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गेहूं खरीद में छतीसगढ़ माडल अगले साल-Dehat
Updated Sun, 18 Jun 2017 07:31 PM IST
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अगले साल साल से छत्तीसगढ़ की तर्ज पर गेहूं खरीद
सब हेड : हर किसान का होगा पंजीकरण, बुआई के पहले सर्वे
- बिचौलिए गेहूं बेचकर मुनाफा नहीं कमा सकेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए अगले साल से प्रदेश में छत्तीसगढ़ की तर्ज पर गेहूं खरीद की जाएगी। इसमें सभी किसानों का पंजीयन कराया जाएगा और बुआई के पहले खेत का सर्वे किया जाएगा। इससे किसान बही की आड़ में मनमाना गेहूं बेच पाना संभव नहीं होगी। छत्तीसगढ़ की तरह उत्तर प्रदेश शासन भी गेहूं खरीद नीति बनाने पर मंथन कर रहा है।
बुंदेलखंड में अबकी बार गेहूं की रिकार्ड 3,08,994 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। यह गेहूं बुंदेलखंड में ही पैदा हुआ है अथवा बगल में लगे मध्य प्रदेश के गांवों से आया है, इस पर विचार मंथन आने वाले समय में होगा। लेकिन, गेहूं खरीद को और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने इस पर मंथन शुरू कर दिया है। गेहूं खरीद का जो ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, यदि उस पर अमल हुआ तो छत्तीसगढ़ की तर्ज पर यहां भी गेहूं की खरीद होगी।
छत्तीसगढ़ में गेहूं खरीद के लिए जो व्यवस्था लागू है, उसके अनुसार सभी किसानों को पंजीकरण कराना अनिवार्य हो जाएगा। यानी, पंजीकरण में किसान के पास कितनी खेती है, उसके परिवार में कितने सदस्य है, बैंक खाता नंबर, कितनी जमीन है और वह कौन से फसल पैदा कर रहा है। इसका ब्योरा दर्ज होगा। किसान से गेहूं अथवा अन्य किसी फसल की खरीद ऑनलाइन होगी। इसमें किसान की फसल के उत्पादन का पूरा ब्योरा रहेगा। इतना ही नहीं, किसान जब खेत में फसल बोएगा तो इसकी जानकारी कृषि विभाग के पास रहेगी कि कितने क्षेत्रफल में किसान ने किस फसल की बुआई की है।
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अभी गन्ना किसानों से गन्ना की खरीद इसी तर्ज पर हो रही है। छत्तीसगढ़ में इसी तर्ज पर गेहूं और धान की खरीद होती है।
बिचौलियों का दखल समाप्त होगा
गेहूं खरीद के दौरान बिचौलिया सक्रिय हो जाते हैं। वह आटा मिलों को मुनाफा पहुंचाने के लिए किसानों से औने-पौने दामों पर गेहूं खरीद लेते हैं और बाद में मुनाफा कमाकर बेच देते हैं। अगले साल यदि गेहूं की नई खरीद नीति को मंजूरी मिल गई तो बिचौलियों का दखल समाप्त हो जाएगा, क्योंकि तब केवल वही किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेच सकेगा।
अभी इंतजार कीजिए
संभावना जताई जा रही है कि अगले साल से छत्तीसगढ़ मॉडल पर गेहूं की खरीद होगी। अभी तो इंतजार किया जा रहा है, लेकिन संभावना है कि यह नीति लागू हो जाएगी।
- हरनाम सिंह
संभागीय खाद्य नियंत्रक
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अगले साल साल से छत्तीसगढ़ की तर्ज पर गेहूं खरीद
सब हेड : हर किसान का होगा पंजीकरण, बुआई के पहले सर्वे
- बिचौलिए गेहूं बेचकर मुनाफा नहीं कमा सकेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए अगले साल से प्रदेश में छत्तीसगढ़ की तर्ज पर गेहूं खरीद की जाएगी। इसमें सभी किसानों का पंजीयन कराया जाएगा और बुआई के पहले खेत का सर्वे किया जाएगा। इससे किसान बही की आड़ में मनमाना गेहूं बेच पाना संभव नहीं होगी। छत्तीसगढ़ की तरह उत्तर प्रदेश शासन भी गेहूं खरीद नीति बनाने पर मंथन कर रहा है।
बुंदेलखंड में अबकी बार गेहूं की रिकार्ड 3,08,994 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। यह गेहूं बुंदेलखंड में ही पैदा हुआ है अथवा बगल में लगे मध्य प्रदेश के गांवों से आया है, इस पर विचार मंथन आने वाले समय में होगा। लेकिन, गेहूं खरीद को और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने इस पर मंथन शुरू कर दिया है। गेहूं खरीद का जो ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, यदि उस पर अमल हुआ तो छत्तीसगढ़ की तर्ज पर यहां भी गेहूं की खरीद होगी।
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छत्तीसगढ़ में गेहूं खरीद के लिए जो व्यवस्था लागू है, उसके अनुसार सभी किसानों को पंजीकरण कराना अनिवार्य हो जाएगा। यानी, पंजीकरण में किसान के पास कितनी खेती है, उसके परिवार में कितने सदस्य है, बैंक खाता नंबर, कितनी जमीन है और वह कौन से फसल पैदा कर रहा है। इसका ब्योरा दर्ज होगा। किसान से गेहूं अथवा अन्य किसी फसल की खरीद ऑनलाइन होगी। इसमें किसान की फसल के उत्पादन का पूरा ब्योरा रहेगा। इतना ही नहीं, किसान जब खेत में फसल बोएगा तो इसकी जानकारी कृषि विभाग के पास रहेगी कि कितने क्षेत्रफल में किसान ने किस फसल की बुआई की है।
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अभी गन्ना किसानों से गन्ना की खरीद इसी तर्ज पर हो रही है। छत्तीसगढ़ में इसी तर्ज पर गेहूं और धान की खरीद होती है।
बिचौलियों का दखल समाप्त होगा
गेहूं खरीद के दौरान बिचौलिया सक्रिय हो जाते हैं। वह आटा मिलों को मुनाफा पहुंचाने के लिए किसानों से औने-पौने दामों पर गेहूं खरीद लेते हैं और बाद में मुनाफा कमाकर बेच देते हैं। अगले साल यदि गेहूं की नई खरीद नीति को मंजूरी मिल गई तो बिचौलियों का दखल समाप्त हो जाएगा, क्योंकि तब केवल वही किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेच सकेगा।
अभी इंतजार कीजिए
संभावना जताई जा रही है कि अगले साल से छत्तीसगढ़ मॉडल पर गेहूं की खरीद होगी। अभी तो इंतजार किया जा रहा है, लेकिन संभावना है कि यह नीति लागू हो जाएगी।
- हरनाम सिंह
संभागीय खाद्य नियंत्रक