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आयुर्वेदिक कॉलेज को इस बार भी मिल सकती मान्यता
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आयुर्वेदिक कॉलेज को इस बार भी मिल सकती मान्यता
झांसी। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की मान्यता को लेकर हर बार संकट के बादल मंडराते रहते हैं। कोरोना की पहली लहर के दौरान लॉकडाउन होने के चलते केंद्रीय आयुष चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) की टीम निरीक्षण करने नहीं आ पाई और मान्यता दे दी। इस बार भी सीसीआईएम बिना टीम भेजे ही मान्यता को हरी झंडी दिखा सकता है। कॉलेज अधिकारी भी इसकी संभावना जता रहे हैं। हालांकि, टीम के निरीक्षण को लेकर भी उनकी तैयारियां पूरी हैं।
कॉलेज में मौलिक सिद्धांत, शरीर रचना, शरीर क्रिया, द्रव्य गुण, रस शास्त्र एवं वैशज्य कल्पना विज्ञान, रोग निदान, अगद तंत्र एवं व्यवहार आयुर्वेद समेत 14 विभाग हैं। सभी में हायर फैकल्टी होना अनिवार्य है। मगर काय चिकित्सा विभाग में दो हायर फैकल्टी की जरूरत पड़ती है, जिसमें एक प्रोफेसर होना अनिवार्य है। कॉलेज में वैसे तो चालीस सीटें हैं मगर पिछले साल दस अतिरिक्त सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिली है, ऐसे में बीएएमएस की 50 सीटों पर प्रवेश हुए।
हर बार मान्यता के लिए सीसीआईएम के टीम निरीक्षण के लिए आती है मगर कोरोना की पहली लहर में पिछले साल टीम नहीं आ पाई और सत्र 2020-21 के लिए मान्यता दे दी। हर बार अप्रैल-मई तक टीम की ओर से निरीक्षण कर लिया जाता है, जो कि समय निकल चुका है। ऐसे में इस बार भी उम्मीद है कि सीसीआईएम की तरफ से बिना टीम भेजे ही मान्यता दे दी जाए।
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सात साल में चार बार मिली मान्यता
आयुर्वेदिक कॉलेज में हर बार मान्यता का संकट बरकरार रहता है। पिछले सात सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन बार कॉलेज को मान्यता मिली, जबकि तीन बार निरस्त हो गई। वर्ष 2014, 2015 में कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकी। 2016 में मान्यता प्राप्त हो गई। 2017 में फिर से सीसीआईएम ने मान्यता निरस्त कर दी गई। इसके बाद से 2018 और 2019 में हरी झंडी दिखा दी। पिछले साल भी सीसीआईएम की टीम निरीक्षण करने नहीं आ सकी और कॉलेज को मान्यता मिल गई।
इतने शिक्षक हैं तैनात
प्रोफेसर - 3
एसोसिएट प्रोफेसर - 8
असिस्टेंट प्रोफेसर - 20
कॉलेज एक नजर में
कोर्स: बीएएमएस (स्नातक)
अवधि: चार साल
सीट: 50
फीस: 14500 (सामान्य)
11500 (एससी-एसटी)
वर्जन..
मार्च से लेकर मई के बीच में कभी भी सीसीआईएम की टीम निरीक्षण करने के लिए आ जाती है। कोरोना के चलते पिछली बार बिना निरीक्षण के ही मान्यता मिल गई थी। अभी कुछ तय नहीं है। संभावना है कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी मान्यता जारी कर दिया जाए। यदि टीम निरीक्षण के लिए आती भी है तो भी हमारी तैयारियां पूरी हैं। - डॉ. केदारनाथ यादव, प्राचार्य, आयुर्वेदिक कॉलेज।
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झांसी। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की मान्यता को लेकर हर बार संकट के बादल मंडराते रहते हैं। कोरोना की पहली लहर के दौरान लॉकडाउन होने के चलते केंद्रीय आयुष चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) की टीम निरीक्षण करने नहीं आ पाई और मान्यता दे दी। इस बार भी सीसीआईएम बिना टीम भेजे ही मान्यता को हरी झंडी दिखा सकता है। कॉलेज अधिकारी भी इसकी संभावना जता रहे हैं। हालांकि, टीम के निरीक्षण को लेकर भी उनकी तैयारियां पूरी हैं।
कॉलेज में मौलिक सिद्धांत, शरीर रचना, शरीर क्रिया, द्रव्य गुण, रस शास्त्र एवं वैशज्य कल्पना विज्ञान, रोग निदान, अगद तंत्र एवं व्यवहार आयुर्वेद समेत 14 विभाग हैं। सभी में हायर फैकल्टी होना अनिवार्य है। मगर काय चिकित्सा विभाग में दो हायर फैकल्टी की जरूरत पड़ती है, जिसमें एक प्रोफेसर होना अनिवार्य है। कॉलेज में वैसे तो चालीस सीटें हैं मगर पिछले साल दस अतिरिक्त सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिली है, ऐसे में बीएएमएस की 50 सीटों पर प्रवेश हुए।
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हर बार मान्यता के लिए सीसीआईएम के टीम निरीक्षण के लिए आती है मगर कोरोना की पहली लहर में पिछले साल टीम नहीं आ पाई और सत्र 2020-21 के लिए मान्यता दे दी। हर बार अप्रैल-मई तक टीम की ओर से निरीक्षण कर लिया जाता है, जो कि समय निकल चुका है। ऐसे में इस बार भी उम्मीद है कि सीसीआईएम की तरफ से बिना टीम भेजे ही मान्यता दे दी जाए।
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सात साल में चार बार मिली मान्यता
आयुर्वेदिक कॉलेज में हर बार मान्यता का संकट बरकरार रहता है। पिछले सात सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन बार कॉलेज को मान्यता मिली, जबकि तीन बार निरस्त हो गई। वर्ष 2014, 2015 में कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकी। 2016 में मान्यता प्राप्त हो गई। 2017 में फिर से सीसीआईएम ने मान्यता निरस्त कर दी गई। इसके बाद से 2018 और 2019 में हरी झंडी दिखा दी। पिछले साल भी सीसीआईएम की टीम निरीक्षण करने नहीं आ सकी और कॉलेज को मान्यता मिल गई।
इतने शिक्षक हैं तैनात
प्रोफेसर - 3
एसोसिएट प्रोफेसर - 8
असिस्टेंट प्रोफेसर - 20
कॉलेज एक नजर में
कोर्स: बीएएमएस (स्नातक)
अवधि: चार साल
सीट: 50
फीस: 14500 (सामान्य)
11500 (एससी-एसटी)
वर्जन..
मार्च से लेकर मई के बीच में कभी भी सीसीआईएम की टीम निरीक्षण करने के लिए आ जाती है। कोरोना के चलते पिछली बार बिना निरीक्षण के ही मान्यता मिल गई थी। अभी कुछ तय नहीं है। संभावना है कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी मान्यता जारी कर दिया जाए। यदि टीम निरीक्षण के लिए आती भी है तो भी हमारी तैयारियां पूरी हैं। - डॉ. केदारनाथ यादव, प्राचार्य, आयुर्वेदिक कॉलेज।