फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   गलियों से गांव तक फैला है कच्ची शराब का ‘पक्का’ कारोबार

गलियों से गांव तक फैला है कच्ची शराब का ‘पक्का’ कारोबार

Sat, 09 Feb 2019 02:22 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 09 Feb 2019 02:22 AM IST
विज्ञापन
गलियों से गांव तक फैला है कच्ची शराब का ‘पक्का’ कारोबार
गलियों से गांव तक फैला है कच्ची शराब का ‘पक्का’ कारोबार
विज्ञापन

झांसी। कच्ची शराब का धंधा जिले में खूब फलफूल रहा है। शहर की गलियों से लेकर गांवों तक में इसका जाल फैला हुआ है। इसके निर्माण में खतरनाक पदार्थ मिलाए जाते हैं, जिनकी मात्रा ज्यादा होने पर ये कभी भी जान पर भारी पड़ सकती है। इसी तरह के मामले में शुक्रवार को जहरीली शराब के सेवन से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 35 लोगों की मौत हो गई, जबकि छह दर्जन लोगों को इलाज जारी है। इस तरह की घटना जिले में भी कभी भी घट सकती है। बावजूद, हर स्तर पर इसकी अनदेखी की जा रही है।
जिले के ग्रामीण इलाकों में कच्ची शराब की बिक्री गांव से बाहर की जाती है, लेकिन शहर में स्थिति उलट है। यहां शहर की पॉश मानी जाने वाली बस्तियों में भी इसे बेचा जाता है। इसका अंदाजा ग्वालियर रोड से सटी अयोध्या पुरी कालोनी को देखकर लगाया जा सकता है। यहां आबादी के बीचों बीच सड़क किनारे खुलेआम ये धंधा संचालित हो रहा है। दिन भर पियक्कड़ों का जमघट लगा रहता है, जो जान की परवाह किए बगैर नशे की लत को पूरा करने के लिए घूंट दर घूंट गले से नीचे उतारते रहते हैं। कमोबेश यही स्थिति शिवाजी नगर, मंडी के पास, नई बस्ती, नारायण बाग के पास, मसीहागंज, अलीगोल, गुलाम गौस खां पार्क के पास में भी बनी रहती है। लोग परेशान हैं और आए दिन शिकायतें करते रहते हैं। कुछ वर्ष पूर्व तालपुरा में तीन लोगों की जान भी जा चुकी है। बावजूद जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं।
विज्ञापन

उल्लेखनीय है कि जिले में 16 स्थानों पर बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का निर्माण किया जाता है। इसमें ग्वालियर रोड से सटा गांव परवई सबसे आगे हैं। जबकि, दो सौ से अधिक स्थानों पर इनकी बिक्री की जाती है। ज्यादातर डेरों पर कच्ची शराब का निर्माण कबूतरा जाति के पुरुषों द्वारा किया जाता है, जबकि बेचने की जिम्मेदारी महिलाओं पर होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मौत के करीब ले जाता है हर घूंट
कच्ची शराब को अधिक नशीली बनाने के चक्कर में ये जहरीली हो जाती है। सामान्यत: इसे बनाने में गुड़, शीरा से लहन तैयार किया जाता है। लहन को मिट्टी में गाड़ दिया जाता है। इसमें यूरिया और बेसरमबेल की पत्तियां डाली जाती हैं। अधिक नशीली बनाने के लिए इसमें ऑक्सीटोसिन तक मिला दिया जाता है, जो मौत का कारण बनता है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. जकी सिद्दीकी ने बताया कि कच्ची शराब में यूरिया और ऑक्सिटोसिन जैसे कैमिकल मिलाने की वजह से मिथाइल एल्कोहल बन जाता है। मिथाइल शरीर में जाते ही केमिकल रिएक्शन तेज होता है। इससे शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं। इसकी वजह से कई बार तुरंत मौत हो जाती है, जबकि कुछ लोगों में यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है। यानी कि शराब का हर घूंट उन्हें मौत के करीब ले जाता है।
औपचारिक होती है कार्रवाई
कच्ची शराब कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री करने वालों के खिलाफ आए दिन कार्रवाई होती है। आबकारी विभाग के अभिलेख इससे रंगे मिलेंगे। उन्हें पकड़ा जाता है और वे छूट जाते हैं। इसके अगले ही दिन वे दुबारा अपने काम पर वापस लौट जाते हैं। इसकी वजह उन पर होने वाली कार्रवाई का औपचारिक होना है। दरअसल, कच्ची शराब समेत पकड़े जाने वाले ज्यादातर लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत कार्रवाई होती है, जिसमें थाने से मुचलका भरकर छूटने का प्रावधान है। जबकि, शराब में खतरनाक अपमिश्रण पाए जाने पर आईपीसी की धारा 272 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। इस धारा के तहत मिलावट को संज्ञेय व अजमानतीय अपराधों में रखा गया है। इसका विचारण सत्र न्यायालय में ही किया जा सकता है। लेकिन, यह धारा शराब के अवैध कारोबारियों पर नहीं लगाई जाती।

अब जागे
उप्र और उत्तराखंड में कच्ची शराब से हुई मौतों के बाद जागे आबकारी विभाग ने शुक्रवार को कई स्थानों पर दबिश देकर कारोबार बंद कराया। लेकिन, ये कितने दिन बंद रहेगा, इसे लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता। जिला आबकारी अधिकारी गंगाराम ने बताया कि शराब के अड्डों पर ताबड़तोड़ दबिशें दी जा रही हैं। दुबारा कारोबार शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed