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कोरोना से रहें सावधान, घर पर तैयार करें पकवान
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बेटे रफीक के साथ खाना बनाती शमीम
- फोटो : ORAI
मुहम्मदाबाद। इस बार रमजान माह में लॉकडाउन के चलते बाजारों में सन्नाटा है। खाने पीने की कहीं पर भी कोई दुकान नहीं लगी है। ऐसे में शुरूआत के दिनों में तो रोजेदारों ने फलों का सहारा लिया पर अब धीरे-धीरे घरों की महिलाओं ने रसोई संभाली और अब घर के रोजेदारों के पसंद के व्यंजन घर पर ही बना रही हैं। महिलाओं का कहना है कि महामारी के प्रति सावधानी बरतनी है तो घर पर ही पकवान तैयार कर उसी से इफ्तार व सहरी करना जरूरी है।
बता दें कि गुनाहों से तौबा करने का माह रमजान 25 अप्रैल से शुरू हो गया है। लॉकडाउन के चलते जहां रोजेदारों को जरूरी सामान नहीं मिल पा रहा है, वहीं अन्य बंदिशों का भी निर्वहन करना पड़ रहा है। खाद्य सामग्री भी जरूरत के हिसाब से नहीं मिल पा रही है। जिसके चलते लोग घर पर ही उपलब्ध सामग्री से काम चलाकर इबादत में जुटे हैं। मुहम्मदाबाद निवासी शिफा बताती हैं कि घर पर ही कभी पानी के बतासे, चाट, पकौड़ी व चिप्स बनाकर इफ्तार की प्लेटें सजा रही हैं। फिर फल और दूध भी रहता है। उरई की शमीम अख्तर बताती है कि सुबह से ही रसोई में व्यंजन बनने शुरू हो जाते हैं।
बेटा रफीकउद्दीन भी इस वक्त खाली है तो किचन में ही साथ दे रहा है। शाम को इफ्तार के लिए दही बड़े, छोले, चने, रुमाली रोटी, पनीर की सब्जी और पकौड़े आदि बनाकर प्लेट सजाई जाती है। इसी तरह सहरी में भी घर की ही बनी सिंवई और सूतफेनी का भी अलग ही स्वाद मिल रहा है। मुहम्मदाबाद की सूूफिया बताती हैं कि सुबह से ही घर पर क्या क्या बनना है का शोर मचने लगता है। ठीक भी है, लाकडाउन का पालन के साथ साथ घरवालों शुद्ध पकवान भी मिल रहे हैं। फलों की स्वादिष्ट चाट, राजमा, फलों का रायता आदि घर ही बन रहा है, जिसे बड़े शौक से खाने की मेज पर सजाया जाता है। इस बार इतना अफसोस जरूर है कि मेहमानों को घरों पर नहीं बुला पा रहे हैं, लेकिन कोरोना से बचाव के लिए यह जरूरी भी है।
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बता दें कि गुनाहों से तौबा करने का माह रमजान 25 अप्रैल से शुरू हो गया है। लॉकडाउन के चलते जहां रोजेदारों को जरूरी सामान नहीं मिल पा रहा है, वहीं अन्य बंदिशों का भी निर्वहन करना पड़ रहा है। खाद्य सामग्री भी जरूरत के हिसाब से नहीं मिल पा रही है। जिसके चलते लोग घर पर ही उपलब्ध सामग्री से काम चलाकर इबादत में जुटे हैं। मुहम्मदाबाद निवासी शिफा बताती हैं कि घर पर ही कभी पानी के बतासे, चाट, पकौड़ी व चिप्स बनाकर इफ्तार की प्लेटें सजा रही हैं। फिर फल और दूध भी रहता है। उरई की शमीम अख्तर बताती है कि सुबह से ही रसोई में व्यंजन बनने शुरू हो जाते हैं।
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बेटा रफीकउद्दीन भी इस वक्त खाली है तो किचन में ही साथ दे रहा है। शाम को इफ्तार के लिए दही बड़े, छोले, चने, रुमाली रोटी, पनीर की सब्जी और पकौड़े आदि बनाकर प्लेट सजाई जाती है। इसी तरह सहरी में भी घर की ही बनी सिंवई और सूतफेनी का भी अलग ही स्वाद मिल रहा है। मुहम्मदाबाद की सूूफिया बताती हैं कि सुबह से ही घर पर क्या क्या बनना है का शोर मचने लगता है। ठीक भी है, लाकडाउन का पालन के साथ साथ घरवालों शुद्ध पकवान भी मिल रहे हैं। फलों की स्वादिष्ट चाट, राजमा, फलों का रायता आदि घर ही बन रहा है, जिसे बड़े शौक से खाने की मेज पर सजाया जाता है। इस बार इतना अफसोस जरूर है कि मेहमानों को घरों पर नहीं बुला पा रहे हैं, लेकिन कोरोना से बचाव के लिए यह जरूरी भी है।

खाने की मेज पर सजे लजीज व्यंजन- फोटो : ORAI
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