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बिना जानकारी दिए लगाए जाते इंजेक्शन
ब्यूरो अमर उजाला, जालौन
Updated Wed, 04 Nov 2015 12:16 AM IST
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नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम) के तहत चलाई जा रही योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने आई केंद्र सरकार की जांच टीम को जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का अंबार मिला। तमाम प्रयासों के बावजूद स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी कमियां छुपा नहीं पाए।
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इस दौरान एक महिला अपनी पीड़ा बताते वक्त टीम के सामने फफक-फफक कर रो पड़ी। महिला ने स्टाफ नर्स पर दुर्व्यवहार और सुविधाएं न मिलने का आरोप लगाया। टीम को अस्पताल में गंदगी व इलाज के दौरान लापरवाही मिली।
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एनआरएचएम के कार्यों की जांच को केंद्र सरकार की सात सदस्यीय जांच टीम सोमवार देर शाम शहर आई। टीम के आने से कई दिनों पहले से विभागीय अधिकारियों ने अव्यवस्थाएं दूर करने के प्रयास शुरू कर दिए थे।
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मंगलवार सुबह 11 बजे जांच टीम जब जिला अस्पताल पहुंची तो यहां भारी अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। सबसे पहले टीम ने इमरजेंसी का निरीक्षण किया। तत्पश्चात ओपीडी पहुंची। प्रत्येक डॉक्टर के कमरे में जाकर निरीक्षण किया।
इस दौरान देखने को मिला कि मरीजों को बिना जानकारी दिए इंजेक्शन लगाए जा रहे थे। मरीजों को यह नहीं बताया गया कि जो इंजेक्शन उन्हें लगाए जा रहे हैं वो कौन से हैं और इंजेक्शन लगाना क्यों जरूरी है।
इस पर टीम ने संबंधित कर्मचारी को फटकार लगाई। बाद में जब दवा वितरण कक्ष का निरीक्षण किया तो कमरे में भारी मात्रा में जमा धूल मिली। टीम ने साफ-सफाई के निर्देश दिए। जांच टीम ने पैथोलॉजी व ब्लड बैंक निरीक्षण के दौरान गंदगी व पानी फैले होने पर चिंता जताई।
बजरिया निवासी साहिदा जांच टीम के सामने अपनी पीड़ा बताते हुुए फफक-फफक कर रो पड़ी। साहिदा ने बताया कि उनकी दो बेटियों का इलाज अस्पताल में 20 दिन से चल रहा है। स्टाफ नर्स दुर्व्यवहार करती हैं और लापरवाही से इंजेक्शन लगाती हैं। विरोध करने पर झगड़े पर उतारू रहती हैं।
इस पर टीम ने नाराजगी जताई और संबंधित स्टाफ को नसीहत देते हुए कहा कि मरीजों व तीमारदारों के साथ शालीनता से पेश आएं और अच्छा व्यवहार रखें।
जांच टीम के सदस्य हेड सीआरएमटी डॉ. बसब गुप्ता, नीति आयोग के डायरेक्टर जितेंद्र सिंह, डॉ. डीडी पांडेय, डॉ. परमिंदर गौतम, डॉ. अजीत कुमार सुडके, प्रीती चौधरी, आशुतोष झा के अलावा प्रभारी सीएमओ डॉ. आशाराम, एसीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश, सीएमएस डॉ. बीबी आर्या आदि मौजूद रहे।
महिला अस्पताल व एट स्वास्थ्य केंद्र का किया निरीक्षण - केंद्रीय टीम ने जिला अस्पताल के बाद महिला अस्पताल का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने टीकाकरण व प्रसूताओं से संबंधी जानकारी ली।
महिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान उन्हें व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त मिलीं। छोटी-छोटी कमियों पर टीम ने दूर करने के निर्देश दिए। बाद में टीम ने उमरारखेरा व एट स्थित स्वास्थ्य केंद्र का भी निरीक्षण किया।
पैथोलॉजी में कर्मचारियों के एजेंटों ने संभाला मोर्चा - जांच टीम जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में पहुंची तो यहां पर पहले से ही पैथोलॉजी के कर्मचारियों के एजेंट मौजूद थे।
टीम ने यहां पर जांच संबंधी जानकारियां लीं तो एजेंटों ने मोर्चा संभाल लिया और पैथोलॉजी में व्याप्त कमियों को छुपाते हुए सब कुछ ठीक होने का दावा कर दिया। यह देखकर स्वास्थ्य महकमे के ही स्थानीय अधिकारी ने इस एजेंट को फटकार लगा दी। डांट लगते ही एजेंट मौके से गायब हो गया।
दवा विक्रेताओं के एजेंट रहे नदारद - निरीक्षण के दौरान दवा विक्रेताओं के एजेंट नदारद रहे। केवल एक एजेंट को छोड़कर कोई अस्पताल में नजर नहीं आए।
गौरतलब है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में अधिकांश डॉक्टरों के कमरे में दवा विक्रेताओं के एजेंट डॉक्टरों के बगल में बैठे रहते हैं। यही एजेंट मरीजों को बाहर की दवाएं लिखाने को काम करते हैं। मंगलवार को यह एजेंट अस्पताल में नहीं देखे गए।
क्षेत्रीय केंद्रों पर मची रही हलचल- जालौन। जिले में एनएचएम टीम के दौरे को लेकर नगर व क्षेत्रीय स्वास्थ्य केंद्रों पर अफरातफरी का माहौल रहा। सभी केंद्र प्रभारी टीम के निरीक्षण को लेकर अपने-अपने केंद्रों की साफ सफाई व्यवस्था व अन्य दस्तावेज ठीक करने में जुटे।
तीन दिन पूर्व से जिला मुख्यालय पर आई केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीम के निरीक्षण से नगर व ग्रामीण क्षेत्रों के केंद्रों पर हलचल मची हुई है। सभी केंद्र प्रभारी अपने केंद्रों की व्यवस्थाएं चाक चौबंद करने में जुटे रहे।
देवनगर चौराहा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी निरीक्षण किया जाना है। इसे लेकर अस्पताल में साफ सफाई व्यवस्था, चिकित्सीय उपकरणों आदि को दुरुस्त किया गया।