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विसरा रिपोर्ट के साथ इंसाफ का भी है इंतजार
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उरई (जालौन)। विसरा रिपोर्ट के आधार पर इंसाफ मिलना आज कोई आसान बात नहीं रह गई है। पुलिस भले ही पीड़ित पक्ष की तहरीर पर एफआईआर तो दर्ज कर ले पर विसरा की रिपोर्ट के आने में लगने वाला समय आरोपियों के लिए कहीं न कहीं लाभ ही पहुंचाता है। यही कारण है कि जनपद में 60 फीसदी से अधिक मामले अभी भी विसरा रिपोर्ट के इंतजार में लंबित पड़े हैं। मरने वालों को अपनों के लिए इंसाफ की आस लगी है वहीं आरोपी कानून का ताना बाना बुनकर जैसे-तैसे मामले से छुटकारा पाने की जुगत में लगे रहते हैं। कुछ समझौते के आधार पर अपने इरादों को पूरा भी कर लेते हैं और रिपोर्ट से पहले ही दोनों पक्षों में सुलह समझौते की लिखापढ़ी तैयार हो जाती है। जनपद के कुछ हाल ही के चर्चित मामलों पर नजर डाली जाए तो अभी तक उनकी विसरा रिपोर्ट नहीं आई है। जिनका कहीं न कहीं आरोपी पक्ष को लाभ भी मिल सकता है।
केस एक
करीब साल भर पूर्व उरई के बघौरा निवासी युवक अफसार अहमद उर्फ शीबू का शव कालपी स्थित मुन्ना फुलपावर चौराहे के पास सुनसान सड़क पर पड़ा मिला था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शीबू किसी मकान से निकला था और फिर सड़क पर अचेत होकर गिर गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट न होने से विसरा जांच के लिए भेजा गया था। परिजनों ने कालपी के ही तीन चार लोगों पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया तो काफी दिन बाद पुलिस ने एक के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया। शीबू के पिता अबरार अहमद ने बताया कि विसरा की रिपोर्ट भी आ गई है पर अभी तक पुलिस ने उन्हें कुछ भी रिपोर्ट के संदर्भ में नहीं बताया और आरोपी भी खुलेआम घूम रहे हैं।
केस दो
करीब दो माह पूर्व ही कालपी के ही कागजीपुरा मोहल्ले में प्राइवेट नर्सिंगहोम में इलाज के दौरान ही गर्भवती महिला मनु की मौत हुई थी। इसमें भी परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह पता नहीं चल सका कि महिला की मौत गलत दवाओं से हुई या फिर उस वक्त के हालात में महिला की स्थिति ही उसे मौत के करीब ले गई। लिहाजा विसरा जांच के लिए भेज दिया गया और कुछ दिन तक चली जांच पड़ताल के बाद नर्सिंगहोम संचालक सेवानिवृत्त नर्स के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया गया। बताया जाता है कि दोनों पक्षों में समझौता भी हो गया पर विसरा की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।
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केस तीन
ऐसे ही इसी साल जून माह में उरई कोतवाली के राजेंद्र नगर मोहल्ले में 38 वर्षीय रविकांत का शव कमरे के अंदर फर्श पर संदिग्ध हालात में मिला था। कमरे का दरवाजा भीतर से बंद था, पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को कब्जे में लिया था। शुरुआती जांच में सामने आया था कि मृतक की पत्नी मायके चली गई थी। मामला संदिग्ध देख पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए शव को भेजा पर मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण विसरा जांच के लिए भेजा गया था। इस मामले में भी मौत का कारण सामने आने के लिए अभी भी विसरा रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
केस चार
आम लोगों की बात तो छोड़ें, पुलिस कर्मियों की मौत भी अक्सर विसरा रिपोर्ट के इंतजार में राज बनकर रह जाती है। ऐसा ही एक मामला इसी साल जून माह में डकोर कोतवाली तब सामने आया जब अवकाश पर आए झांसी के सिपाही वीरेंद्र सिंह का शव फंदे से लटका मिला था। घरवालों के गले से आत्महत्या किए जाने की बात नहीं उतर रही थी और फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी फांसी से मौत की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई थी। लिहाजा विसरा जांच के लिए लैब भेजा गया। अब जब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक यह पता करना मुश्किल है कि सिपाही की मौत का कारण क्या था।
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केस एक
करीब साल भर पूर्व उरई के बघौरा निवासी युवक अफसार अहमद उर्फ शीबू का शव कालपी स्थित मुन्ना फुलपावर चौराहे के पास सुनसान सड़क पर पड़ा मिला था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शीबू किसी मकान से निकला था और फिर सड़क पर अचेत होकर गिर गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट न होने से विसरा जांच के लिए भेजा गया था। परिजनों ने कालपी के ही तीन चार लोगों पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया तो काफी दिन बाद पुलिस ने एक के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया। शीबू के पिता अबरार अहमद ने बताया कि विसरा की रिपोर्ट भी आ गई है पर अभी तक पुलिस ने उन्हें कुछ भी रिपोर्ट के संदर्भ में नहीं बताया और आरोपी भी खुलेआम घूम रहे हैं।
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केस दो
करीब दो माह पूर्व ही कालपी के ही कागजीपुरा मोहल्ले में प्राइवेट नर्सिंगहोम में इलाज के दौरान ही गर्भवती महिला मनु की मौत हुई थी। इसमें भी परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह पता नहीं चल सका कि महिला की मौत गलत दवाओं से हुई या फिर उस वक्त के हालात में महिला की स्थिति ही उसे मौत के करीब ले गई। लिहाजा विसरा जांच के लिए भेज दिया गया और कुछ दिन तक चली जांच पड़ताल के बाद नर्सिंगहोम संचालक सेवानिवृत्त नर्स के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया गया। बताया जाता है कि दोनों पक्षों में समझौता भी हो गया पर विसरा की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।
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केस तीन
ऐसे ही इसी साल जून माह में उरई कोतवाली के राजेंद्र नगर मोहल्ले में 38 वर्षीय रविकांत का शव कमरे के अंदर फर्श पर संदिग्ध हालात में मिला था। कमरे का दरवाजा भीतर से बंद था, पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को कब्जे में लिया था। शुरुआती जांच में सामने आया था कि मृतक की पत्नी मायके चली गई थी। मामला संदिग्ध देख पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए शव को भेजा पर मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण विसरा जांच के लिए भेजा गया था। इस मामले में भी मौत का कारण सामने आने के लिए अभी भी विसरा रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
केस चार
आम लोगों की बात तो छोड़ें, पुलिस कर्मियों की मौत भी अक्सर विसरा रिपोर्ट के इंतजार में राज बनकर रह जाती है। ऐसा ही एक मामला इसी साल जून माह में डकोर कोतवाली तब सामने आया जब अवकाश पर आए झांसी के सिपाही वीरेंद्र सिंह का शव फंदे से लटका मिला था। घरवालों के गले से आत्महत्या किए जाने की बात नहीं उतर रही थी और फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी फांसी से मौत की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई थी। लिहाजा विसरा जांच के लिए लैब भेजा गया। अब जब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक यह पता करना मुश्किल है कि सिपाही की मौत का कारण क्या था।