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परलोक सिधारी दुलारी मनरेगा में करती रही मजदूरी
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कदौरा। विकास खंड कदौरा की ग्राम पंचायत जकसिया में मनरेगा योजना में फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक मृतक महिला को कार्य में दिखा कर 5712 रुपये का भुगतान भी करा लिया। इस मामले का खुलासा होने पर अब ग्राम पंचायत और ब्लाक के जिम्मेदार मामले को दबाने में जुटे हैं। वही अधिकारी कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
ग्राम पंचायत जकसिया में अखिलेश के खेत से श्रीधर के खेत तक जलरोक बांध (चकरोड) का मनरेगा से काम कराया गया था। इस कार्य मे 51 डिमांड लगाई गई हैं और कुल सात हजार मजदूरी दिवस सृजित किए गए थे। ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार मृतक महिला दुलारी ने भी यहां मजदूरी की है। इस कार्य के लिए दुलारी के नाम पर 14-14 दिन की मजदूरी दिखाई गई। एक मजदूरी 204 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 28 दिन के कुल 5712 रुपये का भुगतान 18 जनवरी और 6 फरवरी 2022 को दो किस्तों में कर दिया। दुलारी की मृत्यु 25 फरवरी 2013 में हो गई थी। इसके बावजूद मृतका को कार्य में लगा दिखा दिया। श्रम उपायुक्त अवधेश कुमार दीक्षित का कहना है अगर इस तरह का मामला है तो जांच करवा कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
मृतक महिला दुलारी के पति सुघर सिंह का कहना है कि 25 फरवरी 2013 में जब मृत्यु हो चुकी है तो जलरोक बांध में कार्य कैसे किया। जनवरी-फरवरी 2022 में मजदूरी भी मिल गई। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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मजदूर दिवस पर बीडीओ ने दिया प्रशस्ति पत्र
अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर एक मई को बीडीओ बृजकिशोर कुशवाहा ने मृतक महिला दुलारी के 65 वर्षीय पति सुघर सिंह को 100 दिवस का रोजगार प्राप्त करने पर प्रशस्ति पत्र दिया, जो अब चर्चा का विषय है। मनरेगा गाइडलाइन के अनुसार 60 वर्ष से अधिक और पेंशन धारक मनरेगा में मजदूरी नहीं कर सकते हैं। मृतक दुलारी इकौना गांव की निवासी थी और जॉबकार्ड को जकसिया गांव में लगाकर मजदूरी निकाली गई है।
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ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत में उलझा मामला
अखिलेश के खेत से श्रीधर के खेत तक जो जलरोक बांध डाला गया है उसकी अनुमानित लागत 15 लाख रुपये है। जिसका भुगतान भी हो गया है। ग्राम पंचायत का कहना है कि कार्य क्षेत्र पंचायत से कराया गया है। क्षेत्र पंचायत वालों का कहना है कि ग्राम पंचायत का कार्य है। ब्लाक प्रमुख लक्ष्मी देवी का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है, जानकारी की जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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मानक बोर्ड व पट्टिका गायब
मनरेगा गाइडलाइन के अनुसार कार्य कराने से पहले ग्राम पंचायत या कार्यदायी संस्था को मानक बोर्ड और पट्टिका लगाना होता है। इसमें कार्य प्रारंभ करने एवं समाप्ति की तिथि, सृजित मानव दिवस, कार्य की माप, सामग्री पर व्यय आदि की जानकारी देनी होती है। अखिलेश के खेत से श्रीधर के खेत तक कराए गए जलरोक बांध के पास न मानक बोर्ड है और न ही पट्टिका। ग्रामीणों का कहना है कि बगैर कार्य के 15 लाख का फर्जी भुगतान हुआ है।
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ग्राम पंचायत जकसिया में अखिलेश के खेत से श्रीधर के खेत तक जलरोक बांध (चकरोड) का मनरेगा से काम कराया गया था। इस कार्य मे 51 डिमांड लगाई गई हैं और कुल सात हजार मजदूरी दिवस सृजित किए गए थे। ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार मृतक महिला दुलारी ने भी यहां मजदूरी की है। इस कार्य के लिए दुलारी के नाम पर 14-14 दिन की मजदूरी दिखाई गई। एक मजदूरी 204 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 28 दिन के कुल 5712 रुपये का भुगतान 18 जनवरी और 6 फरवरी 2022 को दो किस्तों में कर दिया। दुलारी की मृत्यु 25 फरवरी 2013 में हो गई थी। इसके बावजूद मृतका को कार्य में लगा दिखा दिया। श्रम उपायुक्त अवधेश कुमार दीक्षित का कहना है अगर इस तरह का मामला है तो जांच करवा कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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मृतक महिला दुलारी के पति सुघर सिंह का कहना है कि 25 फरवरी 2013 में जब मृत्यु हो चुकी है तो जलरोक बांध में कार्य कैसे किया। जनवरी-फरवरी 2022 में मजदूरी भी मिल गई। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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मजदूर दिवस पर बीडीओ ने दिया प्रशस्ति पत्र
अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर एक मई को बीडीओ बृजकिशोर कुशवाहा ने मृतक महिला दुलारी के 65 वर्षीय पति सुघर सिंह को 100 दिवस का रोजगार प्राप्त करने पर प्रशस्ति पत्र दिया, जो अब चर्चा का विषय है। मनरेगा गाइडलाइन के अनुसार 60 वर्ष से अधिक और पेंशन धारक मनरेगा में मजदूरी नहीं कर सकते हैं। मृतक दुलारी इकौना गांव की निवासी थी और जॉबकार्ड को जकसिया गांव में लगाकर मजदूरी निकाली गई है।
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ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत में उलझा मामला
अखिलेश के खेत से श्रीधर के खेत तक जो जलरोक बांध डाला गया है उसकी अनुमानित लागत 15 लाख रुपये है। जिसका भुगतान भी हो गया है। ग्राम पंचायत का कहना है कि कार्य क्षेत्र पंचायत से कराया गया है। क्षेत्र पंचायत वालों का कहना है कि ग्राम पंचायत का कार्य है। ब्लाक प्रमुख लक्ष्मी देवी का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है, जानकारी की जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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मानक बोर्ड व पट्टिका गायब
मनरेगा गाइडलाइन के अनुसार कार्य कराने से पहले ग्राम पंचायत या कार्यदायी संस्था को मानक बोर्ड और पट्टिका लगाना होता है। इसमें कार्य प्रारंभ करने एवं समाप्ति की तिथि, सृजित मानव दिवस, कार्य की माप, सामग्री पर व्यय आदि की जानकारी देनी होती है। अखिलेश के खेत से श्रीधर के खेत तक कराए गए जलरोक बांध के पास न मानक बोर्ड है और न ही पट्टिका। ग्रामीणों का कहना है कि बगैर कार्य के 15 लाख का फर्जी भुगतान हुआ है।