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Jalaun News: सबमर्सिबल की केबल जोड़ते युवक को लगा करंट, मौत

Mon, 26 May 2025 12:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन Updated Mon, 26 May 2025 12:35 AM IST
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A young man got an electric shock while connecting a submersible cable and died
सिरसाकलार। सबमर्सिबल की केबल जोड़ते समय युवक को करंट लग गया। उसके दादा ने देखा तो बचाने दौड़े और वह भी चपेट में आ गए। इतने में बिजली गुल होने से दोनों गिर पड़े। परिजनों ने दोनों को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। यहां युवक को मृत घोषित कर दिया गया। परिजन उसे लेकर घर पहुंचे तो उसकी सांसें चलने लगीं। इस पर दोबारा उसे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। डॉक्टरों ने ईसीजी के बाद फिर उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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सिरसाकलार थाना क्षेत्र के धामनी गांव निवासी हिमांशू पाल (20) रविवार की सुबह सबमर्सिबल की केबल जोड़ रहा था। तभी उसे करंट लग गया। उसे देख दादा ज्ञान सिंह उसे बचाने दौड़े तो वह भी करंट की चपेट में आ गए। बिजली चले जाने से दोनों अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े। परिजनों ने दोनों को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। जहां हिमांशू को मृत घोषित कर दिया। परिजन उसे लेकर गांव पहुंचे और अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे। पिता इंद्रपाल ने बताया कि तभी उसकी सांस चलने लगी। इस पर वह उसे दोबारा मेडिकल कॉलेज ले गए। जहां डॉक्टर ने ईसीजी की और उसे मृत घोषित कर दिया।
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परिजनों का आरोप है कि पहली बार में युवक को डॉक्टरों ठीक ढंग से नहीं देखा था, अगर उसे पहली बार ही इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बच जाती। परिजनों ने बताया कि वह बीएससी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। चाचा के बेटे की शादी होने के चलते वह चार दिन पहले ही घर आया था। वह दो भाइयों में बड़ा था। उसकी मौत से मां सोनी सहित अन्य परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
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डॉक्टर बोले, 15 मिनट पहले लाते तो शायद बच जाती जान
करंट से युवक की मौत होने से गांव का हर एक व्यक्ति दुखी है। परिजनों ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि जब वह पहली बार मेडिकल कॉलेज युवक को लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया। जब गांव में उसकी सांस चलने लगी तो दोबारा उसे मेडिकल कॉलेज लेकर गए तो डॉक्टर ने उसकी ईसीजी की और कहा कि अगर उसे पंद्रह मिनट पहले लाते तो शायद हम उसे बचा लेते। आरोप है कि पहली बार में उसकी बिना जांच के ही उसे मृत घोषित कर दिया। उनका कहना है कि अगर उसे सही तरीके से इलाज मिल जाता तो वह आज जिंदा होता।



वर्जन
युवक को पहली बार जब मेडिकल कॉलेज लाया गया था, तब उसकी मौत हो चुकी थी, दोबारा में भी ईसीजी करने के बाद उसे मृत घोषित किया गया है। आरोप निराधार हैं।

डॉ. प्रशांत निरंजन, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
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