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मंडी शुल्क में दोहरी नीति का गल्ला व्यापारियों ने किया विरोध
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कलक्ट्रेट में नारेबाजी करते गल्ला व्यापारी।
- फोटो : ORAI
उरई। मंडी शुल्क में दोहरी नीति का गल्ला व्यापारियों ने मंगलवार को भी विरोध किया। कलक्ट्रेट में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा गया।
मंगलवार को गल्ला व्यापार सेवा समिति के अध्यक्ष प्रदीप महेश्वरी के नेतृत्व में अजय कुमार गुप्ता, बृजकिशोर राजपूत, राजेंद्र सिपोलिया, देवेंद्र, राजेंद्र राजपूत, मनोज कालपी, रवींद्र सिंह करमेर, आशीष सेठ, छोटे इटौदिया, अरविंद चिकासी, अजय लखोटिया, रामप्रकाश खरका, उदय सिंह टिमरों आदि ने डीएम को ज्ञापन दिया। इसमें कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से मंडियों के भीतर अभी भी मंडी शुल्क लग रहा है। मंडी के बाहर और भीतर ढाई प्रतिशत का अंतर हो गया है। इससे मंडी के अंदर व्यापार लगभग समाप्त हो जाएगा। एक देश में एक कानून के तहत मंडियों के शुल्क में छूट दी गई है। मंडियों के अंदर ढाई प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाएगा। मंडियां किसानों के हितों के लिए बनाई गई थीं, न कि सरकार की कमाई के लिए। अगर मंडियों के अंदर शुल्क लिया जाता है तो बाहर भी लगना चाहिए। अगर छूट है तो दोनों जगह समान होनी चाहिए।
व्यापारियों ने बताया कि मंडियों के बंद होने की स्थिति में लाखों व्यापारी उनके सहायक और कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। करोड़ों मजदूरों के पास कोई काम नहीं रह जाएगा। व्यापारियों ने सीएम से मांग की है कि असमानता को समाप्त कर करोड़ों लोगों को बेरोजगार होने से बचाया जाए।
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मंगलवार को गल्ला व्यापार सेवा समिति के अध्यक्ष प्रदीप महेश्वरी के नेतृत्व में अजय कुमार गुप्ता, बृजकिशोर राजपूत, राजेंद्र सिपोलिया, देवेंद्र, राजेंद्र राजपूत, मनोज कालपी, रवींद्र सिंह करमेर, आशीष सेठ, छोटे इटौदिया, अरविंद चिकासी, अजय लखोटिया, रामप्रकाश खरका, उदय सिंह टिमरों आदि ने डीएम को ज्ञापन दिया। इसमें कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से मंडियों के भीतर अभी भी मंडी शुल्क लग रहा है। मंडी के बाहर और भीतर ढाई प्रतिशत का अंतर हो गया है। इससे मंडी के अंदर व्यापार लगभग समाप्त हो जाएगा। एक देश में एक कानून के तहत मंडियों के शुल्क में छूट दी गई है। मंडियों के अंदर ढाई प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाएगा। मंडियां किसानों के हितों के लिए बनाई गई थीं, न कि सरकार की कमाई के लिए। अगर मंडियों के अंदर शुल्क लिया जाता है तो बाहर भी लगना चाहिए। अगर छूट है तो दोनों जगह समान होनी चाहिए।
व्यापारियों ने बताया कि मंडियों के बंद होने की स्थिति में लाखों व्यापारी उनके सहायक और कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। करोड़ों मजदूरों के पास कोई काम नहीं रह जाएगा। व्यापारियों ने सीएम से मांग की है कि असमानता को समाप्त कर करोड़ों लोगों को बेरोजगार होने से बचाया जाए।
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