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खाली पड़ी गोशाला, रातों में जाग कर रखवाली को मजबूर किसान
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मुहम्मदाबाद। बुंदेलखण्ड का किसान अन्ना पशुओं की बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। डकोर ब्लाक में 62 गोशालाएं स्थापित हैं, जिनमें करीब 8 हजार जानवरों को रखने की क्षमता है। सर्दी के मौसम में किसान खेतों पर झोपड़ी बनाकर दिन के साथ रात में भी सर्द हवाओं के बीच अन्ना पशुओं से खेतों पर फसल की रखवाली करने को मजबूर हैं। रबी की बुआई चल रही है। अब अन्ना पशुओं से फ सल बचाने को खेतों में बांस, बल्लियों के सहारे कटीले और सादा तारों की बाड़ लगाने के काम में जुटे हैं। पर बाड़ लगाने की सामग्री एवं मजदूरी भी मंहगी होने से किसानों के लिए खेती करना अब बड़ा मुश्किल हो रहा है। डेढ़ दशक पहले परंपरागत खेती में किसानों को कुछ मुनाफा हो भी जाता था, लेकिन अब तो खेती की लागत निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। इससे अब किसानों का खेती की तरफ से मोह भंग होता जा रहा है।
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फ ोटो-21- किसान उपेन्द्र सिंह।
ऐसे बढ़ जाती खेती की लागत
मुहम्मदाबाद। चिल्ली के किसान उपेन्द्र सिंह का कहना है कि रबी फसल की बुआई से पहले किसान खेतों में दो से तीन जुताई करते हैं। इसके बाद खंदाई करते, फि र बुआई। इसके बाद फसल निकलने बाद जिस फसल में पानी की जरूरत होती है, उसमें नहरों, रजवाहो के सहारे जिंसवारा किया जाता है। उन्होंने बताया कि कुछ किसान तो पंपिंग सेट व नलकूप से घंटों के हिसाब से पानी खरीद कर फसलों को देते हैं। इसके अलावा फसल की कटाई और मड़ाई के समय मजदूरी काफी महंगी रहती है। डीजल, खाद, बीज, कटाई, पानी खरीद एवं कीटनाशक तारों की बाड़ जैसी अन्य व्यवस्थाएं बनाने के लिए किसान आढ़तियों से एडवांस में रुपये लेते हैं। फिर उन्हें ही फसल की उपज बेचकर उधारी चुकाते हैं। इस बीच अगर कोई दैवीय आपदा से फसल खराब होती है तो किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाते हैं।
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फ ोटो20- किसान इस्लाम।
खेतों में बाड़ लगाना भी हुआ मंहगा
मुहम्मदाबाद। किसान इस्लाम बताते हैं कि रबी फसलों की बुआई के बाद किसान अन्ना पशुओं से फसल बचाने को खेतों के आसपास तारों की बाड़ लगाने में जुटे हैं। इसके लिये किसान ऊंचे दामों पर तार बाड़ सामग्री खरीदकर ला रहे हैं। जिसमें एक बांस की कीमत 10 से 15 रुपये है और सादा तार 100 रुपये प्रति किलो है। वहीं कटीले तार 110 रुपये प्रति किलो तक है। किसान बताते हैं कटीले तारों के सापेक्ष सादा तार एक किलो में अधिक चढ़ जाता है। इससे अधिकतर किसान खेतों में बाड़ लगाने के लिए सादा तार प्रयोग कर रहे हैं। इसे लगाने के लिये एक दिन की मजदूरी 300 से 400 रुपये है। इसके अलावा बांस लगाने के लिये हाथ से एक गड्ढ़ा खुदवाने पर 10 से 15 रुपये मजदूर लेता है। वहीं पिलर मशीन से गड्ढ़ा कराने के 20 से 25 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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फ ोटो-19- खेत पर बनी झोपड़ी।
रात-दिन फसल की रखवाली कर रहे किसान
किसान बीरेंद्र बताते हैं कि खेतों में तारों की बाड़ लगाने के बावजूद अन्ना जानवर बाड़ फांदकर खेतों में घुस जाते हैं और चना, मटर की फसलें चर लेते हैं। इससे किसान दिन और रात खेतों पर झोपड़ी बनाकर फसल की रखवाली कर रहे हैं। कुछ किसान महीनावार फसल रखवाली के लिए रखवाले को दो से ढाई हजार रुपये दे रहे हैं। कुछ किसान स्वयं ही अपने खेतों पर रखवाली कर रहे हैं।
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फ ोटो17- खाली गोशाला।
गोशालाएं खालीए अन्ना घूम रहे मवेशी
डकोर क्षेत्र की गोशालाएं खाली पड़ी हैं। अन्ना जानवर छुट्टा घूम रहे हैं। अन्ना पशुओं के बड़े-बड़े झुंड किसानों की फसलें चरने के अलावा इनके खुरों से कुचल कर बर्बाद हो रहीं हैं। ऐसे में किसान एकदूसरे के गांवों में इन्हें हांक रहे हैं। ऐसा करने से किसानों में कभी भी संघर्ष की स्थिति बन सकती है। अन्ना जानवरों की रोकथाम पर प्रशासन कोई ठोस कदम उठाए तो सड़क दुघर्टनाओं और किसानों की फसलों का बचाव हो सकता है।
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फ ोटो-21- किसान उपेन्द्र सिंह।
ऐसे बढ़ जाती खेती की लागत
मुहम्मदाबाद। चिल्ली के किसान उपेन्द्र सिंह का कहना है कि रबी फसल की बुआई से पहले किसान खेतों में दो से तीन जुताई करते हैं। इसके बाद खंदाई करते, फि र बुआई। इसके बाद फसल निकलने बाद जिस फसल में पानी की जरूरत होती है, उसमें नहरों, रजवाहो के सहारे जिंसवारा किया जाता है। उन्होंने बताया कि कुछ किसान तो पंपिंग सेट व नलकूप से घंटों के हिसाब से पानी खरीद कर फसलों को देते हैं। इसके अलावा फसल की कटाई और मड़ाई के समय मजदूरी काफी महंगी रहती है। डीजल, खाद, बीज, कटाई, पानी खरीद एवं कीटनाशक तारों की बाड़ जैसी अन्य व्यवस्थाएं बनाने के लिए किसान आढ़तियों से एडवांस में रुपये लेते हैं। फिर उन्हें ही फसल की उपज बेचकर उधारी चुकाते हैं। इस बीच अगर कोई दैवीय आपदा से फसल खराब होती है तो किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाते हैं।
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फ ोटो20- किसान इस्लाम।
खेतों में बाड़ लगाना भी हुआ मंहगा
मुहम्मदाबाद। किसान इस्लाम बताते हैं कि रबी फसलों की बुआई के बाद किसान अन्ना पशुओं से फसल बचाने को खेतों के आसपास तारों की बाड़ लगाने में जुटे हैं। इसके लिये किसान ऊंचे दामों पर तार बाड़ सामग्री खरीदकर ला रहे हैं। जिसमें एक बांस की कीमत 10 से 15 रुपये है और सादा तार 100 रुपये प्रति किलो है। वहीं कटीले तार 110 रुपये प्रति किलो तक है। किसान बताते हैं कटीले तारों के सापेक्ष सादा तार एक किलो में अधिक चढ़ जाता है। इससे अधिकतर किसान खेतों में बाड़ लगाने के लिए सादा तार प्रयोग कर रहे हैं। इसे लगाने के लिये एक दिन की मजदूरी 300 से 400 रुपये है। इसके अलावा बांस लगाने के लिये हाथ से एक गड्ढ़ा खुदवाने पर 10 से 15 रुपये मजदूर लेता है। वहीं पिलर मशीन से गड्ढ़ा कराने के 20 से 25 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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फ ोटो-19- खेत पर बनी झोपड़ी।
रात-दिन फसल की रखवाली कर रहे किसान
किसान बीरेंद्र बताते हैं कि खेतों में तारों की बाड़ लगाने के बावजूद अन्ना जानवर बाड़ फांदकर खेतों में घुस जाते हैं और चना, मटर की फसलें चर लेते हैं। इससे किसान दिन और रात खेतों पर झोपड़ी बनाकर फसल की रखवाली कर रहे हैं। कुछ किसान महीनावार फसल रखवाली के लिए रखवाले को दो से ढाई हजार रुपये दे रहे हैं। कुछ किसान स्वयं ही अपने खेतों पर रखवाली कर रहे हैं।
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फ ोटो17- खाली गोशाला।
गोशालाएं खालीए अन्ना घूम रहे मवेशी
डकोर क्षेत्र की गोशालाएं खाली पड़ी हैं। अन्ना जानवर छुट्टा घूम रहे हैं। अन्ना पशुओं के बड़े-बड़े झुंड किसानों की फसलें चरने के अलावा इनके खुरों से कुचल कर बर्बाद हो रहीं हैं। ऐसे में किसान एकदूसरे के गांवों में इन्हें हांक रहे हैं। ऐसा करने से किसानों में कभी भी संघर्ष की स्थिति बन सकती है। अन्ना जानवरों की रोकथाम पर प्रशासन कोई ठोस कदम उठाए तो सड़क दुघर्टनाओं और किसानों की फसलों का बचाव हो सकता है।