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जालौनी माता मंदिर: पांडवों के काल से जल रही है ज्योति
Jalaun
Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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उरई(जालौन)। कुठौंद थाना क्षेत्र के बीहड़ में यमुना नदी के किनारे ग्राम बरीकेपुरवा में बना जालौनी माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इसे बनवाया था, तब इसका नाम जयंती देवी मंदिर था। कालांतर में इसका नाम कब और कैसे बदला, यह किसी को नहीं मालूम। मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मनौती पूरी होती है।
इस मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रृद्धालु दर्शन करने आते हैं। नवरात्र में तो यहां औरैया, इटावा, कानपुर देहात, मध्य प्रदेश के भिंड जनपद, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों से भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर के पुजारी ग्याप्रसाद शुक्ल बताते हैं कि इस प्राचीन मंदिर में अब तक एक सैकड़ा से अधिक पुजारी नियुक्त हो चुके हैं। पांडवकाल से ही यहां एक अखंड ज्योति जल रही है। पुजारी बराबर इसकी देखरेख करते रहते हैं। यमुना नदी के किनारे बीहड़ में एक ऊंचे टीले पर बना जालौनी माता मंदिर कई मील दूर से दिखाई देता है। यहां वर्ष 1980 से वर्ष 2000 के बीच कई इनामी दस्यु सरगनाओं ने घंटे चढ़ाए हैं। पीतल के हर घंटे का वजन एक कुंतल दस किलो है। सैकड़ों छोटे छोटे घंटे भी हैं जो श्रृद्धालुओं ने मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए हैं।
जालौैनी माता मंदिर परिसर में धर्मशाला भाजपा के पूर्व एमएलसी एवं वर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने जबकि विशाल हवन कुंड जयहिंद चतुर्वेदी ने बनवाया है। शेखपुर अहीर के शिक्षक कृष्णमुरारी ने यज्ञशाला एवं भोजनालय बनवाया है। ग्राम बरीकेपुरवा की प्रधान श्रीमती सुधा देवी सेंगर व उनके पति नरेंद्र सिंह सेंगर ने पक्का फर्श बनवाकर पौधरोपण करवाया है। एक श्रृद्धालु सुभाष तिवारी ने यात्रियों के ठहरने के लिए दो कमरे बनवाए हैं। नवरात्र में पूरे देश से यहां श्रृद्धालुओं की भीड़ लगती है जो यहां जवारे चढ़ाते हैं।
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इस मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रृद्धालु दर्शन करने आते हैं। नवरात्र में तो यहां औरैया, इटावा, कानपुर देहात, मध्य प्रदेश के भिंड जनपद, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों से भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर के पुजारी ग्याप्रसाद शुक्ल बताते हैं कि इस प्राचीन मंदिर में अब तक एक सैकड़ा से अधिक पुजारी नियुक्त हो चुके हैं। पांडवकाल से ही यहां एक अखंड ज्योति जल रही है। पुजारी बराबर इसकी देखरेख करते रहते हैं। यमुना नदी के किनारे बीहड़ में एक ऊंचे टीले पर बना जालौनी माता मंदिर कई मील दूर से दिखाई देता है। यहां वर्ष 1980 से वर्ष 2000 के बीच कई इनामी दस्यु सरगनाओं ने घंटे चढ़ाए हैं। पीतल के हर घंटे का वजन एक कुंतल दस किलो है। सैकड़ों छोटे छोटे घंटे भी हैं जो श्रृद्धालुओं ने मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए हैं।
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जालौैनी माता मंदिर परिसर में धर्मशाला भाजपा के पूर्व एमएलसी एवं वर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने जबकि विशाल हवन कुंड जयहिंद चतुर्वेदी ने बनवाया है। शेखपुर अहीर के शिक्षक कृष्णमुरारी ने यज्ञशाला एवं भोजनालय बनवाया है। ग्राम बरीकेपुरवा की प्रधान श्रीमती सुधा देवी सेंगर व उनके पति नरेंद्र सिंह सेंगर ने पक्का फर्श बनवाकर पौधरोपण करवाया है। एक श्रृद्धालु सुभाष तिवारी ने यात्रियों के ठहरने के लिए दो कमरे बनवाए हैं। नवरात्र में पूरे देश से यहां श्रृद्धालुओं की भीड़ लगती है जो यहां जवारे चढ़ाते हैं।
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