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धनतेरस आज: बाजार में रौनक, 60 करोड़ के कारोबार की उम्मीद

Tue, 29 Oct 2024 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन Updated Tue, 29 Oct 2024 12:23 AM IST
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Dhanteras today: Market busy, expected business of Rs 60 crore
उरई। धनतेरस को लेकर बाजार में रंग चढ़ा हुआ है। दुकानदार इस बार अच्छे व्यापार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसमें सबसे ज्यादा खरीदारी बाइक, ज्वैलरी और बर्तन की होने वाली है। स्थानीय दुकानदारों को भी काफी उम्मीद आज धनतेरस से है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल संदीप बंसल गुट के जिलाध्यक्ष संतोष गुप्ता ने बताया कि धनतेरस से लेकर दीपावली पर करीब साठ करोड़ के व्यापार का अनुमान है।
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अगर आप गांव या अन्य कहीं से शहर में खरीदारी करने आ रहे हैं तो घंटाघर आएं। इस जगह से चारों तरफ का बाजार नजर आएगा। वहीं, बलदाऊ चौक, स्टेशन रोड, माहिल तालाब, जिला परिषद, कालपी स्टैंड में भी दुकानें सज गईं हैं। इलेक्ट्राॅनिक की दुकानों पर ऑटोमैटिक वाशिंग मशीन, फ्रिज, एलसीडी, फर्नीचर में दीवान, पलंग, सोफे, सराफा दुकानों में गणेश लक्ष्मी के सिक्के, आभूषण और मूर्ति, घंटी, आरती की थाली, पूजा का सामान, पीतल का लोटा, बोतल, कढ़ाई, इलेक्ट्रॉनिक्स दीपक बाजार की रौनक बढ़ा रहे हैं। घर को सजाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक झूमर भी मिल रहे हैं।
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बाइक, कार और ज्वैलरी की होगी अधिक खरीद

हीरो एजेंसी के संचालक शरद महेश्वरी ने बताया कि धनतेरस को लेकर उनकी एजेंसी पर करीब 200 की बुकिंग है। अगर जिले की सभी कंपनी की बात करें तो करीब एक हजार गाड़ी की खरीदारी धनतेरस पर होगी। बाइक से 15 से 17 करोड़ का कारोबार होने वाला है। फर्नीचर व इलेक्ट्रॉनिक दुकानदार नितिन सिंह ने बताया कि जिले भर में 100 के करीब दुकानें हैं। इनमें दस से 12 करोड़ का कारोबार होने की उम्मीद है। वहीं, ट्रैक्टर एजेंसी संचालक राकेश अग्रवाल ने बताया कि इस बार 15 ट्रैक्टर बिकने की उम्मीद है। पांच करोड़ तक का कारोबार हो सकता है। बर्तन दुकानदार दीपक गुप्ता ने बताया कि जिले भर में अनुमानित एक से डेढ़ करोड़ का कारोबार होगा। कार और आभूषणों का कारोबार करीब दस करोड़ तक हो सकता है। वहीं छोटे से लेकर बड़े दुकानदारों का कारोबार करीब 60 करोड़ होगा।
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घंटाघर पर मिलेंगे दीप और गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति

शहर के घंटाघर में दीपों की आधा दर्जन दुकानें सजाई गई हैं। संदीप प्रजापति ने बताया कि इस बार दीपक स्टैंड भी बाजार में आए हैं। इसमें सात दीपक एक साथ रखे जा सकेंगे, इसकी कीमत 100 रुपये हैं। सादे दीपक 20 रुपये के 25 मिल रहे हैं। कई प्रकार के नए दीप आए हैं। इनकी कीमत 10 रुपये से लेकर 50 रुपये है। भगवान की मूर्तियां भी कोलकाता से आई हैं। इसकी कीमत 100 रुपये से लेकर पांच हजार तक है। रीना गुप्ता ने बताया कि गणेश-लक्ष्मी की सजी मूर्तियों की कीमत 100 रुपये से दो हजार के बीच है। इस बार कोलकाता, कालपी, कानपुर की मूर्ति कई खासियत समेटे हैं। भगवान की छोटी मूर्ति की कीमत बीस रुपये से लेकर 1100 रुपये तक की है। इसमें कई प्रकार की मूर्ति हैं। कुछ मूर्ति कवर्ड के अंदर हैं। जो रोशनी करती हैं।
भगवान के वस्त्र बेचने वाले शिवम बताते हैं। बाजार में पिछली बार से इस बार खूब भीड़ देखने को मिल रही है। वस्त्र भी कई नए आए हैं। जिससे भगवान जी अच्छे दिखेंगे। जिसमें पगड़ी बीस रुपये से लेकर 50 रुपये तक की है। पोशाक 100 रुपये से लेकर एक हजार तक की है। माला दस रुपये से 200 रुपये तक की है। चुनरी दस से 100 रुपये तक की है। कुबेर यंत्र 50 रुपये से 500 तक का है। श्रीयंत्र दस से 50 तक का है। कुछ स्टीकर आए हैं, जिसमें यंत्र बने हैं। जिनकी कीमत बीस रुपये से लेकर 200 रुपये तक की है।

मिठाई, रंगोली, पटाखे भी खूब बिके

मिठाई नमकीन की दुकान लगाए सागर बताते हैं कि इस बार स्वाद न बिगड़े इसलिए अच्छे पकवान बनाए गए हैं। नमकीन 250 से लेकर 500 रुपये, बालूशाही 200 रुपये से 300 रुपये, इमरती 250 रुपये से 300 रुपये, रंगोली बेचने वाले दुकानदार इरफान ने बताया कि छलनी बीस रुपये से लेकर 100 रुपये तक है। रंगोली में भरे जाने वाले रंग दस रुपये के 100 ग्राम हैं। खील 120 रुपये किलो, लइया 80 रुपये किलो, इलाइची दाना 40 रुपये से लेकर 60 रुपये तक के पैकेट में बिक रहे हैं।
बिजली से चलने वाले पटाखे

दिवाली पर नए कपड़े पहनने की होड़ छोटे से लेकर बड़े में देखने को मिली रही है। महिलाओं, लड़कियों ने इस बार नए ब्रांड पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। सर्दी को लेकर भी खूब खरीदारी हो रही है। दुकानदार अमन कादरी ने बताया कि गर्म सूट 500 से लेकर तीन हजार तक बिक रहे हैं। जींस पेंट अधिक बिक रहे, जिनकी कीमत 500 रुपये से लेकर दो हजार तक बिक रही है। टॉप तीन सौ रुपये से लेकर एक हजार तक बिक रही है। नायरा सूट भी पंसद किए जा रहे हैं। वहीं झालर दुकानदार नवनीत ने बताया कि इस बार इलेक्ट्रॉनिक्स पटाखे आए हैं। जो झालर की तरह होते हैं। पटाखे की आवाज निकालते हैं। जिसकी कीमत 2500 रुपये है। झालर की कीमत सौ रुपये से लेकर 500 रुपये तक है।

टोंटी सहित तांबे का जग भी खूब किया जा रहा पसंद
स्वास्थ्य को लेकर तांबे का जग बाजार में काफी पसंद किया जा रहा है। घंटाघर के पास महालक्ष्मी पूजा भंडार पर इस बार तांबा का जग काफी पंसद किया जा रहा है। इसमें टोंटी भी लगी है, जो पांच लीटर का आ रहा है। इसकी क्षमता पांच लीटर है। वहीं पीतल के बर्तन और भगवान की मूर्ति भी काफी बिक रही है। आरती का सामान, बर्तन का सेट तीन से चार हजार में मिल रहा है।
छोटे दुकानदारों को बड़ी उम्मीद

दुकानदार रश्मि गुप्ता ने बताया कि पिछली साल धनतेरस से पहले ही बाजार में भीड़ उमड़ पड़ी थी, लेकिन इस बार बाजार में खरीदारी वाली भीड़ देखने को नहीं मिल रही है। धनतेरस पर उम्मीद है कि बाजार में भीड़ नजर आए।
दुकानदार रीना गुप्ता ने बताया कि भगवान की कपड़ों की मांग इस बार अधिक है। लेकिन भीड़ उस हिसाब से कम है। धनतेरस और दिवाली पर ज्यादा खरीद होती है। आज बाजार बढ़ने की उम्मीद है।



दिन भर करें खरीदारी, पूजा का मुहूर्त दोपहर 12 से एक, कलश पूजन साढ़े छह से आठ बजे तक
उरई। दिवाली के दो दिन पहले से कार्तिक माह की त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि की पूजा से पांच-दिवसीय दीपावली पर्व का शुभारंभ हो जाता है। धन त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन से आरोग्य प्रदान करने वाले देवता अमृत कलश के साथ भगवान धन्वंतरि और अमावस्या को महालक्ष्मी जी का अवतरण माना जाता है। इसीलिए दीपावली के दो दिन पूर्व धनतेरस को भगवान धन्वंतरि का जन्मदिन मनाया जाता है। इसी दिन भगवान धन्वंतरि द्वारा आयुर्वेद का प्रादुर्भाव भी माना जाता है। इसी को धन्वंतरि जयंती, धन त्रयोदशी और धनतेरस भी कहते हैं। धन त्रयोदशी ( धनतेरस ) को मुख्य रूप से धन्वंतरि भगवान की पूजा की जाती है। भगवान से परिवार के लिए स्वास्थ्यता और आरोग्यता की प्रार्थना की जाती है। शाम को घर के पूजा स्थल पर गणेश-लक्ष्मी कुबेर का ध्यान करके घी के दीपक जलाए जाते हैं। धनतेरस को पीतल और पीले रंग की धातु , बरतन, सूखी धनिया गृहस्थी का सामान आदि खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। आरोग्य के देवता धन्वन्तरि भगवान की पूजा का शुभ मुहूर्त 29 अक्तूबर को दोपहर 12 बजे से एक बजे तक है। शाम को भगवान के सामने दीप जलाने का मुहूर्त गोधूलि बेला में वृष लग्न में शाम 6:30 बजे से लेकर आठ बजे तक है।
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