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प्रशासन की कछुआ चाल से गल्ला व्यापारी भी मायूस
Jalaun
Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। जिला प्रशासन से किसानों का गेहूं खरीद का आदेश न मिलने से गल्ला व्यापारी पसोपेश में हैं। उनका कहना है कि जो काम प्रदेश शासन को पंजाब व हरियाणा सरकारों की तर्ज पर एक अप्रैल से शुरू करा देना चाहिए था, उसका शासनादेश 28 अप्रैल को जारी किया गया। इसके 15 दिन बाद भी जिला स्तर से इसका क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। इससे गल्ला व्यापारी मायूस हैं।
गल्ला व्यापार संघ उरई के अध्यक्ष सेठ प्रदीप माहेश्वरी, महावीर गुप्ता, नितिन गुप्ता, पवन लाखौरिया, बृजेश राजपूत, गोविंद बिजपुरिया, सुशील कुमार, मुन्ना राजपूत आदि गल्ला व्यापारियों ने अमर उजाला से कहा कि शासनादेश के बाद किसानों ने 1285 रुपए प्रति कुंतल के भाव से बेचने के लिए अपना गेहूं रोक लिया है। 15 दिन से किसान गेहूं बेचने के लिए मंडी में नहीं आ रहा है। यदि जिला प्रशासन ने खरीद शीघ्र शुरू न कराई तो गल्ला व्यापारी दोनों तरफ से मारे जाएंगे।
प्रदीप माहेश्वरी व अन्य गल्ला व्यापारियों ने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन जूट के बोरों के अभाव में प्लास्टिक की बोरियों में गेहूं न खरीदवाए क्योंकि प्लास्टिक की बोरियां ट्रैक्टर में लादने ले जाने में फिसलती हैं। इसके अलावा जैसे जिला प्रशासन के अधिकारी आढ़त में किसानों का गेहूं चेक करके खरीद की स्वीकृत देते थे, ऐसा ही इस बार भी होना चाहिए।
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एडीएम लोकपाल सिंह ने बताया कि डिप्टी आरएसओ एसके तिवारी के पास जिले के गल्ला व्यापारियों के लगभग 125 प्रार्थनापत्र हैं। इस फाइल पर डीएम मनीषा त्रिघटिया के हस्ताक्षर के बाद ही गल्ला व्यापारी किसानों का गेहूं खरीद सकेंगे। एडीएम श्री सिंह ने अमर उजाला को बताया कि असल में डिप्टी आरएसओ के लड़के के सिर में ट्यूमर है जिसको दिखाने के लिए वे जिले के बाहर गए हैं। उनके सोमवार तक वापस आने की उम्मीद है। इसके बाद डिप्टी आरएमओ गल्ला व्यापारियों की फाइल डीएम के सामने प्रस्तुत करेंगे।
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गल्ला व्यापार संघ उरई के अध्यक्ष सेठ प्रदीप माहेश्वरी, महावीर गुप्ता, नितिन गुप्ता, पवन लाखौरिया, बृजेश राजपूत, गोविंद बिजपुरिया, सुशील कुमार, मुन्ना राजपूत आदि गल्ला व्यापारियों ने अमर उजाला से कहा कि शासनादेश के बाद किसानों ने 1285 रुपए प्रति कुंतल के भाव से बेचने के लिए अपना गेहूं रोक लिया है। 15 दिन से किसान गेहूं बेचने के लिए मंडी में नहीं आ रहा है। यदि जिला प्रशासन ने खरीद शीघ्र शुरू न कराई तो गल्ला व्यापारी दोनों तरफ से मारे जाएंगे।
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प्रदीप माहेश्वरी व अन्य गल्ला व्यापारियों ने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन जूट के बोरों के अभाव में प्लास्टिक की बोरियों में गेहूं न खरीदवाए क्योंकि प्लास्टिक की बोरियां ट्रैक्टर में लादने ले जाने में फिसलती हैं। इसके अलावा जैसे जिला प्रशासन के अधिकारी आढ़त में किसानों का गेहूं चेक करके खरीद की स्वीकृत देते थे, ऐसा ही इस बार भी होना चाहिए।
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एडीएम लोकपाल सिंह ने बताया कि डिप्टी आरएसओ एसके तिवारी के पास जिले के गल्ला व्यापारियों के लगभग 125 प्रार्थनापत्र हैं। इस फाइल पर डीएम मनीषा त्रिघटिया के हस्ताक्षर के बाद ही गल्ला व्यापारी किसानों का गेहूं खरीद सकेंगे। एडीएम श्री सिंह ने अमर उजाला को बताया कि असल में डिप्टी आरएसओ के लड़के के सिर में ट्यूमर है जिसको दिखाने के लिए वे जिले के बाहर गए हैं। उनके सोमवार तक वापस आने की उम्मीद है। इसके बाद डिप्टी आरएमओ गल्ला व्यापारियों की फाइल डीएम के सामने प्रस्तुत करेंगे।