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क्राइम ब्रांच के वसूली की शिकायत किया तो, पुलिस ने पांच बार भेजा जेल

Varanasi Bureau Updated Sun, 09 Sep 2018 12:12 AM IST
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जौनपुर। पुलिस से दुश्मनी ठीक नहीं। वह जिंदगी तबाह कर सकती है। इसका उदाहरण केराकत के थानागद्दी निवासी युवक श्रीराम जायसवाल हैं। उन्होंने क्राइम ब्रांच के दरोगा एवं सिपाहियों की वसूली की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की थी। एसपी ने क्राइम ब्रांच के दरोगा एवं सिपाहियों को कैंप कार्यालय बुलाकर फटकार लगाई और पैसे लौटवाए। उसके बाद से श्रीराम की मुश्किलें बढ़ गईं। पुलिस ने इसे अदावत मान कर दो साल में उनको पांच बार फर्जी मुकदमे लाद कर जेल भेज दिया। तकरीबन एक साल तक युवक को जेल में रहना पड़ा। अब इस मामले में जांच बैठाई गई है। पीड़ित युवक ने एसपी से लेकर डीजीपी से शिकायत तो उन्होंने मामले की जांच बैठा दी। जांच वाराणसी के अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण को सौंपी गई है।
श्रीराम जायसवाल बैंक से ऋण लेकर जूता-चप्पल की दुकान थानागद्दी में खोली थी। 15 मई 2016 को क्राइम ब्रांच के सिपाही एवं दरोगा टाटा सूूमो से पहुंचे। उस पर शराब का धंधा करने का आरोप लगाते हुए उससे 10 हजार रुपये छीन लिए। साथ ही एक सिपाही का मोबाइल नंबर लिख कर दिया और कहा कि फोन करके इनके पास हर माह पचास हजार रुपये फोन पहुंचा देना। श्रीराम ने इसकी शिकायत एसपी आवास पर जाकर तत्कालीन एसपी आरपी सिंह से की। एसपी ने क्राइम ब्रांच की टीम को तलब कर फटकार लगाई पूरे मामले को अमर उजाला ने लुटेरी बनी क्राइम ब्रांच शीर्षक से 19 मई 16 के अंक में प्रकाशित किया था। तत्कालीन डीआईजी ने इसकी जांच एसपी ग्रामीण को सौंपी थी लेकिन जांच को रफादफा करवा दिया गया। जांच समाप्त होते ही 22 जनवरी 2017 को क्राइम ब्रांच के सिपाहियों ने श्रीराम को उसके घर से उठा लिया। चंदवक थाने में उसकी पिटाई की गई और शराब तस्करी का आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया। बीस दिन बाद जमानत पर छूटा तो 21 अप्रैल 17 को केराकत पुलिस ने गांजा बरामद दिखाकर जेल भेज दिया। जेल से छूटने के बाद श्रीराम पुलिस की डर से घर छोड़ कर बलिया चला गया और वहां होटल में काम करने लगा। पुलिस ने फरार उसे घोषित करके कुर्की का नोटिस जारी करवा दी तो वह कोर्ट में हाजिर हुआ। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। दो माह जेल से रिहा हुआ। आरोप है कि उसके बाद केराकत के तत्कालीन इंस्पेक्टर ने एक लाख रुपये की मांग की। अधिकारियों से इसकी शिकायत करने पर गैंगेस्टर लगाकर जेल भेज दिया। इसमें उसका पूरा परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया। बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई। उसकी मां चाय की दुकान चलाकर परिवार को पाल रही है। इस मामले में आईजी के निर्देश पर एसपी ग्रामीण वाराणसी ने अगस्त माह में पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। एसपी दिनेशपाल सिंह का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद अगर निर्दोष को जेल भेजा गया होगा तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।

तीन एसओ है जांच की जद में
जौनपुर। केराकत के थानागद्दी निवासी युवक श्रीराम जायसवाल को फर्जी मुकदमों में जेल भेजने वाले तीन एसओ जिले के अलग- अलग थानों में जमें है। वसूली करने में तीनों माहिर बताएं जाते है। जांच मैनेज करने में तीनों ने अपना जोर लगा दिया है। एक बार फिर श्रीराम जायसवाल को सुलह करने का दबाव बनाया जा रहा है। देखना है कि पहले की तरह जांच लीपापोती होती है या फिर कोई कार्रवाई ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ होता है।

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