{"_id":"619be1e9659aaa04f02728ad","slug":"cultural-orai-news-knp6655013182","type":"story","status":"publish","title_hn":"कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उरई। जिला एकीकरण समिति के कौमी एकता सप्ताह के तहत रविवार को यहां के एक स्कूल में कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन किया गया। जाने माने कवियों व शायरों ने एक से एक रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम में कवियों व शायरों को सम्मानित भी किया गया।
कवि सम्मेलन व मुशायरा की अध्यक्षता वयोवृद्ध कवि यज्ञदत्त त्रिपाठी ने की। कार्यक्रम में मौजूद जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने कहा कि साहित्य बेबाक होता है। सच्चे कवि कबीर जैसे होते हैं, जो विसंगतियों पर प्रहार करते हुए किसी की नाराजगी की परवाह नहीं करते।
जिला एकीकरण समिति के संयोजक केपी सिंह के संयोजन में आयोजित कवि सम्मेलन की शुरुआत रुचि बाजपेई की सरस्वती वंदना व मिर्जा साबिर बेग की नातेपाक से हुई। सिद्धार्थ त्रिपाठी ने ‘सत्ता का संघर्ष जाति धर्म गोट है, इस आपसी फसाद की जड़ केवल वोट है।’ रचना सुनाकर मौजूदा हालात पर प्रहार किया।
विज्ञापन
कृपाराम कृपालु ने ‘अन्यायी का होगा अबकी पत्ता साफ, इस चुनाव में करेगी जनता ही इंसाफ।’ रचना सुनाई। संचालन कर रहे पहचान के अध्यक्ष शफीकुर्रहमान कश्पी ने ‘अपने मिटने का हमें गम नहीं, मिट जाएंगे अपना मिटता हुआ किरदार बचाने के लिए।’ रचना पढ़ी। इस मौके पर माया सिंह, शिखा गर्ग, फरीद अली बशरी, अनुज भदौरिया, वीरेंद्र तिवारी, प्रेमनारायण ने भी काव्य पाठ किया।
विज्ञापन
कवि सम्मेलन व मुशायरा की अध्यक्षता वयोवृद्ध कवि यज्ञदत्त त्रिपाठी ने की। कार्यक्रम में मौजूद जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने कहा कि साहित्य बेबाक होता है। सच्चे कवि कबीर जैसे होते हैं, जो विसंगतियों पर प्रहार करते हुए किसी की नाराजगी की परवाह नहीं करते।
विज्ञापन
जिला एकीकरण समिति के संयोजक केपी सिंह के संयोजन में आयोजित कवि सम्मेलन की शुरुआत रुचि बाजपेई की सरस्वती वंदना व मिर्जा साबिर बेग की नातेपाक से हुई। सिद्धार्थ त्रिपाठी ने ‘सत्ता का संघर्ष जाति धर्म गोट है, इस आपसी फसाद की जड़ केवल वोट है।’ रचना सुनाकर मौजूदा हालात पर प्रहार किया।
विज्ञापन
कृपाराम कृपालु ने ‘अन्यायी का होगा अबकी पत्ता साफ, इस चुनाव में करेगी जनता ही इंसाफ।’ रचना सुनाई। संचालन कर रहे पहचान के अध्यक्ष शफीकुर्रहमान कश्पी ने ‘अपने मिटने का हमें गम नहीं, मिट जाएंगे अपना मिटता हुआ किरदार बचाने के लिए।’ रचना पढ़ी। इस मौके पर माया सिंह, शिखा गर्ग, फरीद अली बशरी, अनुज भदौरिया, वीरेंद्र तिवारी, प्रेमनारायण ने भी काव्य पाठ किया।