उरई। श्रावणी उपाकर्म एवं संस्कृत दिवस का आयोजन रविवार को स्थानीय आदर्श संस्कृत महाविद्यालय परिसर में किया गया। डॉ पूर्णेंद्र मिश्रा के आचार्यत्व में आयोजित सुबह 6 बजे से ही पूजा अर्चना प्रारंभ हो गई। सभी बटुकों को गायत्री मंत्री से अभिनंदित नए यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण कराए गए। इसके बाद रक्षासूत्र बांधा गया। प्राचार्य डॉ जगप्रसाद चतुर्वेदी ने कहा कि वैदिक और पौराणिक रीतियों के अनुसार भारतीय संस्कृति में श्रावणी उपाकर्म पर्व सर्वोपरि है। दैनिक जीवन में जाने अनजाने में किए गए पापों के दमन के लिए उपाकर्म किया जाता है। उपाकर्म के अंतर्गत पंचगव्य न जरूर करना चाहिए। गायों के अपयव से निर्मित पंचगव्य के प्राशन से शरीर की अस्थियों में व्याप्त सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
इस दौरान 16 से 22 अगस्त तक चले संस्कृत समाप्त का समापन समारोह भी हुआ। जिसमें संस्कृत गीत, संभाषण, श्लोक, कंठ पाठ स्पर्धा, भगवत गीता पाठ आदि का आयोजन किया गया। इसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। संस्कृत गीत प्रतियोगिता में आरुष पाराशर को पहला, रामजी शुक्ला को दूसरा व धर्मज्ञ तिवारी को तीसरा स्थान मिला। संस्कृत संभाषण प्रतियोगिता में देवस्य चतुर्वेदी को पहला, शशांक द्विवेदी को दूसरा व कन्हैया पांडेय को तीसरा स्थान मिला। विजेताओं को कालेज के प्रबंधक व पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी, अवनीश चंद्र द्विवेदी, राजेंद्र रावत, कृष्णकांत रावत, डॉ शालिगराम शास्त्री, रमाकांत, आशुतोष चतुर्वेदी, प्रभात, रामराजा आदि मौजूद रहे।