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Jalaun News: मजदूरी बढ़ाने की मांग, दो दिन की हड़ताल पर भट्ठा श्रमिक
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उरई। ईट भट्ठा मजदूरों ने मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर दो दिन की हड़ताल का एलान किया है। श्रमिक बुंदेलखंड ईंटा श्रमिक यूनियन के बैनर तले यूनियन के पदाधिकारियों ने डीएम और एसपी को अलग-अलग ज्ञापन देकर नई दर लागू करने की मांग की है।
बुंदेलखंड ईंटा लेबर यूनियन के जनसंपर्क मंत्री अजय कुमार प्रजापति ने बताया कि उरई के आसपास करीब साढ़े तीन सौ ईंट, बालू, सीमेंट की दुकानें संचालित हो रही है। इनमें करीब तीन हजार श्रमिक काम करते हैं। यूनियन से सौ से ज्यादा श्रमिक जुड़े हैं। संगठन की मांग है कि पांच साल से मजदूरी नहीं बढ़ाई गई है जबकि महंगाई में लगातार इजाफा हो रहा है। उन्होंने मजदूरी दर को नए सिरे से निर्धारित करने की मांग की है। मांगों को लेकर संगठन ने 13 और 14 अप्रैल को हड़ताल का एलान किया है। इस दौरान चंद्रशेखर, नरेंद्र बाबू, ज्ञानसिंह, दीपप्रकाश, बाबूलाला, सुरेंद्र, गयाप्रसाद आदि मौजूद रहे।
संयुक्त मंत्री चंद्रशेखर ने बताया कि ईटा उतारने की दर इस समय 150 रुपये प्रति हजार ईंट चल रही है। इसे बढ़ाकर 200 रुपये किया जाए। यदि गाड़ी बाहर जाती है तो ढाई सौ रुपये भुगतान किया जाए।
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अजय प्रजापति ने बताया कि जहां भी माल उतरने जाए, वहां श्रमिक के आने-जाने का किराया किसान या व्यापारी दें। साथ ही गाड़ी खाली होने के बाद उसकी सफाई का भी पचास रुपये भुगतान किया जाए।
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बुंदेलखंड ईंटा लेबर यूनियन के जनसंपर्क मंत्री अजय कुमार प्रजापति ने बताया कि उरई के आसपास करीब साढ़े तीन सौ ईंट, बालू, सीमेंट की दुकानें संचालित हो रही है। इनमें करीब तीन हजार श्रमिक काम करते हैं। यूनियन से सौ से ज्यादा श्रमिक जुड़े हैं। संगठन की मांग है कि पांच साल से मजदूरी नहीं बढ़ाई गई है जबकि महंगाई में लगातार इजाफा हो रहा है। उन्होंने मजदूरी दर को नए सिरे से निर्धारित करने की मांग की है। मांगों को लेकर संगठन ने 13 और 14 अप्रैल को हड़ताल का एलान किया है। इस दौरान चंद्रशेखर, नरेंद्र बाबू, ज्ञानसिंह, दीपप्रकाश, बाबूलाला, सुरेंद्र, गयाप्रसाद आदि मौजूद रहे।
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संयुक्त मंत्री चंद्रशेखर ने बताया कि ईटा उतारने की दर इस समय 150 रुपये प्रति हजार ईंट चल रही है। इसे बढ़ाकर 200 रुपये किया जाए। यदि गाड़ी बाहर जाती है तो ढाई सौ रुपये भुगतान किया जाए।
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अजय प्रजापति ने बताया कि जहां भी माल उतरने जाए, वहां श्रमिक के आने-जाने का किराया किसान या व्यापारी दें। साथ ही गाड़ी खाली होने के बाद उसकी सफाई का भी पचास रुपये भुगतान किया जाए।