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गर्मी संग गहराने लगी बिजली-पानी की समस्या
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इकौना में बैलगाडी में पानी ले जाता ग्रामीण
- फोटो : ORAI
उरई। गर्मी की दस्तक के साथ ही गांव व कस्बों में बिजली के साथ साथ पीने के पानी की किल्लत शुरू हो गई है। कस्बों और गांवों में जर्जर बिजली के तार और खराब पड़े हैंडपंप व लीकेज पाइप लाइन से लोगों को दिक्कतें हैं। जिम्मेदार अफसरों से इस संबंध में बातचीत करो तो वे संसाधन का रोना रोते हैं। एक रिपोर्ट-
हर साल पानी का संकट, नहीं लेते सुध
कदौरा। ब्लाक क्षेत्र में हर साल लोगों को पानी के संकट से जूझना पड़ता है। स्थिति यह है कि क्षेत्र में हर साल ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए गांवों में टैंकर मंगाने पड़ते हैं। ब्लाक के इकौना, खुट मिली, जरिया, उकरुवा, बबीना, हांसा, आदि गांवों में अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ गांव तो ऐसे है जहां अभी से लोग बैल गाडियों पर दूर से पीने के पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल अधिकारी गर्मी के दिनों में गांवों में आकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और गर्मी खत्म होते ही इस समस्या पर ध्यान नहीं देते।
गर्मी शुरू होती ही बिजली कटौती चालू
सरावन। गर्मी की दस्तक के साथ कस्बे के बिजली सब स्टेशन से जुड़े तीन दर्जन से अधिक गांवों में अंधाधुंध बिजली कटौती शुरू हो गई है। कहने को तो ग्रामीण क्षेत्र में 20 घंटे की आपूर्ति है, लेकिन धरातल पर स्थिति से आठ से 10 घंटे की आपूर्ति ग्रामीणों को मिल रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि कटौती का कोई रोस्टर नहीं है। जब चाहे तब बिजली विभाग कटौती कर देता है। वहीं कस्बे में पुराने जर्जर बिजली तार खपच्ची के सहारे बंधे हैं। जो आए दिन कई बार टूटते है। शिकायतों के बाद भी अब तक बिजली विजली विभाग ने नहीं बदले, जिससे ग्रामीणों को आए दिन बिजली संकट से जूझना पड़ता है।
आटा में पानी संकट से जूझ रहे लोग
आटा। कस्बे में खराब पड़े हैंडपंपों के कारण पानी की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि कहने को तो कस्बे में दो नलकूप लगे है लेकिन वे भी आए दिन बिजली दोष के कारण खराब पड़े रहते हैं। ग्रामीण विनोद, महेंद्र अमित, अभिषेक आदि का कहना है कि अभी यह स्थिति है कि लोगों को हैंडपंप के लिए लाइन लगाी पड़ रही है।
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हर साल पानी का संकट, नहीं लेते सुध
कदौरा। ब्लाक क्षेत्र में हर साल लोगों को पानी के संकट से जूझना पड़ता है। स्थिति यह है कि क्षेत्र में हर साल ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए गांवों में टैंकर मंगाने पड़ते हैं। ब्लाक के इकौना, खुट मिली, जरिया, उकरुवा, बबीना, हांसा, आदि गांवों में अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ गांव तो ऐसे है जहां अभी से लोग बैल गाडियों पर दूर से पीने के पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल अधिकारी गर्मी के दिनों में गांवों में आकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और गर्मी खत्म होते ही इस समस्या पर ध्यान नहीं देते।
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गर्मी शुरू होती ही बिजली कटौती चालू
सरावन। गर्मी की दस्तक के साथ कस्बे के बिजली सब स्टेशन से जुड़े तीन दर्जन से अधिक गांवों में अंधाधुंध बिजली कटौती शुरू हो गई है। कहने को तो ग्रामीण क्षेत्र में 20 घंटे की आपूर्ति है, लेकिन धरातल पर स्थिति से आठ से 10 घंटे की आपूर्ति ग्रामीणों को मिल रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि कटौती का कोई रोस्टर नहीं है। जब चाहे तब बिजली विभाग कटौती कर देता है। वहीं कस्बे में पुराने जर्जर बिजली तार खपच्ची के सहारे बंधे हैं। जो आए दिन कई बार टूटते है। शिकायतों के बाद भी अब तक बिजली विजली विभाग ने नहीं बदले, जिससे ग्रामीणों को आए दिन बिजली संकट से जूझना पड़ता है।
आटा में पानी संकट से जूझ रहे लोग
आटा। कस्बे में खराब पड़े हैंडपंपों के कारण पानी की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि कहने को तो कस्बे में दो नलकूप लगे है लेकिन वे भी आए दिन बिजली दोष के कारण खराब पड़े रहते हैं। ग्रामीण विनोद, महेंद्र अमित, अभिषेक आदि का कहना है कि अभी यह स्थिति है कि लोगों को हैंडपंप के लिए लाइन लगाी पड़ रही है।