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कोरोना काल में फूलों की खेती बर्बाद
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आटा। कोरोना काल का नुकसान सभी को उठाना पड़ रहा है। पर फूलों की खेती कर जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बने, किसान अब अपनी उपज बेचने के लिए परेशान है।
कोरोना प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही तरीके से लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है। लॉकडाउन से मजदूरों के साथ-साथ किसान भी परेशान है और अपनी उपज को फेंकने के लिए मजबूर है। ऐसा ही एक नजारा ग्राम आट के भुबआ में देखने को मिलता है। जहां कभी फूलों की खेती कर जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बने, किसान अब अपनी उपज बेचने के लिए परेशान है। बता दें कि आटा क्षेत्र के ग्राम भबुआ के रहने वाले रामखिलावन और पत्नी ने दो बीघा खेत में फूलों की खेती करके जिसे में खूब वाहवाही बटोरी थी। उनकी उपज देखकर जिले के अन्य किसान भी पारंपरिक खेती को छोड़ कर फूलों की खेती अपनाने लगे थे। लेकिन लॉकडाउन की वजह से उनकी फसल बर्बाद हो रही है।
रामखिलावन ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से वर्ष 2020 में फूलों की खेती पूरी तरह बरबाद हो गई थी। इस साल सोचा था अगले साल की भरपाई हो जाएगी, तो इस वर्ष नवरंग की पौध इंदौर से मंगाकर खेत में लगाई थी। फूल अभी खिले ही थे और लॉकडाउन का आदेश आ गया। सभी मंदिर बंद हो गए। विवाह समारोह पर पाबंदी है। गुलाब रानी ने बताया अगले साल के सूखे फूल अभी भी बोरियों में भरे रखे है। बताया हर दिन पांच सौ रुपये तक के फूल फुटकर में बेचकर खर्चा चला लेते थे। पर अब चिंता सता रही है। घर का खर्चा कैसे चलेगा।
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कोरोना प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही तरीके से लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है। लॉकडाउन से मजदूरों के साथ-साथ किसान भी परेशान है और अपनी उपज को फेंकने के लिए मजबूर है। ऐसा ही एक नजारा ग्राम आट के भुबआ में देखने को मिलता है। जहां कभी फूलों की खेती कर जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बने, किसान अब अपनी उपज बेचने के लिए परेशान है। बता दें कि आटा क्षेत्र के ग्राम भबुआ के रहने वाले रामखिलावन और पत्नी ने दो बीघा खेत में फूलों की खेती करके जिसे में खूब वाहवाही बटोरी थी। उनकी उपज देखकर जिले के अन्य किसान भी पारंपरिक खेती को छोड़ कर फूलों की खेती अपनाने लगे थे। लेकिन लॉकडाउन की वजह से उनकी फसल बर्बाद हो रही है।
रामखिलावन ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से वर्ष 2020 में फूलों की खेती पूरी तरह बरबाद हो गई थी। इस साल सोचा था अगले साल की भरपाई हो जाएगी, तो इस वर्ष नवरंग की पौध इंदौर से मंगाकर खेत में लगाई थी। फूल अभी खिले ही थे और लॉकडाउन का आदेश आ गया। सभी मंदिर बंद हो गए। विवाह समारोह पर पाबंदी है। गुलाब रानी ने बताया अगले साल के सूखे फूल अभी भी बोरियों में भरे रखे है। बताया हर दिन पांच सौ रुपये तक के फूल फुटकर में बेचकर खर्चा चला लेते थे। पर अब चिंता सता रही है। घर का खर्चा कैसे चलेगा।
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