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चुनौती का डटकर करें मुकाबला
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आटा। नारी को शक्ति का स्वरुप यूं ही नहीं कहा गया। नारी में असीम शक्ति होती है, इसलिए बेटियां कभी स्वयं को कमजोर न समझे, हर चुनौती का डटकर मुकाबला करें, सफलता उनकी मुठ्ठी में होगी। यह बातें अमर उजाला के अभियान अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के अंतर्गत बेटियों में आत्मनिर्भरता लाने को जागरुकता विषयक गोष्ठी में वक्ताओं ने कही। हाई वे स्थित बीएमटी इंटर कालेज में आयोजित गोष्ठी के दौरान कालेज प्रबंधन व छात्राओं ने नारी गरिमा को बनाए रखने की शपथ भी ली।
स्कूल के प्रधानाचार्य शैलेंद्र पाठक ने कहा कि एक वक्त था जब बेटियों को ज्यादा पढ़ने लिखने नहीं दिया जाता था। अब वक्त काफी बदल चुका है, बेटियां भी पढ़ लिखकर न सिर्फ आत्मनिर्भर हो रही है, बल्कि खेल का मैदान हो या स्कूल का परीक्षाफल सभी स्थानों पर बेटों से आगे ही खड़ी नजर आती है। सरकारी नौकरियों से लेकर खेलकूद में महिलाएं अपनी भागीदारी साबित कर रही हैं। अध्यापक योगेश पांडेय ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि बेटियां बेटों की अपेक्षा अधिक मेहनती, आत्मविश्वासी होती हैं। इसी शक्ति को पहचान कर छात्राएं अपनी शिक्षा का लाभ उठाएं और आगे चलकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दें। बेटियों के लिए एक परिवार चलाना कोई बड़ी बात नहीं है, उनमें दो-दो परिवारों को चलाने की क्षमता होती है। आवश्यकता सिर्फ अपने भीतर छिपी प्रतिभा व शक्ति को पहचानने की है, फिर देखें सफलता छात्राओं की मुठ्ठी में होगी। इसके बाद छात्राओं ने भी गोष्ठी में खुलकर विचार व्यक्त किए। इसी कड़ी में सभी अपराजिता के बैनर साथ लेकर नारी सम्मान की सुरक्षा की शपथ भी ली। इस मौके पर शिवकुमार दीक्षित, परमेश्वरी दयाल तिवारी, राजेंद्र प्रसाद, रितेश दिवेदी के अलावा छात्राओं में दिव्या मिश्रा, सरोज, मेघा यादव, बिनि, निशि पांडे, शिल्पी, अंजलि, रश्मि, शिवानी ने विचार व्यक्त किए।
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स्कूल के प्रधानाचार्य शैलेंद्र पाठक ने कहा कि एक वक्त था जब बेटियों को ज्यादा पढ़ने लिखने नहीं दिया जाता था। अब वक्त काफी बदल चुका है, बेटियां भी पढ़ लिखकर न सिर्फ आत्मनिर्भर हो रही है, बल्कि खेल का मैदान हो या स्कूल का परीक्षाफल सभी स्थानों पर बेटों से आगे ही खड़ी नजर आती है। सरकारी नौकरियों से लेकर खेलकूद में महिलाएं अपनी भागीदारी साबित कर रही हैं। अध्यापक योगेश पांडेय ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि बेटियां बेटों की अपेक्षा अधिक मेहनती, आत्मविश्वासी होती हैं। इसी शक्ति को पहचान कर छात्राएं अपनी शिक्षा का लाभ उठाएं और आगे चलकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दें। बेटियों के लिए एक परिवार चलाना कोई बड़ी बात नहीं है, उनमें दो-दो परिवारों को चलाने की क्षमता होती है। आवश्यकता सिर्फ अपने भीतर छिपी प्रतिभा व शक्ति को पहचानने की है, फिर देखें सफलता छात्राओं की मुठ्ठी में होगी। इसके बाद छात्राओं ने भी गोष्ठी में खुलकर विचार व्यक्त किए। इसी कड़ी में सभी अपराजिता के बैनर साथ लेकर नारी सम्मान की सुरक्षा की शपथ भी ली। इस मौके पर शिवकुमार दीक्षित, परमेश्वरी दयाल तिवारी, राजेंद्र प्रसाद, रितेश दिवेदी के अलावा छात्राओं में दिव्या मिश्रा, सरोज, मेघा यादव, बिनि, निशि पांडे, शिल्पी, अंजलि, रश्मि, शिवानी ने विचार व्यक्त किए।
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