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निर्वाचन: 35 की सादा और 70 रुपये की स्पेशल थाली
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35 की सादा और 70 रुपये की स्पेशल थाली
झांसी। 35 की सादा और 70 रुपये की स्पेशल थाली, ये किसी होटल के रेट नहीं हैं। बल्कि, ये निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्याशियों के लिए तय की गई खान-पान सामग्री की दर की सूची है। इसमें पानी से लेकर चाय तक की कीमत तय है। प्रत्याशियों की ओर से जितना उपयोग किया जाएगा, उतना खर्च उनके खाते में जोड़ लिया जाएगा। इसकी सघन निगरानी भी होगी।
भारत निर्वाचन आयोग ने इस लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों की खर्च सीमा में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की है। 2014 के चुनाव की तरह इस बार भी प्रत्याशी अधिकतम सत्तर लाख रुपये ही खर्च कर सकेंगे। इसका उन्हें पाई - पाई का ब्योरा रोजाना निर्वाचन आयोग को देना होगा। इसके लिए अलग से रजिस्टर बनाना होगा, साथ ही अलग से बैंक खाता खोलकर उसी में से खर्च के लिए पैसा की निकासी करनी होगी।
इसके अलावा प्रत्याशी खर्च कम दिखाकर निर्वाचन आयोग को गुमराह न कर सकें, इसके लिए हर सामग्री की कीमत तय कर दी है। यानी कि चुनाव कार्यालय पर, जनसभा में या जुलूस या चुनाव से जुड़ी किसी भी गतिविधि के दौरान चाय पिलाने पर प्रति कप पांच रुपये का खर्च प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जाएगा। खाने का पैकेट (छह पूड़ी, एक सूखी सब्जी और अचार) की कीमत 35 रुपये और स्पेशल पैकेट (छोला, सूखी सब्जी, चावल, सलाद, अचार एवं मीठा पीस) के दाम 70 रुपये निर्धारित किए गए हैं। पानी की 500 एमएल की बोतल के 10 रुपये और एक लीटर की बोतल के 20 रुपये प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जोड़े जाएंगे। समोसा पांच रुपये, ब्रांडेड बिस्किट के छोटे पैकेट का खर्च पांच और बड़े पैकेट का 10 रुपये जोड़ा जाएगा।
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300 रुपये में बजेगा ढोल
नामांकन का जुलूस हो या जनसंपर्क, लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए चुनाव में ढोल खूब बजते हैं। इसका खर्च भी प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा। ढोल का खर्च प्रतिदिन 300 रुपये के हिसाब से प्रत्याशी के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा।
ऐसे होगी निगरानी
नामांकन जुलूस हो या जनसभा, सभी की वीडियोग्राफी होगी। इसके लिए अलग से बनाई गईं टीमें भी मौके पर मौजूद रहेंगी। आयोजन में कितने लोग शामिल हुए, उन्हें खाने पीने के लिए क्या-क्या दिया गया, टीमें इन सभी चीजों का आकलन करके देंगी। वीडियो फुटेज से भी इसका मिलान किया जाएगा। साथ ही प्रत्याशी से भी खर्च का ब्योरा लिया जाएगा।
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झांसी। 35 की सादा और 70 रुपये की स्पेशल थाली, ये किसी होटल के रेट नहीं हैं। बल्कि, ये निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्याशियों के लिए तय की गई खान-पान सामग्री की दर की सूची है। इसमें पानी से लेकर चाय तक की कीमत तय है। प्रत्याशियों की ओर से जितना उपयोग किया जाएगा, उतना खर्च उनके खाते में जोड़ लिया जाएगा। इसकी सघन निगरानी भी होगी।
भारत निर्वाचन आयोग ने इस लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों की खर्च सीमा में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की है। 2014 के चुनाव की तरह इस बार भी प्रत्याशी अधिकतम सत्तर लाख रुपये ही खर्च कर सकेंगे। इसका उन्हें पाई - पाई का ब्योरा रोजाना निर्वाचन आयोग को देना होगा। इसके लिए अलग से रजिस्टर बनाना होगा, साथ ही अलग से बैंक खाता खोलकर उसी में से खर्च के लिए पैसा की निकासी करनी होगी।
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इसके अलावा प्रत्याशी खर्च कम दिखाकर निर्वाचन आयोग को गुमराह न कर सकें, इसके लिए हर सामग्री की कीमत तय कर दी है। यानी कि चुनाव कार्यालय पर, जनसभा में या जुलूस या चुनाव से जुड़ी किसी भी गतिविधि के दौरान चाय पिलाने पर प्रति कप पांच रुपये का खर्च प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जाएगा। खाने का पैकेट (छह पूड़ी, एक सूखी सब्जी और अचार) की कीमत 35 रुपये और स्पेशल पैकेट (छोला, सूखी सब्जी, चावल, सलाद, अचार एवं मीठा पीस) के दाम 70 रुपये निर्धारित किए गए हैं। पानी की 500 एमएल की बोतल के 10 रुपये और एक लीटर की बोतल के 20 रुपये प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जोड़े जाएंगे। समोसा पांच रुपये, ब्रांडेड बिस्किट के छोटे पैकेट का खर्च पांच और बड़े पैकेट का 10 रुपये जोड़ा जाएगा।
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300 रुपये में बजेगा ढोल
नामांकन का जुलूस हो या जनसंपर्क, लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए चुनाव में ढोल खूब बजते हैं। इसका खर्च भी प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा। ढोल का खर्च प्रतिदिन 300 रुपये के हिसाब से प्रत्याशी के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा।
ऐसे होगी निगरानी
नामांकन जुलूस हो या जनसभा, सभी की वीडियोग्राफी होगी। इसके लिए अलग से बनाई गईं टीमें भी मौके पर मौजूद रहेंगी। आयोजन में कितने लोग शामिल हुए, उन्हें खाने पीने के लिए क्या-क्या दिया गया, टीमें इन सभी चीजों का आकलन करके देंगी। वीडियो फुटेज से भी इसका मिलान किया जाएगा। साथ ही प्रत्याशी से भी खर्च का ब्योरा लिया जाएगा।