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सिपाहियों के कंधों पर होगी गांवों की कानून व्यवस्था

Mon, 03 Feb 2020 12:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 03 Feb 2020 12:33 AM IST
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The law and order of the villages will be on the shoulders of constables
उरई कोतवाली में सिपाहियों को ट्रेनिंग देते सीओ। - फोटो : ORAI
उरई। शहर के साथ-साथ अब गांवों की सुरक्षा पर भी पुलिस प्रशासन काफी सजग नजर आ रहा है। शासन के निर्देश पर एसपी ने जिले में शुक्रवार से बीट प्रणाली लागू कर दी है। जिसके तहत गांवों की सुरक्षा के लिए लेखपालों की तरह ही सिपाहियों की तैनाती की गई है। इन सिपाहियों को जहां आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है वहीं दरोगाओं को अधिकारी भी दिए गए है। जिससे वह सिपाही गांव में ही किसी भी विवाद की सुनवाई कर उसका निस्तारण कर सकेंगे। फिलहाल इस व्यवस्था को पाइलट प्रोजेक्ट के तहत उरई कोतवाली में शुरू किया गया है। इसमें कोतवाली के 25 सिपाही व 4 हेडकांस्टेबल को गांवों की जिम्मेदारी के साथ जवाबदेही तय की गई है।
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बता दें कि प्रदेश के डीजीपी ने 3 जनवरी को थानों पर नवीन बीट प्रणाली व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया गया था। जिसके चलते एसपी डा. सतीश कुमार ने जिला मुख्यालय की उरई कोतवाली को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चयनित कर नवीन बीट प्रणाली व्यवस्था लागू की है। जिसके तहत एसपी के निर्देशन में सीओ सिटी संतोष कुमार ने कोतवाली के चार हेड कांस्टेबलों को वायरलेस सेट प्रदान किए। वहीं 25 बीट सिपाहियों को बीट बुक प्रदान की। सीओ संतोष कुमार ने बताया कि फिलहाल अभी इस बीट प्रणाली में कोई महिला आरक्षी शामिल नहीं की गई।
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बीट प्रणाली व्यवस्था के विषय में सीओ ने बताया कि इस प्रणाली के तहत सिपाहियों को ड्यूटी के साथ साथ गांवों की सुरक्षा के लिए जवाबदेही तय की गई। सिपाही की बीट लेखपालों के क्षेत्र के अनुसार तय की गई है। यह बीट सिपाही गांवों में ही लोगों की सुनवाई कर सकेंगे, साथ चरित्र प्रमाण पत्र सहित अन्य प्रमाण पत्रों में जरूरी रिपोर्ट भी लगा सकेंगे। उन्होंने बताया कि हेड कांस्टेबलों को वायरलेस सेट के साथ ही शस्त्र भी उपलब्ध करा दिया गया है। जल्द ही उन्हें सरकारी मोटरसाइकिल व सीयूजी नंबर भी उपलब्ध करा दिए जाएंगे। उन्होंने हल्का प्रभारियों व बीट आरक्षियों को उनकी जिम्मेदारी से अवगत कराते हुए कहा कि बीट बुक में वांछित सूचनाओं का अंकन होने से अपराधों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
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ये मिले अधिकार
बीट प्रभारी अपने बीट यानी क्षेत्र में किसी भी प्रार्थनापत्र की सुनवाई कर सकेगा। अभी तक यह अधिकार सिर्फ चौकी इंचार्ज व एसओ के पास था, लेकिन बीट प्रभारी बनने के बाद यह सारे अधिकार सिपाहियों को भी मिल जाएंगे। इसके साथ ही सिपाही चरित्र सत्यापन, पासपोर्ट संबंधी विवेचना और सांस्कृतिक, आपराधिक और सामाजिक गतिविधियों का लेखा जोखा भी तैयार करेंगे।
ऐसे बनेगी बीट व्यवस्था
कोतवाल शिव गोपाल ने बताया कोतवाली में तैनात 40 फीसदी सिपाही बीट के लिए आरक्षित होंगे, तीन चार बीट को मिलाकर एक हेड कांस्टेबल होगा। सिपाहियों की संख्या के आधार पर बीट बनेगी। जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में दो लेखपाल राजस्व क्षेत्र को मिलाकर एक बीट बनेगी। तैनात सिपाही पुलिस अफसर कहलाएंगे उनकी तैनाती कम से कम एक साल के लिए होगी। अगर बीट सिपाही छुट्टी पर है तो पड़ोसी सिपाही उसकी बीट संभालेगा।
4 से 5 हजार की आबादी पर तैनात होंगे बीट सिपाही
एक बीट सिपाही पर लगभग 4 से 5 हजार आबादी की जिम्मेदारी रहेगी। इस आबादी में कहीं मारपीट, जुआ, सट्टा, खिलता है तो बीट सिपाही जिम्मेदार होगा। प्रत्येक बीट प्रभारी सप्ताह में कम से कम तीन बार अपने क्षेत्र का निरीक्षण जरुर करेगा और उसकी रिपोर्ट भी कोतवाली में देगा।

बीट प्रभारियों की ट्रेनिंग भी होने लगी है
बीट पुलिस अफसर के पद पर तैनात होने वाले सिपाहियों का चयन कर इनकी ट्रेनिंग भी पुलिस लाइन में शुरू कर दी गई है। ट्रेनिंग में इन सिपाहियों को अधिकार व जिम्मेंदरी के साथ साथ अन्य व्यवस्थाओं की ट्रेनिंग दी जा रही है। जिसमें बताया जा रहा है कि कैसे ड्यूटी करना, किन किन प्रमुख बातों पर विशेष ध्यान देना, असलहा चलाना आदि की ट्रेनिंग कराई जा रही है। बीट पुलिस सिपाही आमजन से सीधे संपर्क में रहेंगी। इससे व्यवस्था में काफी सुधार आएगा।
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