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कृषि मंत्रालय ने बुंदेलखंड को दिए दो सीड हब -City
Updated Tue, 11 Sep 2018 02:17 AM IST
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कृषि मंत्रालय ने बुंदेलखंड को दिए दो ‘सीड हब’
तीन करोड़ रुपये की धनराशि की स्वीकृत
- रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय करेगा संचालित
- दलहन और मोटे अनाज के उन्नत बीज होंगे तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में कृषि की दशा संवारने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने यहां के लिए दो ‘सीड हब’ मंजूर किए हैं, जिनमें दलहन और मोटे अनाज के उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे। दोनों के लिए डेढ़ - डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। सीड हब के संचालन की जिम्मेदारी रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को सौंपी गई है।
बुंदेलखंड का कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए यहां केंद्रीय कृषि मंत्रालय दो सीड हब बनाने जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। एक सीड हब दलहन के बीज चना, मसूर, मटर की उन्नत किस्म तैयार करेगा। जबकि, दूसरे सीड हब में मोटे अनाज ज्वार, बाजरा के बीजों की उन्नत किस्म तैयार की जाएगी।
कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार ने बताया कि बुंदेलखंड का सीड रिप्लेसमेंट रेट (बीज बदलने का क्रम) 10 फीसदी से भी कम है। किसान पारंपरिक बीजों के सहारे ही खेती कर रहे हैं। इससे उत्पादन नहीं बढ़ पा रहा है। स्थिति यह है कि देश में उत्तर प्रदेश का कृषि उत्पादन सबसे कम है और प्रदेश में बुंदेलखंड क्षेत्र में उत्पादन सबसे न्यूनतम है। इसे सुधारने के लिए उक्त दो सीड हब बनाए जा रहे हैं। दलहन और मोटे अनाज की खेती के लिए यहां की जल, वायु और मिट्टी एकदम उपयुक्त है।
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सीड हब के तहत किसानों के ग्रुप बनाए जाएंगे। उन्हें उन्नत बीज देंगे और तकनीकी जानकारी दी जाएगी। फिर किसानों से उत्पादित बीज लेकर उनकी विश्वविद्यालय में प्रोसेसिंग की जाएगी। फिर ये बीज दूसरे किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा किसान विश्वविद्यालय से सीधे उन्नत किस्म के बीच हासिल कर सकेंगे। उन्नत बीजों से उत्पादन में डेढ़ गुना तक की बढ़ोत्तरी आसानी से की जा सकेगी।
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तीन करोड़ रुपये की धनराशि की स्वीकृत
- रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय करेगा संचालित
- दलहन और मोटे अनाज के उन्नत बीज होंगे तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में कृषि की दशा संवारने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने यहां के लिए दो ‘सीड हब’ मंजूर किए हैं, जिनमें दलहन और मोटे अनाज के उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे। दोनों के लिए डेढ़ - डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। सीड हब के संचालन की जिम्मेदारी रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को सौंपी गई है।
बुंदेलखंड का कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए यहां केंद्रीय कृषि मंत्रालय दो सीड हब बनाने जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। एक सीड हब दलहन के बीज चना, मसूर, मटर की उन्नत किस्म तैयार करेगा। जबकि, दूसरे सीड हब में मोटे अनाज ज्वार, बाजरा के बीजों की उन्नत किस्म तैयार की जाएगी।
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कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार ने बताया कि बुंदेलखंड का सीड रिप्लेसमेंट रेट (बीज बदलने का क्रम) 10 फीसदी से भी कम है। किसान पारंपरिक बीजों के सहारे ही खेती कर रहे हैं। इससे उत्पादन नहीं बढ़ पा रहा है। स्थिति यह है कि देश में उत्तर प्रदेश का कृषि उत्पादन सबसे कम है और प्रदेश में बुंदेलखंड क्षेत्र में उत्पादन सबसे न्यूनतम है। इसे सुधारने के लिए उक्त दो सीड हब बनाए जा रहे हैं। दलहन और मोटे अनाज की खेती के लिए यहां की जल, वायु और मिट्टी एकदम उपयुक्त है।
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सीड हब के तहत किसानों के ग्रुप बनाए जाएंगे। उन्हें उन्नत बीज देंगे और तकनीकी जानकारी दी जाएगी। फिर किसानों से उत्पादित बीज लेकर उनकी विश्वविद्यालय में प्रोसेसिंग की जाएगी। फिर ये बीज दूसरे किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा किसान विश्वविद्यालय से सीधे उन्नत किस्म के बीच हासिल कर सकेंगे। उन्नत बीजों से उत्पादन में डेढ़ गुना तक की बढ़ोत्तरी आसानी से की जा सकेगी।