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Jalaun News: जांच के पहले शिकायतकर्ता महिलाओं की कर दी छुट्टी
Thu, 28 Nov 2024 11:42 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Thu, 28 Nov 2024 11:42 PM IST
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उरई। जिला महिला अस्पताल में प्रसूता से प्रसव के नाम पर होने वाली वसूली की खबर प्रकाशित होने के बाद गुरुवार शाम पांच बजे राज्य महिला आयोग की सदस्य अनुपमा सिंह ने फिर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान शिकायत कर्ता महिलाओं से मिलने जब वार्ड में पहुंची तो पता चला कि उनकी छुट्टी कर दी गई। इस पर उन्होंने मोबाइल से शिकायतकर्ताओं से बातचीत की।
बता दें कि बुधवार को महिला आयोग की सदस्य ने जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई खामियां मिलीं थीं। सबसे ज्यादा शिकायत प्रसव के दौरान गर्भवती के तीमारदारों से होने वाली वसूली को लेकर थी। चार महिलाओं के तीमारदारों ने वसूले के खुले आरोप लगाकर खलबली मची थी। जैसे ही यह खबर गुरुवार को मीडिया में प्रकाशित हुई तो स्टाफ ने प्रसूताओं की छुट्टी कर दी।
जिले के तीन दिवसीय भ्रमण पर आई महिला आयोग की सदस्य गुरुवार की शाम को महिला अस्पताल पहुंच गई। वार्ड पहुंची तो पता चला कि शिकायतकर्ताओं की छुट्टी कर दी गई। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। भर्ती फार्म पर मिले फोन नंबर से बात की तो तीमारदारों ने वसूली की पुष्टि की। साथ ही एंबुलेंस सेवा न मिलने की भी शिकायत की। महिला आयोग की सदस्य ने इस पर नाराजगी जाहिर की।
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कई चिकित्सक, स्टाफ नर्स और चतुर्थ श्रेणी कर्मी जांच के दायरे में
उरई। वैसे तो प्रसूताओं से अक्सर वसूली की शिकायतें मिलती है लेकिन महिला आयोग की सदस्य के सामने 24 से 27 नवंबर तक भर्ती महिलाओं की शिकायत आई। इस दौरान हर शिफ्ट में छह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, 12 स्टाफ नर्स, तीन चिकित्सक व चार गार्ड की तैनाती रहती है। यह सभी जांच के दायरे में है। शिकायत के बाद सीएमएस डॉ. सुनीता बनौधा ने आंतरिक कमेटी गठित की गई है। इसमें डॉ. संजीव प्रभाकर, डॉ. एसके पाल और मेट्रन सुजाता मसीह को शामिल किया है। जांच टीम ने जल्द रिपोर्ट देने की बात कही है। महिला आयोग की सदस्य का कहना है कि जल्द वह दोबारा निरीक्षण करेगी। जब तक जिम्मदारों की जवाबदेही तय हो जानी चाहिए। (संवाद)
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बता दें कि बुधवार को महिला आयोग की सदस्य ने जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई खामियां मिलीं थीं। सबसे ज्यादा शिकायत प्रसव के दौरान गर्भवती के तीमारदारों से होने वाली वसूली को लेकर थी। चार महिलाओं के तीमारदारों ने वसूले के खुले आरोप लगाकर खलबली मची थी। जैसे ही यह खबर गुरुवार को मीडिया में प्रकाशित हुई तो स्टाफ ने प्रसूताओं की छुट्टी कर दी।
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जिले के तीन दिवसीय भ्रमण पर आई महिला आयोग की सदस्य गुरुवार की शाम को महिला अस्पताल पहुंच गई। वार्ड पहुंची तो पता चला कि शिकायतकर्ताओं की छुट्टी कर दी गई। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। भर्ती फार्म पर मिले फोन नंबर से बात की तो तीमारदारों ने वसूली की पुष्टि की। साथ ही एंबुलेंस सेवा न मिलने की भी शिकायत की। महिला आयोग की सदस्य ने इस पर नाराजगी जाहिर की।
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कई चिकित्सक, स्टाफ नर्स और चतुर्थ श्रेणी कर्मी जांच के दायरे में
उरई। वैसे तो प्रसूताओं से अक्सर वसूली की शिकायतें मिलती है लेकिन महिला आयोग की सदस्य के सामने 24 से 27 नवंबर तक भर्ती महिलाओं की शिकायत आई। इस दौरान हर शिफ्ट में छह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, 12 स्टाफ नर्स, तीन चिकित्सक व चार गार्ड की तैनाती रहती है। यह सभी जांच के दायरे में है। शिकायत के बाद सीएमएस डॉ. सुनीता बनौधा ने आंतरिक कमेटी गठित की गई है। इसमें डॉ. संजीव प्रभाकर, डॉ. एसके पाल और मेट्रन सुजाता मसीह को शामिल किया है। जांच टीम ने जल्द रिपोर्ट देने की बात कही है। महिला आयोग की सदस्य का कहना है कि जल्द वह दोबारा निरीक्षण करेगी। जब तक जिम्मदारों की जवाबदेही तय हो जानी चाहिए। (संवाद)