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Jalaun News: नकली खाद के कारोबार ने निखिल को बनाया करोड़पति

Tue, 03 Dec 2024 01:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन Updated Tue, 03 Dec 2024 01:27 AM IST
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Fake fertilizer business made Nikhil a millionaire
कोंच। जिले के छोटे कस्बे से यूपी और एमपी तक के शहरों में नकली खाद का नेटवर्क फैलाने वाला निखिल अग्रवाल अभी भी फरार है। उसका एक सहयोगी भी फरार चल रहा है। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें लगी हैं। उसने एक छोटी सी बीज की दुकान से अपने व्यापार की शुरूआत की। लेकिन नकली खाद बनाकर करोड़पति हो गया है। लोग उसे क्षेत्र का बड़ा व्यापारी मानते हैं।
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नकली खाद के कारोबारी निखिल ने नंदीगांव कस्बे के बाजार में निखिल खाद बीज भंडार के नाम से छोटी सी दुकान खोली थी। वह उसी में खाद बीज बेचता था। लेकिन वह नकली खाद बनाया सीख गया और उसने नकली खाद की एक दो बोरी किसानों को बेचना शुरू कीं। धीरे-धीरे बढ़ते कारोबार से निखिल के दो-तीन गोदाम हो गए और कारोबार बढ़ता गया। निखिल ने पहले किसानों को खाद सप्लाई की, फिर बढ़ती मांग के चलते निखिल खाद के व्यापारियों से जुड़ गया।
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नदीगांव से लोडरों में लदवाकर खाद बाहर भेजने लगा लेकिन पिछली कुछ सालों में ही निखिल के इस कारोबार ने रफ्तार पकड़ी और कारोबार बढ़ता गया। जो आज यूपी से लेकर एमपी तक के बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल चुका था। निखिल की रोजाना बढ़ती सप्लाई ने उसे लालची बना दिया और वह नकली खाद का व्यापार करने लगा। शुरुआती दौर में निखिल के दुकान पर छोटी लोडर नकली खाद की बोरियां लेकर आती थीं। लेकिन, फैलते गए इस नेटर्वक से खाद की खपत बढ़ी तो गोदामों में बड़े-बड़े ट्रक उतरने लगे थे। बताया जा रहा है कि इस समय हर जगह बढ़ती खाद की किल्लत से एक दिन छोड़ कर एक दिन नकली खाद के ट्रक आ रहे थे, जो रात के अधेरे में आराम से उतर दिए जाते थे। छापे के बाद से ही वह फरार है। वहीं, उसका सहयोगी अजय राजपूत भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है।
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निखिल की सीडीआर खोल सकती है कई राज
नकली खाद का बड़ा नेटर्वक फैलाने वाले मुख्य आरोपी निखिल अग्रवाल के मोबाइल नंबर की सीडीआर इस नेटवर्क के कई राज उगल सकती है। सीडीआर बताएगी कि निखिल कहां- कहां और किस-किस को नकली खाद की बोरियां सप्लाई करता था। नकली खाद बनाने वाला कच्चा माल कहां से आता था। यह भी पता लगाया जा सकता है कि इस बड़े नेटवर्क में और किस-किस का संरक्षण निखिल को प्राप्त था।


कानपुर से छपकर आती थी डीएपी की नकली बोरियां
कोंच। नदीगांव में बड़े पैमाने पर नकली खाद को डीएपी लगीं रैपरों में भर कर दूर-दूर तक सप्लाई की जा रही थी। वह डीएपी की नकली बोरियां कानपुर से छपकर आती थी। छापा मारने से दो तीन दिन पहले ही लगभग तीन हजार बोरियां छपकर आई थीं।


नकली खाद के लिए 50 रुपये में खरीदते थे असली बोरी
कोंच। नकली खाद के कारोबार से जुड़े लोग व निखिल के नौकर गांव गांव जाकर किसानों से असली डीएपी की खाली बोरियां खरीदने का काम भी करते थे। यह लोग ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों से 50- 50 रुपये में असली डीएपी खाद की खाली बोरियां खरीद कर गोदामों तक पहुंचाने में लगे रहते थे। जिससें बोरी देख कर किसी को शक भी न हो।
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