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जालौन पंचायत चुनाव: अपने गढ़ में लड़खड़ाया हाथी अब दमदारी से चिंघाड़ा, कमल खिलाने के लिए मंथन को मजबूर हुई भाजपा
Fri, 07 May 2021 09:44 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 07 May 2021 09:44 PM IST
सार
छह सीटें पाने वाली भाजपा के लिए फाइनल यानी विधानसभा चुनाव के लिए कड़ी चुनौती भी है। पंचायत चुनाव नतीजे से जोश में आई बसपा अपने गढ़ में वापसी की रणनीति बनाने में जुट गई है।
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जालौन पंचायत चुनाव 2021
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जालौन जिले में हाल ही में हुए जिला पंचायत चुनाव को 2022 में होने वाले विधान सभा चुनाव का सेमी फाइनल माना जा रहा था। यही वजह थी कि सभी दलों ने इन पंचायत चुनाव में पूरा जोर भी लगाया। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में सात सीटें पाने वाली बसपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है।
छह सीटें पाने वाली भाजपा के लिए फाइनल यानी विधानसभा चुनाव के लिए कड़ी चुनौती भी है। पंचायत चुनाव नतीजे से जोश में आई बसपा अपने गढ़ में वापसी की रणनीति बनाने में जुट गई है। भाजपा 2022 में कमल खिलाने पर मंथन कर रही है। वर्ष 2007 में जिले की तीनों विधानसभा सीटों सदर, कालपी और माधौगढ़ पर हाथी ने ही जीत हासिल की थी।
इसके बाद जिले को बसपा का गढ़ माना जाने लगा था। 2012 के चुनाव में तीन सीटों में एक ही सीट बसपा के खाते में आई। दूसरी और तीसरी सीट पर सपा और कांग्रेस के विधायक जीते थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में चली मोदी लहर में सपा और बसपा के किले ध्वस्त करते हुए भाजपा ने तीनों सीटों पर अपना परचम लहराया।
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इसके बाद से हाथी जिले में लड़खड़ा गया था। इस पंचायत चुनाव में भाजपा को जिला पंचायत सदस्य की 10 से 14 सीटें मिलने की उम्मीद थी, लेकिन यह आंकड़ा दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंच सका। भाजपा अब बीती बात बिसारिए की तरह सब कुछ भूलकर अपने भगवा किले को लेकर फिक्रमंद नजर आ रही है।
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छह सीटें पाने वाली भाजपा के लिए फाइनल यानी विधानसभा चुनाव के लिए कड़ी चुनौती भी है। पंचायत चुनाव नतीजे से जोश में आई बसपा अपने गढ़ में वापसी की रणनीति बनाने में जुट गई है। भाजपा 2022 में कमल खिलाने पर मंथन कर रही है। वर्ष 2007 में जिले की तीनों विधानसभा सीटों सदर, कालपी और माधौगढ़ पर हाथी ने ही जीत हासिल की थी।
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इसके बाद जिले को बसपा का गढ़ माना जाने लगा था। 2012 के चुनाव में तीन सीटों में एक ही सीट बसपा के खाते में आई। दूसरी और तीसरी सीट पर सपा और कांग्रेस के विधायक जीते थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में चली मोदी लहर में सपा और बसपा के किले ध्वस्त करते हुए भाजपा ने तीनों सीटों पर अपना परचम लहराया।
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इसके बाद से हाथी जिले में लड़खड़ा गया था। इस पंचायत चुनाव में भाजपा को जिला पंचायत सदस्य की 10 से 14 सीटें मिलने की उम्मीद थी, लेकिन यह आंकड़ा दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंच सका। भाजपा अब बीती बात बिसारिए की तरह सब कुछ भूलकर अपने भगवा किले को लेकर फिक्रमंद नजर आ रही है।
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पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का तो यह तक कहना है कि कार्यकर्ता अति आत्म विश्वास छोड़कर गांव-गांव अभियान चलाएं। पार्टी की नीतियों का प्रचार करने के साथ ग्रामीणों की आवश्यकताओं को भी समझना होगा। दूसरी ओर बसपाइयों का कहना है कि टिकटों के वितरण में सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले से पंचायत चुनाव में बढ़त हासिल की है। वही फार्मूला विधानसभा चुनाव में भी गढ़ में वापसी कराएगा।
विधान सभा सीटों की स्थिति
2007
कालपी- बसपा
माधौगढ़ - बसपा
उरई (सदर)- कांग्रेस
कोंच- बसपा
2012
कालपी - कांग्रेस
माधौगढ़ - बसपा
उरई (सदर) - सपा
2017
कालपी- भाजपा
माधौगढ़ - भाजपा
उरई (सदर)- भाजपा
जिला पंचायत सदस्य की 25 सीटों की स्थिति
बहुजन समाज पार्टी- 07
भारतीय जनता पार्टी- 06
समाजवादी पार्टी - 04
कांग्रेस- 01
अन्य व निर्दलीय- 07
विधान सभा सीटों की स्थिति
2007
कालपी- बसपा
माधौगढ़ - बसपा
उरई (सदर)- कांग्रेस
कोंच- बसपा
2012
कालपी - कांग्रेस
माधौगढ़ - बसपा
उरई (सदर) - सपा
2017
कालपी- भाजपा
माधौगढ़ - भाजपा
उरई (सदर)- भाजपा
जिला पंचायत सदस्य की 25 सीटों की स्थिति
बहुजन समाज पार्टी- 07
भारतीय जनता पार्टी- 06
समाजवादी पार्टी - 04
कांग्रेस- 01
अन्य व निर्दलीय- 07
पंचायत चुनाव लोकल का चुनाव होता है, फिर इस बार पार्टी के कई कार्यकर्ता भी चुनाव लड़ रहे थे। उस पर बड़े नेता भी कोविड से घिरे रहे। इस कारण सीटों की गिनती कुछ कम रही लेकिन विधानसभा में ऐसा कुछ भी नहीं होगा। भाजपा ही न सिर्फ तीनों सीटें जीतेगी बल्कि प्रदेश में सरकार भी बनाएगी। - जिलाध्यक्ष भाजपा, रामेंद्र सिंह
पंचायत चुनाव परिणामों से कार्यकर्ता उत्साहित हैं। पार्टी का प्रयास था कि पंचायत चुनाव पूर्ण बहुमत से जीता जाए, जिसमें कुछ कमी रह गई लेकिन आने वाले विधान सभा चुनाव में यह तय है कि बहुजन समाज पार्टी जनपद की तीनों सीटों पर फिर से अपना कब्जा जमाएगी। इसके लिए अभी से तैयारियां भी शुरू कर दी गई है। - जिलाध्यक्ष बसपा, संजय गौतम
सपा ने पंचायत चुनाव में 4 तो अपनी सीटें जीती हैं और जिन दो सीटों को हाईकमान के निर्देश पर छोड़ा गया था, वे भी दोनों सपा की मानी जाए, इसके अलावा एक अन्य निर्दलीय भी सपा का ही नेता है। जिससे सपा की जीती सीटों की संख्या 7 मानी जाए। लिहाजा पंचायत चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में पार्टी नंबर वन पर रहेगी। - जिलाध्यक्ष सपा, नवाब सिंह
पंचायत चुनाव में बुंदेलखंड के भीतर झांसी के बाद दूसरी सीट जनपद जालौन में ही जीती गई है। वह भी तब, कोविड संक्रमण चरम पर रहा, पार्टी के कई दिग्गज नेता संक्रमण के चलते प्रचार में नहीं शामिल हो सके। रही बात विधानसभा की तो पूरे प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति सुधरी है, जिले की तीन सीटों में दो तो पार्टी के हिस्से में आएंगी ही। - जिलाध्यक्ष कांग्रेस, राजीव नारायण मिश्रा
पंचायत चुनाव परिणामों से कार्यकर्ता उत्साहित हैं। पार्टी का प्रयास था कि पंचायत चुनाव पूर्ण बहुमत से जीता जाए, जिसमें कुछ कमी रह गई लेकिन आने वाले विधान सभा चुनाव में यह तय है कि बहुजन समाज पार्टी जनपद की तीनों सीटों पर फिर से अपना कब्जा जमाएगी। इसके लिए अभी से तैयारियां भी शुरू कर दी गई है। - जिलाध्यक्ष बसपा, संजय गौतम
सपा ने पंचायत चुनाव में 4 तो अपनी सीटें जीती हैं और जिन दो सीटों को हाईकमान के निर्देश पर छोड़ा गया था, वे भी दोनों सपा की मानी जाए, इसके अलावा एक अन्य निर्दलीय भी सपा का ही नेता है। जिससे सपा की जीती सीटों की संख्या 7 मानी जाए। लिहाजा पंचायत चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में पार्टी नंबर वन पर रहेगी। - जिलाध्यक्ष सपा, नवाब सिंह
पंचायत चुनाव में बुंदेलखंड के भीतर झांसी के बाद दूसरी सीट जनपद जालौन में ही जीती गई है। वह भी तब, कोविड संक्रमण चरम पर रहा, पार्टी के कई दिग्गज नेता संक्रमण के चलते प्रचार में नहीं शामिल हो सके। रही बात विधानसभा की तो पूरे प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति सुधरी है, जिले की तीन सीटों में दो तो पार्टी के हिस्से में आएंगी ही। - जिलाध्यक्ष कांग्रेस, राजीव नारायण मिश्रा