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अभी छोटा है, इसे तो न दें बाइक
Jhansi
Updated Sat, 04 May 2013 05:30 AM IST
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विकास सनाड्य
झांसी। आप भूले न हों तो तकरीबन तीन माह पूर्व डीआरएम दफ्तर के निकट बाइक पर सवार दो स्कूली बच्चों को एक तेज रफ्तार ऑटो ने टक्कर मार दी थी। बगैर हेलमेट के दोनों ही बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सौभाग्य से तुरंत मेडिकल सुविधा मिल जाने के कारण दोनों की जान बच गई, लेकिन यह ‘सौभाग्य’ जरूरी नहीं कि ऐसी दुर्घटनाओं में सभी के साथ हो।
बाइक से स्कूल जाने की प्रवृति खतरनाक
आठवीं कक्षा से ही विद्यार्थियों द्वारा बाइक से स्कूल जाने की प्रवृति इन दिनों तेजी से बढ़ी है। नियमत: 16 वर्ष से कम उम्र होने के कारण इन बच्चों को बाइक नहीं चलानी चाहिए, लेकिन न तो अभिभावक और न ही स्कूल प्रशासन उन्हें इससे रोकता है। यही वजह है कि स्कूलों में बने साइकिल स्टैंड अब मोटरसाइकिल स्टैंड में तब्दील होते जा रहे हैं। सड़कों पर भी मोटरसाइकिल सवार किशोर फर्राटे भरते नजर आते हैं, जबकि इनके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही उन्हें यातायात नियमों की जानकारी ही होती है। यह उत्साही ड्राइवर खुद की जान तो जोखिम में डालते ही हैं, साथ ही सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। बावजूद, इस खतरनाक स्थिति पर लगाम लगाने की फुर्सत किसी को नहीं है।
... आपका बच्चा है, उसकी चिंता तो करें
बच्चों में बढ़ रही बाइक चलाने की प्रवृति में अभिभावक ही उत्प्रेरक बन बैठे हैं। बच्चों की थोड़ी जिद और ऑटो पर आने वाले खर्च में कटौती को देखते हुए वह 14- 15 साल के अपने पुत्र या पुत्री को स्कूटी, स्कूटर और बाइक खरीद कर देने में वह कोई संकोच नहीं कर रहे हैं। उन्हें यह भी देखने की फुर्सत नहीं कि उनके बच्चे बाइक या स्कूटी की सवारी सुरक्षित तरीके से कर भी रहे हैं या नहीं? उन्होंने हेलमेट भी लगाया है या नहीं?
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मोटर व्हीकल एक्ट का है उल्लंघन
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की आयु में गियर वाली गाड़ी चलाने का लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। 16 से 18 वर्ष की आयु में सिर्फ बिना गियर की 50 सीसी तक की क्षमता तक की गाड़ी का ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाता है। लेकिन, ज्यादातर अभिभावकों को इसकी परवाह नहीं है। वह बगैर वैध लाइसेंस दिलाए ही बच्चों को गाड़ी थमा रहे हैं। स्कूल जाने वाले काफी संख्या में बच्चे तो16 वर्ष से कम उम्र के हैं, जिन्हें लाइसेंस जारी भी नहीं किया जा सकता।
1200 रुपये है जुर्माना
मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना लाइसेंस के वाहन चलाते पकड़े जाने पर 1,200 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। यह जुर्माना उन पर भी लागू होता है, जिनके पास वैध लाइसेंस नहीं है। यानी, बिना गियर की गाड़ी के लाइसेंस पर गियर वाली गाड़ी चलाने पर भी जुर्माना अदा करना पड़ सकता है।
लाइसेंस नहीं तो बीमा का लाभ भी नहीं
क्या आप जानते हैं कि बिना लाइसेंस के बाइक, स्कूटी या स्कूटर चला रहा आपका बच्चा आपको भारी आर्थिक संकट में डाल सकता है। दुर्भाग्य से यदि दुर्घटना में किसी तीसरे व्यक्ति की मौत हो जाती है तो वाहन का बीमा होने के बाद भी कंपनी इस आधार पर थर्ड पार्टी क्लेम देने से इनकार कर सकती है कि चालक के पास लाइसेंस नहीं था। ऐसे में कोर्ट तय करेगी कि थर्ड पार्टी को कितना क्लेम देना है? यह राशि बीमा कंपनी नहीं, बल्कि आपको चुकानी पड़ेगी।
बहुत हुआ, अब अभियान चलेगा
संभागीय परिवहन अधिकारी ए के पांडेय भी स्वीकार करते हैं कि कम उम्र के बच्चों के हाथ में गाड़ी थमाना चिंताजनक है। इस पर अंकुश लगाने के लिए अब सीधे विद्यालयों से संपर्क किया जाएगा। साथ ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
ट्रिपलिंग से बाज आएं, जान पर पड़ सकती है भारी
झांसी। दो पहिया वाहनों पर ट्रिपलिंग कानून अवैध है। बावजूद इसके लोग धड़ल्ले से ट्रिपलिंग करते हैं। पुरुषों की बात तो छोड़िए, महिलाएं भी इससे पीछे नहीं हैं। माना जाता है कि ट्रिपलिंग की स्थिति में दोपहिया को नियंत्रित करना आसान नहीं होता। इसके बाद भी ट्रिपलिंग कर जान को जोखिम में डालना कहां की बुद्धिमानी है।
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झांसी। आप भूले न हों तो तकरीबन तीन माह पूर्व डीआरएम दफ्तर के निकट बाइक पर सवार दो स्कूली बच्चों को एक तेज रफ्तार ऑटो ने टक्कर मार दी थी। बगैर हेलमेट के दोनों ही बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सौभाग्य से तुरंत मेडिकल सुविधा मिल जाने के कारण दोनों की जान बच गई, लेकिन यह ‘सौभाग्य’ जरूरी नहीं कि ऐसी दुर्घटनाओं में सभी के साथ हो।
बाइक से स्कूल जाने की प्रवृति खतरनाक
आठवीं कक्षा से ही विद्यार्थियों द्वारा बाइक से स्कूल जाने की प्रवृति इन दिनों तेजी से बढ़ी है। नियमत: 16 वर्ष से कम उम्र होने के कारण इन बच्चों को बाइक नहीं चलानी चाहिए, लेकिन न तो अभिभावक और न ही स्कूल प्रशासन उन्हें इससे रोकता है। यही वजह है कि स्कूलों में बने साइकिल स्टैंड अब मोटरसाइकिल स्टैंड में तब्दील होते जा रहे हैं। सड़कों पर भी मोटरसाइकिल सवार किशोर फर्राटे भरते नजर आते हैं, जबकि इनके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही उन्हें यातायात नियमों की जानकारी ही होती है। यह उत्साही ड्राइवर खुद की जान तो जोखिम में डालते ही हैं, साथ ही सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। बावजूद, इस खतरनाक स्थिति पर लगाम लगाने की फुर्सत किसी को नहीं है।
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... आपका बच्चा है, उसकी चिंता तो करें
बच्चों में बढ़ रही बाइक चलाने की प्रवृति में अभिभावक ही उत्प्रेरक बन बैठे हैं। बच्चों की थोड़ी जिद और ऑटो पर आने वाले खर्च में कटौती को देखते हुए वह 14- 15 साल के अपने पुत्र या पुत्री को स्कूटी, स्कूटर और बाइक खरीद कर देने में वह कोई संकोच नहीं कर रहे हैं। उन्हें यह भी देखने की फुर्सत नहीं कि उनके बच्चे बाइक या स्कूटी की सवारी सुरक्षित तरीके से कर भी रहे हैं या नहीं? उन्होंने हेलमेट भी लगाया है या नहीं?
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मोटर व्हीकल एक्ट का है उल्लंघन
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की आयु में गियर वाली गाड़ी चलाने का लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। 16 से 18 वर्ष की आयु में सिर्फ बिना गियर की 50 सीसी तक की क्षमता तक की गाड़ी का ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाता है। लेकिन, ज्यादातर अभिभावकों को इसकी परवाह नहीं है। वह बगैर वैध लाइसेंस दिलाए ही बच्चों को गाड़ी थमा रहे हैं। स्कूल जाने वाले काफी संख्या में बच्चे तो16 वर्ष से कम उम्र के हैं, जिन्हें लाइसेंस जारी भी नहीं किया जा सकता।
1200 रुपये है जुर्माना
मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना लाइसेंस के वाहन चलाते पकड़े जाने पर 1,200 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। यह जुर्माना उन पर भी लागू होता है, जिनके पास वैध लाइसेंस नहीं है। यानी, बिना गियर की गाड़ी के लाइसेंस पर गियर वाली गाड़ी चलाने पर भी जुर्माना अदा करना पड़ सकता है।
लाइसेंस नहीं तो बीमा का लाभ भी नहीं
क्या आप जानते हैं कि बिना लाइसेंस के बाइक, स्कूटी या स्कूटर चला रहा आपका बच्चा आपको भारी आर्थिक संकट में डाल सकता है। दुर्भाग्य से यदि दुर्घटना में किसी तीसरे व्यक्ति की मौत हो जाती है तो वाहन का बीमा होने के बाद भी कंपनी इस आधार पर थर्ड पार्टी क्लेम देने से इनकार कर सकती है कि चालक के पास लाइसेंस नहीं था। ऐसे में कोर्ट तय करेगी कि थर्ड पार्टी को कितना क्लेम देना है? यह राशि बीमा कंपनी नहीं, बल्कि आपको चुकानी पड़ेगी।
बहुत हुआ, अब अभियान चलेगा
संभागीय परिवहन अधिकारी ए के पांडेय भी स्वीकार करते हैं कि कम उम्र के बच्चों के हाथ में गाड़ी थमाना चिंताजनक है। इस पर अंकुश लगाने के लिए अब सीधे विद्यालयों से संपर्क किया जाएगा। साथ ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
ट्रिपलिंग से बाज आएं, जान पर पड़ सकती है भारी
झांसी। दो पहिया वाहनों पर ट्रिपलिंग कानून अवैध है। बावजूद इसके लोग धड़ल्ले से ट्रिपलिंग करते हैं। पुरुषों की बात तो छोड़िए, महिलाएं भी इससे पीछे नहीं हैं। माना जाता है कि ट्रिपलिंग की स्थिति में दोपहिया को नियंत्रित करना आसान नहीं होता। इसके बाद भी ट्रिपलिंग कर जान को जोखिम में डालना कहां की बुद्धिमानी है।