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लक्ष्मी तालाब : पाथवे नहीं बना तो बह जाएगी मिट्टी
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लक्ष्मी तालाब : पाथवे नहीं बना तो बह जाएगी मिट्टी
झांसी। लक्ष्मी तालाब में एक छोटे से टुकड़े को छोड़कर बाकी जगह मिट्टी निकालने का पूरा हो गया है। पाथवे बनाने के लिए चारों तरफ मिट्टी भी डाल दी गई है। मगर अभी पाथवे बनाने का काम बाकी रह गया है। बरसात के पहले अगर यह काम पूरा नहीं हुआ तो मिट्टी दोबारा तालाब में बह जाएगी। हालांकि, जल निगम दस जून तक काम पूरा होने का दावा कर रहा है।
जलनिगम ने अभी 15 मई तक काम पूरा करने का लक्ष्य बनाया था। मगर अभी सफाई का काम ही 95 फीसदी पूरा हो सका है। अभी तालाब के चारों तरफ छह मीटर की सतह बनाने के बाद उस पर पाथवे बनाने और कई किनारों पर मिट्टी हटाने का काम बाकी है। काम को देखकर लगता है कि एक महीने से अधिक का वक्त लग सकता है, लेकिन अधिकारी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वह दस जून तक काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं। अगर यह काम जून में पूरा नहीं हो सका तो बारिश शुरू हो जाएगी। ऐसे में पाथवे के लिए डाली गई पानी में बह जाएगी और स्थिति जहां की तहां हो जाएगी। इसलिए जलनिगम के लिए वक्त पर काम पूरा कराना चुनौती बना हुआ है।
मालूम हो कि लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम अप्रैल 2018 में शुरू किया गया था। तीन महीने में दस फीसदी सफाई का काम काम पूरा हुआ, लेकिन बारिश होने लगी। स्थिति जहां की तहां हो गई और पैसा भी बेकार चला गया। अक्तूबर 2018 से दोबारा लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम शुरू किया गया। जिओ मिलर कंपनी के साथ पांच ठेकेदार सफाई का काम कर रहे हैं। जल निगम ने पहले फरवरी और बाद में 15 मई तक काम पूरा होने की लक्ष्य बनाया था, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका।
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अधिकांश सफाई का काम पूरा हो चुका है। तालाब के चारों तरफ छह मीटर ऊंचा पाथवे बनाने के लिए मिट्टी का टीला भी बन गया है है। दस जून रोलर चलाकर पाथवे बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। बरसात बाद बाकी तालाब को सुंदर बनाने के काम होंगे। आरके गुप्ता, सहायक अभियंता जल निगम।
यह भी जानिए
नारायण बाग के पास स्थित लक्ष्मी ताल को सुंदर बनाने पर 54 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें साठ फीसदी पैसा (32.50 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार व चालीस फीसदी (21.50 करोड़ रुपये) राज्य सरकार को देना है। योजना 2015 में शुरू हुई थी, जिसमें 25 करोड़ रुपये का बजट अभी तक मिल चुका है। दिल्ली की जिओ मिलर कंपनी को 34 करोड़ रुपये का ठेका जल शोधन वाटर टैंक (एसटीपी) व अन्य निर्माण काम के लिए दिया गया है।
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झांसी। लक्ष्मी तालाब में एक छोटे से टुकड़े को छोड़कर बाकी जगह मिट्टी निकालने का पूरा हो गया है। पाथवे बनाने के लिए चारों तरफ मिट्टी भी डाल दी गई है। मगर अभी पाथवे बनाने का काम बाकी रह गया है। बरसात के पहले अगर यह काम पूरा नहीं हुआ तो मिट्टी दोबारा तालाब में बह जाएगी। हालांकि, जल निगम दस जून तक काम पूरा होने का दावा कर रहा है।
जलनिगम ने अभी 15 मई तक काम पूरा करने का लक्ष्य बनाया था। मगर अभी सफाई का काम ही 95 फीसदी पूरा हो सका है। अभी तालाब के चारों तरफ छह मीटर की सतह बनाने के बाद उस पर पाथवे बनाने और कई किनारों पर मिट्टी हटाने का काम बाकी है। काम को देखकर लगता है कि एक महीने से अधिक का वक्त लग सकता है, लेकिन अधिकारी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वह दस जून तक काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं। अगर यह काम जून में पूरा नहीं हो सका तो बारिश शुरू हो जाएगी। ऐसे में पाथवे के लिए डाली गई पानी में बह जाएगी और स्थिति जहां की तहां हो जाएगी। इसलिए जलनिगम के लिए वक्त पर काम पूरा कराना चुनौती बना हुआ है।
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मालूम हो कि लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम अप्रैल 2018 में शुरू किया गया था। तीन महीने में दस फीसदी सफाई का काम काम पूरा हुआ, लेकिन बारिश होने लगी। स्थिति जहां की तहां हो गई और पैसा भी बेकार चला गया। अक्तूबर 2018 से दोबारा लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम शुरू किया गया। जिओ मिलर कंपनी के साथ पांच ठेकेदार सफाई का काम कर रहे हैं। जल निगम ने पहले फरवरी और बाद में 15 मई तक काम पूरा होने की लक्ष्य बनाया था, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका।
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अधिकांश सफाई का काम पूरा हो चुका है। तालाब के चारों तरफ छह मीटर ऊंचा पाथवे बनाने के लिए मिट्टी का टीला भी बन गया है है। दस जून रोलर चलाकर पाथवे बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। बरसात बाद बाकी तालाब को सुंदर बनाने के काम होंगे। आरके गुप्ता, सहायक अभियंता जल निगम।
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नारायण बाग के पास स्थित लक्ष्मी ताल को सुंदर बनाने पर 54 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें साठ फीसदी पैसा (32.50 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार व चालीस फीसदी (21.50 करोड़ रुपये) राज्य सरकार को देना है। योजना 2015 में शुरू हुई थी, जिसमें 25 करोड़ रुपये का बजट अभी तक मिल चुका है। दिल्ली की जिओ मिलर कंपनी को 34 करोड़ रुपये का ठेका जल शोधन वाटर टैंक (एसटीपी) व अन्य निर्माण काम के लिए दिया गया है।