{"_id":"6a57f4680e239e0dd10b78b3","slug":"after-23-years-ranis-haathi-khana-is-being-looked-after-jhansi-news-c-11-1-jhs1019-835858-2026-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: 23 साल बाद रानी के ‘हाथी खाना’ की सुध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: 23 साल बाद रानी के ‘हाथी खाना’ की सुध
Thu, 16 Jul 2026 02:28 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Thu, 16 Jul 2026 02:28 AM IST
विज्ञापन
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर ‘हाथी खाना’ के संरक्षण और नवीनीकरण की दिशा में आखिरकार 23 वर्ष बाद पहल शुरू हुई है। राज्य संरक्षित स्मारक घोषित होने के बावजूद वर्षों तक उपेक्षा झेलने वाले इस ऐतिहासिक स्थल के जीर्णोद्धार की योजना तैयार की गई है। हालांकि, राजस्व अभिलेखों में दर्ज निजी नामों के कारण प्रक्रिया फिलहाल अटक गई है। पुरातत्व विभाग ने संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है।
प्रदेश सरकार ने एक मई 2003 को अधिसूचना जारी कर हाथी खाना को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया था। इसके बावजूद लंबे समय तक इसके संरक्षण और रखरखाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इस दौरान परिसर और आसपास के क्षेत्र में अतिक्रमण भी बढ़ता गया।
पुरातत्व अधिकारी राजीव त्रिवेदी ने बताया कि स्मारक के नवीनीकरण की योजना तैयार की गई है। इसके तहत क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत, रंग-रोगन और अन्य संरक्षण कार्य कराए जाएंगे। कार्य शुरू करने से पहले राजस्व अभिलेखों की जांच में कुछ लोगों के नाम दर्ज मिले हैं। इन्हें नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवीनीकरण का प्रस्ताव शासन को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
विज्ञापन
रानी लक्ष्मीबाई के हाथी यहीं बांधे जाते थे
हाथी खाना का ऐतिहासिक महत्व मराठा शासनकाल से जुड़ा माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, महारानी लक्ष्मीबाई के समय यहां शाही हाथी रखे और बांधे जाते थे। परिसर में उस दौर की स्थापत्य शैली आज भी दिखाई देती है। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए वर्ष 2003 में इसे राज्य संरक्षित स्मारक घोषित कर पुरातत्व विभाग को सौंपा गया था। हालांकि, संरक्षण के अभाव में परिसर के आसपास अतिक्रमण बढ़ता गया। करीब पांच वर्ष पहले भी इसके सुंदरीकरण की योजना बनी थी लेकिन भूमि विवाद और अतिक्रमण के कारण काम शुरू नहीं हो सका।
तीन वर्षों में नौ ऐतिहासिक धरोहरें पुरातत्व विभाग से बाहर
बुंदेलखंड की कई ऐतिहासिक धरोहरें संरक्षण के अभाव में लगातार उपेक्षा का शिकार हो रही हैं। पिछले तीन वर्षों में नौ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परिसरों को पुरातत्व विभाग के संरक्षण से वापस ले लिया गया। इनमें रघुनाथ राव महल, बरुआसागर किला, टहरौली किला, दिगारा की गढ़ी और रानी महल के सामने स्थित भूमि सहित अन्य धरोहरें शामिल हैं। रघुनाथ राव महल के संरक्षण पर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत धनराशि भी खर्च की गई थी लेकिन बाद में इसे भी पुरातत्व विभाग से वापस ले लिया गया। वर्तमान में इसके आसपास अवैध निर्माण और अतिक्रमण बढ़ चुके हैं।
विज्ञापन
प्रदेश सरकार ने एक मई 2003 को अधिसूचना जारी कर हाथी खाना को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया था। इसके बावजूद लंबे समय तक इसके संरक्षण और रखरखाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इस दौरान परिसर और आसपास के क्षेत्र में अतिक्रमण भी बढ़ता गया।
विज्ञापन
पुरातत्व अधिकारी राजीव त्रिवेदी ने बताया कि स्मारक के नवीनीकरण की योजना तैयार की गई है। इसके तहत क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत, रंग-रोगन और अन्य संरक्षण कार्य कराए जाएंगे। कार्य शुरू करने से पहले राजस्व अभिलेखों की जांच में कुछ लोगों के नाम दर्ज मिले हैं। इन्हें नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवीनीकरण का प्रस्ताव शासन को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
विज्ञापन
रानी लक्ष्मीबाई के हाथी यहीं बांधे जाते थे
हाथी खाना का ऐतिहासिक महत्व मराठा शासनकाल से जुड़ा माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, महारानी लक्ष्मीबाई के समय यहां शाही हाथी रखे और बांधे जाते थे। परिसर में उस दौर की स्थापत्य शैली आज भी दिखाई देती है। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए वर्ष 2003 में इसे राज्य संरक्षित स्मारक घोषित कर पुरातत्व विभाग को सौंपा गया था। हालांकि, संरक्षण के अभाव में परिसर के आसपास अतिक्रमण बढ़ता गया। करीब पांच वर्ष पहले भी इसके सुंदरीकरण की योजना बनी थी लेकिन भूमि विवाद और अतिक्रमण के कारण काम शुरू नहीं हो सका।
तीन वर्षों में नौ ऐतिहासिक धरोहरें पुरातत्व विभाग से बाहर
बुंदेलखंड की कई ऐतिहासिक धरोहरें संरक्षण के अभाव में लगातार उपेक्षा का शिकार हो रही हैं। पिछले तीन वर्षों में नौ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परिसरों को पुरातत्व विभाग के संरक्षण से वापस ले लिया गया। इनमें रघुनाथ राव महल, बरुआसागर किला, टहरौली किला, दिगारा की गढ़ी और रानी महल के सामने स्थित भूमि सहित अन्य धरोहरें शामिल हैं। रघुनाथ राव महल के संरक्षण पर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत धनराशि भी खर्च की गई थी लेकिन बाद में इसे भी पुरातत्व विभाग से वापस ले लिया गया। वर्तमान में इसके आसपास अवैध निर्माण और अतिक्रमण बढ़ चुके हैं।