राजस्थान और गुजरात की तरह ही झांसी में भी हालात खतरनाक, 260 शिशु तोड़ चुके हैं दम
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राजस्थान और गुजरात ही नहीं, झांसी में भी बच्चों की सेहत के हालात ठीक नहीं हैं। शिशुओं के मौत के आंकड़ों को देखें तो दिसंबर में ही अस्पताल में इलाज के दौरान 28 शिशु दम तोड़ चुके हैं। वहीं, अप्रैल से दिसंबर तक 260 शिशुओं की मृत्यु हो चुकी है। इन शिशुओं की उम्र एक दिन से लेकर एक महीने तक थी।
मौजूदा समय में बच्चों के इलाज का मामला चर्चा में है। राजस्थान, गुजरात में बच्चों की मौतों ने सरकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अमर उजाला ने झांसी में शिशुओं के मौतों की स्थिति का पता लगाया तो खतरनाक स्थिति सामने आई। अप्रैल से दिसंबर तक जनपद में अस्पताल में इलाज के दौरान 260 शिशुओं की मौत हो चुकी है। इनमें 40 बच्चे सेप्सिस, 20 एसफिक्सिया और 200 अन्य कारणों से मौत के गाल में समा चुके हैं। इनमें नौ तो एक से 23 घंटे के भीतर मरे हैं। यह आंकड़े हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) से सामने आए हैं।
क्या है एसफिक्सिया
एसफिक्सिया में बच्चे की सांस रुक जाती है। इस बीमारी में बच्चा जन्म के तुरंत बाद अच्छे से रोता नहीं है। ऑक्सीजन की कमी से 24 घंटे में बच्चे सांस थम जाती है।
ये है सेप्सिस बीमारी
सेप्सिस एक गंभीर बीमारी है। इसमें प्रतिरोधक कमजोर होने से शरीर में संक्रमण फैलने लगता है। प्रॉब्लम बढ़ने पर व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। एब्डॉमिनल इंफेक्शन, किडनी इंफेक्शन या ब्लड स्ट्रीम इंफेक्शन के कारण सेप्सिस की समस्या होती है।
सेप्सिस के संकेत
- प्लेटलेट्स कम हो जाना
- यूरिन में कमी आना
- लगातार कमजोरी रहना
- शरीर तापमान गिरने से ठंड लगना
- सांस लेने में समस्या होना
तथ्य और आंकड़े
नवजात शिशुओं में होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण उनमें होने वाला संक्रमण है। आंकड़े बताते हैं कि 33 प्रतिशत नवजात में उनकी मृत्यु का कारण विभिन्न संक्रमण जैसे ठंड लगने से होने वाला निमोनिया एसेप्टिसीमिया तथा नाल में होने वाला संक्रमण है। इसके अलावा 35 फीसदी नवजात शिशु समय से पूर्व जन्म लेने से पूर्ण रूप से विकसित न हो पाने से मर जाते हैं। 20 प्रतिशत शिशुओं को जन्म के बाद पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे उनका दम घुट जाता है। इस स्थिति को एसफिक्सिया कहते हैं। नवजात शिशुओं की मृत्यु में बड़ा प्रतिशत उन शिशुओं का है, जो कम वजन के हो हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 2.5 किलो से कम वजन वाले शिशुओं को अन्य नवजातों की तुलना में अधिक देखभाल की जरूरत होती है।
मौतों की जानकारी नहीं
एचएमआईएस की रिपोर्ट एडी हेल्थ के पास जाती है। मुझे बच्चों की मौतों की अभी जानकारी नहीं है। विभाग में जानकारी करने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा। - डॉ. जीके निगम, सीएमओ।