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तत्काल टिकटों की बुकिंग में निगरानी-Lalitpur

Mon, 20 May 2019 01:35 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 20 May 2019 01:35 AM IST
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तत्काल टिकटों की बुकिंग में निगरानी-Lalitpur
तत्काल टिकटों की बुकिंग पर नजर
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झांसी। गर्र्मी आते ही जहां ट्रेनों में टिकटों के लिए मारामारी हो जाती है। इसकी वजह से तत्काल टिकट पाने के लिए एकाएक भीड़ नजर आने लगी है। कई एजेंट भी इसका फायदा उठाने से नहीं चूक रहे हैं। इसी को देखते हुए रेलवे ने तत्काल टिकटों की बुकिंग में निगरानी बढ़ा दी है। आईआरसीटीसी के विशेष साफ्टवेयर से नजर रखी जा रही है।
गर्मी का सीजन होने से किसी भी ट्रेन में सीट उपलब्ध नहीं है। अधिकांश ट्रेनों में भी नो - रूम की स्थिति बनी हुई है जिनमें रिजर्वेशन मिल रहा है, उनमें 150 से 200 वेटिंग अधिक है। घूमने की चाह रखने वाले लोग परेशान हैं। इस बीच एजेंट सक्रिय होकर इसका फायदा उठाने से नहीं चूक रहे। रिजर्वेशन करने वाले कुछ एजेंट आईआरसीटीसी के सॉफ्टवेयर में सेंध लगाकर टिकट बना रहे हैं। ऐसे एजेंट सेंधमारी करने के लिए एक स्पेशल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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सूत्रों से पता चला है कि एक सॉफ्टवेयर एक महीने में निष्क्रिय हो जाता है, इसके बाद पुन : सॉफ्टवेयर को खरीदना पड़ता है। टिकट बुक करने वाले कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं। जो ऑनलाइन आईआरसीटीसी के साफ्टवेयर को पहले हैक करता है, इसके बाद वह आईआरसीटीसी के साफ्टवेयर को खुद संचालित करके टिकट बनाने लगता है। कुछ समय में ही यह सॉफ्टवेयर एजेंट के लिए टिकट बना देता है। सीबीआई ने पिछले दिनों तत्काल के रिजर्वेशन में सॉफ्टवेयर से हो रहे खेल का खुलासा भी हो चुका है जिसमेें पता चला था कि एजेंट स्पेशल सॉफ्टवेयर के जरिये पहले ही टिकट बुक कर लेते थे। सॉफ्टवेयर से पीएनआर जनरेट करने की प्रक्रिया तेज हो जाती थी। इसी का फायदा उठाकर एजेंट आईडी से लॉगइन कर एक साथ कई टिकट बुक कर लेते। इसी को देखते हुए रेलवे आईआरसीटीसी के विशेष सॉफ्टवेयर से निगरानी बढ़ानी शुरू कर दी है।
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आईपी एड्रेस की करते हैं जांच
रेल अफसरों के मुताबिक इसको लेकर रेलवे प्रशासन अलर्ट है। अगर किसी निजी अकाउंट से एक बार में तीन से ज्यादा तत्काल टिकट बुक होते हैं या लगातार उस अकाउंट से टिकट बुक हो रहे हैं तो आईपी एड्रेस के जरिए जांच की जाती है। साथ ही निजी अकाउंट से मिलने वाले टिकट पर लिखा होता है कि यह टिकट बिक्री के लिए नहीं है। ऐसे टिकट पर यात्रा करने वाला अगर वैध कागजात नहीं दिखा पाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

एजेंट के लिए जरूरी है प्रमाणपत्र
रेलवे से मान्यता प्राप्त एजेंट अपने नीचे सब एजेंट बना सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी एजेंट की भी समय - समय पर जांच की जाती है। एजेंट के लिए उनके कार्यालय पर बोर्ड लगाना और खिड़की के सामने ही ऐसे स्थान पर सर्टिफिकेट लगाना जरूरी किया गया है जहां से वह आम आदमी को दिखाई दे। अगर किसी एजेंट के पास ये दोनों चीजें नहीं हैं तो उससे टिकट बुक न कराएं और अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन पर सूचना दें।

तत्काल का समय
एसी के लिए तत्काल बुकिंग सुबह 10 बजे और स्लीपर के लिए सुबह 11 बजे का समय फिस्क है। इसके पहले टिकट नहीं होता। चंद सेकेंड से ही टिकटों की बिक्री हो जाती है।

तुरंत मिला कंफर्म टिकट
सीपरी बाजार इलाके में रहने वाले शाकिर खान बताया कि वे अपने परिवार के साथ मुंबई जाना चाहते हैं। गर्मी में सभी ट्रेनें फुल होने के कारण क्लीयर टिकट नहीं मिला पा रहा है। दो दिन से स्टेशन पर भीड़ होने के कारण यहां टिकट नहीं बन सका। शुक्रवार को उन्होंने एजेंट से बात की और आखिरकार उनको कंफर्म टिकट मिल गया, इसके लिए उनको मुंहमांगी रकम भी खर्च करना पड़ी।


रेलवे का सतर्कता के साथ वाणिज्य विभाग और आरपीएफ ऐसे एजेंटों पर विशेष निगरानी कर रहा है। इसके लिए आरपीएफ भी लगातार कार्रवाई करती है। पिछले दो महीनों में अभियान चलाकर कई पकड़े भी गए। इसके साथ ही रेलवे स्तर पर अधिकारियों की टीम निगाह रख रही है, जल्द ही ऐसे स्थानों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी
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