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बढ़ रहा है डेंगू का प्रकोप, अब तक जिले में आए 189 केस
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उरई। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर दिखाई दे रहा है। संचारी रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है। मच्छरजनित बीमारियों की चपेट में लोग आ रहे हैं। जिले में अब तक डेंगू के 189 केस आ चुके है। अब तक डेंगू से चार लोगों की मौत हुई है। इसमें से एक युवक की डेंगू से मौत जिले में हुई है। जबकि अन्य तीन दूसरे जिलों में हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग लगातार सावधानी बरतने की सलाह देने में जुटा है। विभाग का कहना है कि बुखार होने पर जांच जरूर कराएं। ताकि बीमारी का सही से और समय से उपचार हो सके।
सीएमओ डॉ एन डी शर्मा का कहना है कि डेंगू एडिज मच्छर के काटने से फैलता है। सितंबर से नवंबर के मध्य डेंगू फैलने की संभावना अधिक रहती है। डेंगू के मच्छर सीमेंट टैंक, कूलर, टूटे फूटे पुराने बर्तनों, टायरों, गमलों आदि में तेजी से पनपते हैं। इसलिए इनकी साफ सफाई जरूर रखें। बुखार आने पर रोगी सीधे सरकारी अस्पताल में चिकित्सक को दिखाकर दवा लें। जांच के पहले कोई भी रोगी पैरासिटीमाल के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की दवा का सेवन न करें।
वेक्टर बार्न डिजीज के नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ एसडी चौधरी बताते हैं कि डेंगू और मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड आरक्षित कर एक वार्ड बना दिया गया है। इसके साथ ही सभी सीएचसी व पीएचसी में चार चार बेड मच्छरदानी युक्त आरक्षित कर दिए गए हैं। आशा कार्यकर्ताओं को भी निर्देशित किया गया है कि किसी भी प्रकार का रोग फैलने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवगत कराएं।
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6798 घरों का किया सर्वे
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ जीएस स्वर्णकार ने बताया कि अब तक 189 डेंगू और चार मलेरिया के रोगी मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अब तक 6798 घरों में सर्वे किया है। जिसमें 172 घरों में डेंगू के लार्वा मिले हैं। 20300 पात्रों को देखा गया है। जिसमें 316 पात्रों में डेंगू का लार्वा मिला है। 1136 पात्र खाली कराए गए हैं। 610 लोगों की स्लाइड बनाकर जांच कराई गई है।
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डेंगू के लक्षण
तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जी मिचलाना, घबराहट होना, त्वचा पर लाल चकत्ते होना प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा प्लेटलेट्स में भी कमी आती है। गंभीर स्थिति में किसी किसी मरीज को पेशाब, मल, नाक से खून भी आ जाता है।
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यह बरतें सावधानी
पीने के पानी को ढंककर रखें, दिन में अंधेरे कमरे में विश्राम न करें। आसपास पानी एकत्रित न होने दें, नालियों में कूड़ा न डालें, जलबहाव को न रोकें। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। नीम की पत्ती का धुआं कर मच्छरों से बचाव करें। बुखार होने पर सरकारी अस्पताल या विशेषज्ञ चिकित्सक से ही इलाज कराएं।
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सीएमओ डॉ एन डी शर्मा का कहना है कि डेंगू एडिज मच्छर के काटने से फैलता है। सितंबर से नवंबर के मध्य डेंगू फैलने की संभावना अधिक रहती है। डेंगू के मच्छर सीमेंट टैंक, कूलर, टूटे फूटे पुराने बर्तनों, टायरों, गमलों आदि में तेजी से पनपते हैं। इसलिए इनकी साफ सफाई जरूर रखें। बुखार आने पर रोगी सीधे सरकारी अस्पताल में चिकित्सक को दिखाकर दवा लें। जांच के पहले कोई भी रोगी पैरासिटीमाल के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की दवा का सेवन न करें।
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वेक्टर बार्न डिजीज के नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ एसडी चौधरी बताते हैं कि डेंगू और मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड आरक्षित कर एक वार्ड बना दिया गया है। इसके साथ ही सभी सीएचसी व पीएचसी में चार चार बेड मच्छरदानी युक्त आरक्षित कर दिए गए हैं। आशा कार्यकर्ताओं को भी निर्देशित किया गया है कि किसी भी प्रकार का रोग फैलने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवगत कराएं।
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6798 घरों का किया सर्वे
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ जीएस स्वर्णकार ने बताया कि अब तक 189 डेंगू और चार मलेरिया के रोगी मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अब तक 6798 घरों में सर्वे किया है। जिसमें 172 घरों में डेंगू के लार्वा मिले हैं। 20300 पात्रों को देखा गया है। जिसमें 316 पात्रों में डेंगू का लार्वा मिला है। 1136 पात्र खाली कराए गए हैं। 610 लोगों की स्लाइड बनाकर जांच कराई गई है।
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डेंगू के लक्षण
तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जी मिचलाना, घबराहट होना, त्वचा पर लाल चकत्ते होना प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा प्लेटलेट्स में भी कमी आती है। गंभीर स्थिति में किसी किसी मरीज को पेशाब, मल, नाक से खून भी आ जाता है।
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यह बरतें सावधानी
पीने के पानी को ढंककर रखें, दिन में अंधेरे कमरे में विश्राम न करें। आसपास पानी एकत्रित न होने दें, नालियों में कूड़ा न डालें, जलबहाव को न रोकें। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। नीम की पत्ती का धुआं कर मच्छरों से बचाव करें। बुखार होने पर सरकारी अस्पताल या विशेषज्ञ चिकित्सक से ही इलाज कराएं।