फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   29 babu working for ten years without passing the exam

बड़ा गड़बड़झाला उजागर: PWD में 10 साल से बिना इम्तहान पास किए नौकरी कर रहे 29 बाबू

Wed, 27 Jul 2022 12:51 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Wed, 27 Jul 2022 12:51 AM IST
सार

कई साल तक यह मामला फाइलों में दबा रहा। पिछले महीने सिंचाई विभाग में इसी तरह की गड़बड़ी उजागर होने पर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता बीएल सिंह ने ऐसे सभी मृतक आश्रितों की पत्रावली तलब कर ली। जांच पड़ताल में पूरे सर्किल के अंदर कुल 29 बाबू पाए गए थे, जिन्होंने लंबी नौकरी के बाद भी टाइप टेस्ट पास नहीं किया।

विज्ञापन
29 babu working for ten years without passing the exam
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

लोक निर्माण विभाग में बड़ा गड़बड़झाला उजागर हुआ है। अनुकंपा आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मचारी बिना टाइप टेस्ट पास किए पिछले दस साल से नौकरी कर रहे हैं। जांच-पड़ताल में 29 बाबू ऐसे पाए गए। नियमों के मुताबिक नौकरी आरंभ करने के दो साल के अंदर उनको यह परीक्षा पास करना जरूरी है। मामला उजागर होने सेे महकमे में हड़कंप है।

विज्ञापन


मृतक आश्रित कोटे के अंतर्गत आश्रितों को नौकरी पर रखे जाने का प्रावधान है। आश्रितों की भर्ती सीधे लिपिक पद पर की जाती है। इस कोटे से नौकरी मिलने के दो साल के अंदर टाइप सीखना अनिवार्य होता है। इसके लिए प्रत्येक वर्ष टाइप टेस्ट कराने का नियम है। पहली बार परीक्षा में असफल होने पर ऐसे कर्मचारियों को दूसरा मौका दिया जाता है हालांकि इनकी वेतन वृद्धि रोक दी जाती है। दो साल बाद अगर टाइप टेस्ट पास नहीं कर पाते तब इनको नौकरी से हटा देने तक का प्रावधान है लेकिन, सांठगांठ के चलते इस कोटे में भर्ती कई कर्मचारियों का टाइप टेस्ट तक ही नहीं हुआ।
विज्ञापन


कई साल तक यह मामला फाइलों में दबा रहा। पिछले महीने सिंचाई विभाग में इसी तरह की गड़बड़ी उजागर होने पर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता बीएल सिंह ने ऐसे सभी मृतक आश्रितों की पत्रावली तलब कर ली। जांच पड़ताल में पूरे सर्किल के अंदर कुल 29 बाबू पाए गए थे, जिन्होंने लंबी नौकरी के बाद भी टाइप टेस्ट पास नहीं किया। हैरानी की बात यह कि टाइप न आने के बावजूद भी पिछले दस साल से यह लिपिक बाबूगिरी कर रहे हैं। वहीं, समय पर परीक्षा न कराने पर संबंधित खंड के एक्सईएन पर भी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसमें पेंच यह भी फंसा हुआ है कि टाइप टेस्ट फेल होने वाले कर्मचारियों से पिछले दस साल के वेतन की रिकवरी कैसे की जा सकेगी। वहीं, अधीक्षण अभियंता आरएन गुप्ता का कहना है कि सभी खंडों को अपने स्तर पर टाइप टेस्ट कराने को कहा गया है। यह टेस्ट कराकर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed