना काल में भी एक एंबुलेंस चालक का ऑडियो वायरल हो गया था। बाद में पुलिस ने चालक की गिरफ्तार भी की। इसमें चालक बोल रहा था कि कोविड के दौरान नर्सिंगहोमों में मरीज भर्ती करने पर उसकी खूब कमाई हो रही है। ये महामारी आगे भी चलती रही तो उसको बहुत मुनाफा हो जाएगा।
मरीजों की सौदेबाजी करना अमानवीयता है। इस मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसको बख्शा नहीं जाएगा। - डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ।
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अगर झांसी की बात की जाए तो यहां 110 नर्सिंगहोम स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं। इनमें से कई नर्सिंगहोमों ने मरीजों को भर्ती करने के लिए अपने-अपने एंबुलेंस चालक सेट कर रखे हैं। सड़कों पर दौड़ रहीं कई एंबुलेंस के चालक नर्सिंगहोमों के लिए बाकायदा एजेंट का काम कर रहे हैं। झांसी के आसपास के जिलों और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को गुमराह करके एंबुलेंस चालक अपनी सेटिंग वाले अस्पतालों में ले जाते हैं। पहले से ही नर्सिंगहोम और चालक के बीच कमीशन सेट रहता है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद मरीज के बिल का मीटर चलना शुरू हो जाता है। महंगी-महंगी दवाएं और तरह-तरह के शुल्क लगाकर रोगियों का हजारों रुपये का बिल बना दिया जाता है। अक्सर बिल को लेकर नर्सिंगहोमों में मरीजों के परिजनों की स्टाफ से तू-तू, मैं-मैं और झड़प तक हो जाती है। मरीज के डिस्चार्ज होते ही एंबुलेंस चालक के पास अस्पताल का बुलावा आता है। किसी चालक को बिल का 30 तो किसी को 40 प्रतिशत कमीशन दिया जाता है। झांसी ही नहीं ललितपुर, टीकमगढ़, दतिया, उरई, हमीरपुर, महोबा से लेकर बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के आसपास के कई एंबुलेंस चालकों की नर्सिंगहोंमों के साथ सांठगांठ है।
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डॉक्टर बोला-20 हजार का बिल बना तो सीधे-सीधे छह हजार मिल जाएंगे
सोशल मीडिया पर डॉक्टर और एंबुलेंस चालक की बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ है। ये ऑडियो कब का है, जिन लोगों के बीच बातचीत हो रही है, वो कौन है, इसकी सत्यता तो जांच के बाद ही पता चलेगी। मगर ऑडियो में हुई बातचीत से इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा हो गया है। इस कांफ्रेंस कॉल में तीन लोग जुड़े हैं। एंबुलेंस चालक डॉक्टर से पूछता है कि आपका अस्पताल कहां है। डॉक्टर मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित एक नर्सिंगहोम का नाम लेता है। चालक बोलता है कि वह तालबेहट के पास है। अभी ढाबे पर रुका हुआ है। मरीज एंबुलेंस में है। बताइये कितना कमीशन मिलेगा? इस पर डॉक्टर बोलता है कि बिल का 30 परसेंट। फिर एंबुलेंस चालक बोलता है कि हम तो सोच रहे थे, अच्छा खासा हिसाब-किताब बन जाएगा। हमें भी कुछ मिल जाए और आपको भी। तब डॉक्टर बोलता है कि अगर 20 हजार बिल बना तो छह हजार सीधा-सीधा मिल जाएगा और 30 हजार बनता तो नौ हजार मिलेगा। चालक के पूछने पर डॉक्टर अपना नाम भी बताता है। फिर बोलता है कि वह तो कहीं और बैठता है मगर एक नर्सिंगहोम का नाम लेकर कहता है कि वहां भर्ती करेंगे। वहीं, इस मामले में संबंधित नर्सिंगहोम संचालक का कहना है कि उन्हें ऑडियो के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न ही उनके यहां ऐसा कोई काम होता है। जिस डॉक्टर के नाम का जिक्र ऑडियो में हुआ है, उसे वह जानते नहीं हैं।
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खुद के अस्पताल में मेडिकल स्टोर खोले
कई नर्सिंगहोमों ने अपने ही अस्पताल में मेडिकल स्टोर खोल रखे हैं। डॉक्टर ऐसी ही दवाएं लिखते हैं, जो कि उनके ही मेडिकल स्टोरों पर मिले। दूरदराज के मरीजों को दवाएं खत्म होने पर इधर-उधर भटकते रहते हैं मगर उन्हें कहीं दवा नहीं मिलती। थक हारकर नर्सिंगहोम में बने मेडिकल स्टोर ही आना पड़ता है। बताया गया कि 30 से लेकर 50 फीसदी तक दवाओं में डॉक्टरों को कमीशन मिलता है।
कोरोना काल में भी वायरल हो चुका ऑडियो
कोरोना काल में भी एक एंबुलेंस चालक का ऑडियो वायरल हो गया था। बाद में पुलिस ने चालक की गिरफ्तार भी की। इसमें चालक बोल रहा था कि कोविड के दौरान नर्सिंगहोमों में मरीज भर्ती करने पर उसकी खूब कमाई हो रही है। ये महामारी आगे भी चलती रही तो उसको बहुत मुनाफा हो जाएगा।
मरीजों की सौदेबाजी करना अमानवीयता है। इस मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसको बख्शा नहीं जाएगा। - डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ।