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गांवों में भीड़ जुटाने के लिए शहरी कार्यकर्ताओं का सहारा

Thu, 11 Apr 2019 09:02 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2019 09:02 PM IST
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गांवों में भीड़ जुटाने के लिए शहरी कार्यकर्ताओं का सहारा
गांवों में भीड़ जुटाने के लिए शहरी कार्यकर्ताओं का सहारा
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झांसी। गर्मी उछाल पर है। गांवों में मतदाता फसल की कटाई में लगा हुआ है। इस कारण लोकसभा चुनाव प्रत्याशियों के लिए मुफीद साबित नहीं हो पा रहा है। गिने चुने पहचाने चेहरों के भरोसे ही उन्हें पूरे संसदीय क्षेत्र की खाक छाननी पड़ रही है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की है जहां स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ- साथ मतदाताओं में उत्साह नजर नहीं आ रहा है।

लोकसभा चुनाव की तारीखें प्रत्याशियों पर भारी पड़ रही हैं। अधिकतर प्रत्याशी अभी ग्रामीण इलाकों का रुख किए हुए हैं। वहां उन्हें स्थानीय लोगों की कमी बेहद खल रही है। खाली मकान उनका स्वागत कर रहे हैं। दरअसल, यह समय किसानों की व्यस्तता का है। खेतों में फसल पकी खड़ी है और किसान उसकी रखवाली या कटाई में व्यस्त है। गांव में दूसरा तबका मजदूरों का है। वह भी खाली नहीं है। या तो वह बड़े किसानों के खेतों में काम कर रहा है या मजदूरी करने में लगा है। इस समस्या का सामना एक नहीं बल्कि सभी प्रत्याशी कर रहे हैं। गांवों में जनसंपर्क के दौरान ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने के लिए शहर से पार्टी के कार्यकर्ता गांव ले जाने पड़ रहे हैं। ऐसा नहीं कि गांवों में कार्यकर्ताओं का बिल्कुल टोटा पड़ गया है। प्रधान के साथ जो लोग मिल रहे हैं उनकी संख्या इतनी कम है जिसका अनुमान प्रत्याशियों ने पहले नहीं लगाया था।
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हालांकि, प्रत्याशी गांवों में भारी जन समर्थन मिलने की बात कह रहे हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं की कमी का दर्द रह- रहकर उनके चेहरे पर झलक आता है। महानगर और कस्बा क्षेत्र में भी ऐसा ही हाल है। यहां कार्यकर्ताओं की कमी का कारण वार्ड स्तर पर कमेटियों का गठन न होना बताया जा रहा है। नगरीय इलाकों का अधिकतर कार्यकर्ता नौकरीपेशा या दूसरे कामों में व्यस्त है और उसके पास इतना समय नहीं है कि वह जनसंपर्क में लग सके। यह स्थिति बदलने की संभावना इसलिए भी नहीं क्योंकि नवरात्र के बाद शादियों का मौसम शुरू हो जाएगा और फिर लोगों को अपने गांव या शहर से बाहर रहना पड़ सकता है।
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‘जनसंपर्क के दौरान गांवों में चुनाव को लेकर बेहद उत्साह है। जिस गांव में जाते हैं, वहां पहले से सूचना भेजकर लोगों को खेतों से एकत्रित कर लिया जाता है, ताकि कोई मतदाता मिलने से छूट न जाए।’
जमुना कुशवाहा, जिलाध्यक्ष भाजपा।

‘कटाई भी जरूरी है। मगर, जहां भी प्रत्याशी और हम अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता जनसंपर्क के लिए जाते हैं तो खेतों में लोगों से मिलना शुरू कर देते हैं। कोई कठिनाई नहीं आती।’

छत्रपाल सिंह यादव, सपा।

‘सुबह- शाम किसान गांव में मिल जाते हैं। इसलिए दिन में कस्बों में जनसंपर्क होता है और सुबह- शाम गांवों में जा रहे हैं, ताकि हर व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश सफल रहे।’
चंद्रशेखर तिवारी, कांग्रेस।
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