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संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाता है संवाद : डॉ. गौतम
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उरई। जन चेतना एवं सामाजिक सरोकारों की भाषा संगोष्ठी एवं संवाद विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें स्थानीय कवि कवियत्रियों ने बुंदेली भाषा का व्याख्यान करते हुए काव्य पाठ किया। वहीं संजीव त्यागी की पुस्तक अष्ट बलिदानी का विमोचन भी किया गया।
उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ व संवेदना साहित्य समिति उरई की ओर से शहर के मोहल्ला राजेंद्र नगर बैंक कॉलोनी स्थित सहज भवन सभागार में कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. शैलेश गौतम ने कहा कि निज भाषा में संवाद संस्कृति एवं परंपराओं को जीवंत बनाता है। वहीं उन्होंने बुंदेली भाषा को परंपरागत साहित्य का प्रेरणास्पद भाषा बताया। साहित्यकार मानक मुकेश ने कहा कि बुंदेली भाषा साहित्य की समृद्ध भाषाओं में रही है।
पुष्पेंद्र पुष्प ने बुंदेली लोक कवि ईश्वरी की रचनाओं का व्याख्यान किया। इसके बाद मंच का संचालन कर रहीं कवियत्री डॉ. माया सिंह माया ने सरस्वती वंदना की बुंदेली कवि सुरेश चंद्र त्रिपाठी, विमला तिवारी, दिव्य यादव, सिद्धार्थ त्रिपाठी, अमृता सक्सेना, महेश प्रजापति, कमलेश शर्मा, भोला प्रसाद, ज्ञान सिंह, प्रगति मिश्रा ने काव्य पाठ किया। अतिथियों ने संजीव त्यागी की पुस्तक अष्ट बलिदानी का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार यज्ञ दत्त त्रिपाठी ने की। इस दौरान पूर्व एक्साइज कमिश्नर शंभू दयाल, जगरूप सिंह, संजय शर्मा आदि साहित्यकार मौजूद रहे।
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उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ व संवेदना साहित्य समिति उरई की ओर से शहर के मोहल्ला राजेंद्र नगर बैंक कॉलोनी स्थित सहज भवन सभागार में कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. शैलेश गौतम ने कहा कि निज भाषा में संवाद संस्कृति एवं परंपराओं को जीवंत बनाता है। वहीं उन्होंने बुंदेली भाषा को परंपरागत साहित्य का प्रेरणास्पद भाषा बताया। साहित्यकार मानक मुकेश ने कहा कि बुंदेली भाषा साहित्य की समृद्ध भाषाओं में रही है।
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पुष्पेंद्र पुष्प ने बुंदेली लोक कवि ईश्वरी की रचनाओं का व्याख्यान किया। इसके बाद मंच का संचालन कर रहीं कवियत्री डॉ. माया सिंह माया ने सरस्वती वंदना की बुंदेली कवि सुरेश चंद्र त्रिपाठी, विमला तिवारी, दिव्य यादव, सिद्धार्थ त्रिपाठी, अमृता सक्सेना, महेश प्रजापति, कमलेश शर्मा, भोला प्रसाद, ज्ञान सिंह, प्रगति मिश्रा ने काव्य पाठ किया। अतिथियों ने संजीव त्यागी की पुस्तक अष्ट बलिदानी का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार यज्ञ दत्त त्रिपाठी ने की। इस दौरान पूर्व एक्साइज कमिश्नर शंभू दयाल, जगरूप सिंह, संजय शर्मा आदि साहित्यकार मौजूद रहे।
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