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Jalaun News: झांसी-कानपुर हाईवे पर छह घंटे लगा रहा जाम, रेंगते दिखे वाहन

Wed, 10 Jun 2026 01:23 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 01:23 AM IST
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Six-hour traffic jam on Jhansi-Kanpur highway, vehicles seen crawling
फोटो - 09 कालपी के यमुना पुल के पास लगी वाहनों की लंबी कतारें। संवाद - फोटो : रामेश्वर दास
कालपी। पुराने यमुना पुल की मरम्मत के लिए शुरू किया गया कार्य अब पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी यातायात समस्या बनता जा रहा है। झांसी-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोमवार रात एक ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जो हालात बने, उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। रात 10 बजे से लगा जाम तड़के चार बजे के बाद ही खुल सका। इससे जाम चौरा से उसरगांव तक फैला रहा।
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कालपी की सबसे बड़ी समस्या उसकी भौगोलिक स्थिति है। बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत से आने वाला भारी मालवाहक यातायात कानपुर और लखनऊ की ओर जाने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करता है। यमुना नदी पर सीमित पुल होने के कारण वैकल्पिक रास्तों की संख्या भी कम है। ऐसे में पुराने पुल पर मरम्मत शुरू होते ही पूरे क्षेत्र का यातायात संतुलन बिगड़ गया है।
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रात के समय बड़ी संख्या में ट्रकों का दबाव अचानक बढ़ जाता है। ओवरलोड वाहन, धीमी गति से चलने वाले ट्रक और संकरी डायवर्जन व्यवस्था मिलकर जाम को और भयावह बना देते हैं। एक वाहन के खराब होने या दुर्घटनाग्रस्त होने पर कई किलोमीटर लंबी कतार लग जाती है। सोमवार की देर रात दो वाहनों के टकरा जाने से वाहनों की लंबी कतारें लग गई। इससे लोगों को परेशानी का सामाना करना पड़ा। करीब छह घंटे बाद किसी तरह रेंगते हुए वाहन निकले।
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दस मिनट की दूरी तय करने में लग रहे दो घंटे

कालपी। चौरा से जोल्हूपुर मोड़ तक दस किमी की दूरी तय करने में अमूमन दस मिनट ही लगते हैं, पर जाम के कारण अब दो घंटे तक लग जा रहे हैं। मप्र, महाराष्ट्र की ओर से आने वाले भारी वाहन चालक इससे परेशान हैं। चालकों का कहना है कि आए दिन लग रहे जाम के कारण वाहनों में लदीं सब्जियां और सामान खराब हो रहा है। इससे ट्रांसपोर्टर की नाराजगी उन्हें झेलनी पड़ रही है। नागपुर से सब्जियां लेकर आ रहे ट्रक चालक सोनू का कहना है कि वह सब्जियों के साथ धनिया भी लेकर आया था। देर होने के कारण धनिया सूख रहा है। ऐसे में मंडी व्यापारी इसे लेने से मना कर देंगे और नाराजगी हमें झेलनी पड़ेगी।

हर दिन करोड़ों का नुकसान

यह समस्या केवल यात्रियों की असुविधा तक सीमित नहीं है। घंटों जाम में फंसे मालवाहक वाहनों से व्यापार प्रभावित हो रहा है। डीजल की अतिरिक्त खपत, समय की बर्बादी और माल की देरी से डिलीवरी का सीधा असर व्यापारियों और परिवहन व्यवसाय पर पड़ रहा है। फल, सब्जी और अन्य नाशवान वस्तुओं से लदे वाहन सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि कई बार मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती हैं। स्कूल बसों और दैनिक यात्रियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।



डायवर्जन नहीं, ठोस ट्रैफिक प्लान की जरूरत

प्रशासन ने भारी वाहनों के लिए डायवर्जन व्यवस्था लागू की है, लेकिन यह व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। सवाल यह है कि जब पुल की मरम्मत लंबी अवधि तक चलनी है तो क्या केवल डायवर्जन के भरोसे स्थिति संभाली जा सकती है। लोगों का कहना है कि यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं।


यह हो सकता है समाधान

- झांसी, उरई और हमीरपुर की सीमाओं पर अस्थायी ट्रक पार्किंग एवं होल्डिंग एरिया बनाए जाएं।

- रात में एक साथ भारी वाहनों की एंट्री रोककर चरणबद्ध आवागमन कराया जाए।

- ओवरलोड वाहनों पर विशेष अभियान चलाया जाए।

- दुर्घटना या खराब वाहन हटाने के लिए पुल क्षेत्र में 24 घंटे क्रेन और रेस्क्यू टीम तैनात रहे।

- ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त तैनाती कर रीयल टाइम यातायात नियंत्रण किया जाए।

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वर्जन

वाहनों का दबाव ज्यादा होने से जाम की स्थिति बन रही है। डायवर्जन व्यवस्था बनाई गई है, पर वाहन चालक गलत ढंग से निकलने का प्रयास करते हैं और जाम लग जाता है। अमलतास के कट को बंद किया गया है, ताकि डायवर्जन व्यवस्था के अनुसार ही वाहन निकल सकें।

- उत्तम शर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई
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