फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   सूरजमुखी की खेती से विनोद ने बनाई अलग पहचान

सूरजमुखी की खेती से विनोद ने बनाई अलग पहचान

Sun, 02 Jun 2019 11:52 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jun 2019 11:52 PM IST
विज्ञापन
सूरजमुखी की खेती से विनोद ने बनाई अलग पहचान

विज्ञापन
केराकत। जैविक खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। क्षेत्र के सरेमू गांव निवासी विनोद कुमार मौर्य ने जैविक खेती के जरिए सूरजमुखी की खेती करके अपनी अलग पहचान बना लिया है। मेहनत और लगन से खेती करने का नतीजा है कि वह धरती से सोना पैदा कर रहे हैैं। गर्मी की इस तपती धूप में भी दो बीघे खेत में सूरजमुखी की फसल लहलहा रही है। उधर से गुजरने वाले हर किसी की निगाह एक बार खेत की तरफ जरूर पहुंच जाती है। क्षेत्र के हर किसान उनकी तारीफ करते सुने जा रहे हैं। आसपास के किसान भी उनसे आधुनिक खेती के गुर सीखने के लिए आते हैं।

इस भीषण गर्मी में जहां अधिकांश खेत खाली पड़े हुए हैं। वहीं विनोद कुमार मौर्य के खेत में सूरजमुखी की फसल लहलहा रही है। उनका कहना है कि कभी मौसम की मार तो कभी छुट्टा पशुओं से होने वाली खेती की नुकसान को देखते हुए आज के समय में सूरज मुखी से अच्छी कोई खेती नहीं है। उन्होंने बताया कि सूरजमुखी एक ऐसी तिलहन की खेती है जिसपर प्रकाश का कोई असर नहीं पड़ता है। यानि यह फोटोइन्सेंटिव है। इसके लिए बुआई का अनुकूल मौसम फरवरी माह होता है। फरवरी माह में सूरजमुखी की बुआई करके अच्छी पैदावार ली सकती है। इसके बीजों में 40 से 45 प्रतिशत तेल निकलता है। इसके तेल में खास तत्व लिनोलिइक अम्ल पाया जाता है। जो कोलेस्ट्रॉल को नहीं बढ़ने देता है। साथ ही दिल के रोगियों के लिए यह तेल बहुत ही फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि कम लागत में अच्छी पैदावार वाले इस फसल से अच्छी कमाई हो जाती है। औसत 20 से 25 किलो प्रति बिश्वा पैदावार होने वाली यह फसल किसानों के लिए बहुत ही लाभदायक साबित हो रही है। आलूकी खेती की पैदावारी करने के बाद जैविक उर्वरक का प्रयोग करके सूरजमुखी के फसल की बुवाई कर देते हैं। फसल उगने के बाद डाई यूरिया के साथ माइक्रो न्यूट्रीएन्ट व सल्फर का छिड़काव करते हैं। मई माह के अंतिम सप्ताह में फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है। इसके बाद फूलों की कटाई कर ली जाती है। इस फसल को न तो नीलगायों व अन्य जानवरों से कोई खतरा रहता है। और न ही प्रतिकूल मौसम का इस फसल पर कोई असर पड़ता है। इनके खेती करने का तरीका देख कर निशान गांव के बालेदीन पाल, भोगीपट्टी के राम अजोर चौहान, सरेमू के हीरा लाल मौर्य व इन्द्र जीत मौर्य आदि सूरजमुखी की खेती करने लगे हैं। अन्य किसान भी प्रभावित होकर सूरजमुखी की खेती में रुचि ले रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed