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सप्लाई का पानी छोड़, हैंडपंप के सहारे बाशिंदे
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श्री नारायण दीक्षित
- फोटो : ORAI
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कोंच। समूचे कोंच में पिछले काफी समय से प्रदूषित जलापूर्ति की जा रही है। जिसका कारण जगह जगह से लीकेज पाइप लाइनें हैं। कहीं कहीं पर लीकेज पाइप लाइनें सालों पुरानी क्षतिग्रस्त सीवर लाइनों से मिली हुई है, जिससे घरों में प्रदूषित पेयजल आपूर्ति हो रही है। इलाकाई लोगों का कहना है कि कभी भी कस्बे में संक्रामक बीमारियां पांव पसार सकती हैं। कई बार अधिकारियों से इस संदर्भ में शिकायत भी की गई पर हर बार बजट का रोना रोकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
कोंच की पांच दशक पुरानी पाइप लाइनें अपनी मियाद पूरी कर चुकी हैं। विभाग के अधिकारी भी दबी जुबान से मानते हैं कि नई लाइनें बिछाई जानी चाहिए। यही हाल सीवर लाइनों का भी है, आबादी तो तीन गुना बढ़ गई है लेकिन लाइनें वहीं सालों पुरानी होने से कई जगह से डैमेज सी हो गई हैं। सीवर के चैंबर भी ओवर फ्लो हो रहे हैं।
नगर के जवाहर नगर, तिलक नगर, सुभाष नगर, मालवीय नगर, गांधी नगर, पटेल नगर, गोखले नगर, भगतसिंह नगर, प्रताप नगर, जयप्रकाश नगर आदि इलाकों में लोगों ने जल संस्थान की जलापूर्ति का पानी पीना पूरी तरह से बंद कर दिया है। लिहाजा वे अब पीने का पानी लेने के लिए हैंडपंपों के सामने खड़े नजर आते हैं। जिन इलाकों में हैंडपंपों की संख्या कम हैं, वहां पानी के लिए मारामारी मची रहती है।
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पूर्व सभासद राघवेंद्र तिवारी, विमल याज्ञिक, धर्मेन्द्र राठौर, सौरभ गोलू, जयप्रकाश, घनश्याम आदि का कहना है कि समाधान दिवस पर शिकायत की जा चुकी है पर अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं। जेई जल संस्थान प्रशांत त्रिपाठी कहते हैं कि जहां से लीकेज आदि की शिकायतें आती हैं वहां लीकेज दुरुस्त कराने का प्रयास किया जाता है। हालांकि बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता है, इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
अक्सर बच्चे बीमार हो जाते हैं
कोंच। मोहल्ला गांधीनगर के निवासी राधेश्याम अहिरवार का कहना है कि प्रदूषित पानी की समस्या महीनों पुरानी हो गई है। अक्सर घरों में प्रदूषित पानी पीने के कारण बच्चे बीमार हो जाते हैं।
दोनों लाइनों को बदला जाए
कोंच। मोहल्ला सुभाषनगर में रहने वाले श्रीनारायण दीक्षित के मुताबिक, अधिकारियों की अनदेखी कभी भी लोगों पर भारी पड़ सकती है। इसके लिए जरूरी है कि योजना बनाकर जर्जर सीवर और पाइप लाइन को बदला जाए।
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कोंच की पांच दशक पुरानी पाइप लाइनें अपनी मियाद पूरी कर चुकी हैं। विभाग के अधिकारी भी दबी जुबान से मानते हैं कि नई लाइनें बिछाई जानी चाहिए। यही हाल सीवर लाइनों का भी है, आबादी तो तीन गुना बढ़ गई है लेकिन लाइनें वहीं सालों पुरानी होने से कई जगह से डैमेज सी हो गई हैं। सीवर के चैंबर भी ओवर फ्लो हो रहे हैं।
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नगर के जवाहर नगर, तिलक नगर, सुभाष नगर, मालवीय नगर, गांधी नगर, पटेल नगर, गोखले नगर, भगतसिंह नगर, प्रताप नगर, जयप्रकाश नगर आदि इलाकों में लोगों ने जल संस्थान की जलापूर्ति का पानी पीना पूरी तरह से बंद कर दिया है। लिहाजा वे अब पीने का पानी लेने के लिए हैंडपंपों के सामने खड़े नजर आते हैं। जिन इलाकों में हैंडपंपों की संख्या कम हैं, वहां पानी के लिए मारामारी मची रहती है।
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पूर्व सभासद राघवेंद्र तिवारी, विमल याज्ञिक, धर्मेन्द्र राठौर, सौरभ गोलू, जयप्रकाश, घनश्याम आदि का कहना है कि समाधान दिवस पर शिकायत की जा चुकी है पर अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं। जेई जल संस्थान प्रशांत त्रिपाठी कहते हैं कि जहां से लीकेज आदि की शिकायतें आती हैं वहां लीकेज दुरुस्त कराने का प्रयास किया जाता है। हालांकि बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता है, इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
अक्सर बच्चे बीमार हो जाते हैं
कोंच। मोहल्ला गांधीनगर के निवासी राधेश्याम अहिरवार का कहना है कि प्रदूषित पानी की समस्या महीनों पुरानी हो गई है। अक्सर घरों में प्रदूषित पानी पीने के कारण बच्चे बीमार हो जाते हैं।
दोनों लाइनों को बदला जाए
कोंच। मोहल्ला सुभाषनगर में रहने वाले श्रीनारायण दीक्षित के मुताबिक, अधिकारियों की अनदेखी कभी भी लोगों पर भारी पड़ सकती है। इसके लिए जरूरी है कि योजना बनाकर जर्जर सीवर और पाइप लाइन को बदला जाए।

प्रदूषित पानी दिखाते गांधीनगर के बाशिंदे- फोटो : ORAI

राधेश्याम अहिरवार- फोटो : ORAI