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बंदरों के आतंक से परेशान हैं मुहम्मदाबाद के बाशिंदे
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मुहम्मदाबाद (जालौन)। मुहम्मदाबाद के बाशिंदे इस समय कटखने बंदरों के आतंक से परेशान है। हालत यह है कि लोगों ने छतों पर जाना बंद कर दिया है। अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों को कटखने बंदर अपना शिकार बना चुके है। कई लोग बंदरों से बचने के चक्कर में गिरकर बुरी तरह चुटहिल हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि वन विभाग को भी अवगत कराया जा चुका है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
अब तक ये कटखने बंदर गांव के मिथलेश, पप्पू खान, शमीमा, राहुल, जाबिया, नूरजहां, समेत दो दर्जन लोगों का अपना शिकार बना चुके है। हालत ये है कि इन बंदरों के चक्कर में लोग सर्दी से बचने के लिए छत पर धूप भी नहीं सेंक पा रहे हैं न ही कपड़े, सामान डाल पा रहे है।
कई लोगों के छत पर सूख रहे कपड़े भी बंदर फाड़ चुके है। बंदरों से बचने के लिए कई लोग छत से कूद पड़े। इससे उनके हाथ पैर भी चुटहिल हो चुके हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। बच्चों के साथ उनके अभिभावक डंडा लेकर बच्चों को स्कूल तक छोड़ने व लेने जाते है। ग्रामीणों ने बताया कि एक बार गांव में करीब दस दिन पहले वन विभाग की टीम भी आई थी, तो उन लोगों ने इसकी शिकायत भी की थी लेकिन टीम लौटकर दोबारा नहीं आई।
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गांव की साबिरा (40) बताती हैं कि रविवार की सुबह वह छत पर बैठी थी, तभी बंदर आए। इसके पहले वे कुछ समझ पातीं, तब तक झुंड हमला कर दिया। उसने कई जगह उन्हें काट डाला। चिल्लाने पर नीचे से लोग दौड़े, तब कहीं जाकर वे बच सकीं। बंदरों ने उन्हें हाथ व पैर में करीब आठ दस जगह काटा है।
जयदेवी (40) ने बताया कि करीब पांच दिन पहले घर में अकेली थी। तभी बंदरों का झुंड उनके आंगन में आ धमका। वे जब तक डंडा उठाने जाती, तब तक उन्होंने उस पर हमला कर दिया। उनके हाथ की नस कट गई। उसके इलाज में करीब 15 हजार रुपये तक खर्च हो गया। अब भी वे दवाइयां खा रही हैं।
बृहस्पति देवी (45) ने कहा कि हफ्ते भर पहले वे बच्चों को छोड़ने गांव के ही स्कूल में जा रही थी, तभी पीछे से बंदरों ने बच्चों पर झपट्टा मारा। बच्चों को बचाने के लिए जैसे ही वे आगे बढ़ी, तो बंदरों के झुंड ने पीछे से उन पर हमला कर दिया और उनकी गर्दन में कई जगह काट लिया। तब परिजन उन्हें अस्पताल ले गए।
चरन सिंह राजपूत (38) कहते हैं कि गांव में लगातार बंदरों का आतंक बढ़ रहा है। पहले तो एक दो बंदर आए थे लेकिन इस समय करीब दो दर्जन बंदरों को झुंड है, जो घर के बाहर के सामान को तो नुकसान पहुंचा ही रहे है, अंदर घुसकर भी सामान व लोगों को नुकसान पहुंचा रहे है। उन्होंने जल्द बंदरों को पकड़ने की मांग की है। डीएफओ एके श्रीवास्तव का कहना है कि कटखने बंदरों को पकड़ने के लिए टीम की व्यवस्था की जा रही है। जल्द ही गांव में टीम भेजकर बंदरों को पकड़वाया जाएगा।
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अब तक ये कटखने बंदर गांव के मिथलेश, पप्पू खान, शमीमा, राहुल, जाबिया, नूरजहां, समेत दो दर्जन लोगों का अपना शिकार बना चुके है। हालत ये है कि इन बंदरों के चक्कर में लोग सर्दी से बचने के लिए छत पर धूप भी नहीं सेंक पा रहे हैं न ही कपड़े, सामान डाल पा रहे है।
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कई लोगों के छत पर सूख रहे कपड़े भी बंदर फाड़ चुके है। बंदरों से बचने के लिए कई लोग छत से कूद पड़े। इससे उनके हाथ पैर भी चुटहिल हो चुके हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। बच्चों के साथ उनके अभिभावक डंडा लेकर बच्चों को स्कूल तक छोड़ने व लेने जाते है। ग्रामीणों ने बताया कि एक बार गांव में करीब दस दिन पहले वन विभाग की टीम भी आई थी, तो उन लोगों ने इसकी शिकायत भी की थी लेकिन टीम लौटकर दोबारा नहीं आई।
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गांव की साबिरा (40) बताती हैं कि रविवार की सुबह वह छत पर बैठी थी, तभी बंदर आए। इसके पहले वे कुछ समझ पातीं, तब तक झुंड हमला कर दिया। उसने कई जगह उन्हें काट डाला। चिल्लाने पर नीचे से लोग दौड़े, तब कहीं जाकर वे बच सकीं। बंदरों ने उन्हें हाथ व पैर में करीब आठ दस जगह काटा है।
जयदेवी (40) ने बताया कि करीब पांच दिन पहले घर में अकेली थी। तभी बंदरों का झुंड उनके आंगन में आ धमका। वे जब तक डंडा उठाने जाती, तब तक उन्होंने उस पर हमला कर दिया। उनके हाथ की नस कट गई। उसके इलाज में करीब 15 हजार रुपये तक खर्च हो गया। अब भी वे दवाइयां खा रही हैं।
बृहस्पति देवी (45) ने कहा कि हफ्ते भर पहले वे बच्चों को छोड़ने गांव के ही स्कूल में जा रही थी, तभी पीछे से बंदरों ने बच्चों पर झपट्टा मारा। बच्चों को बचाने के लिए जैसे ही वे आगे बढ़ी, तो बंदरों के झुंड ने पीछे से उन पर हमला कर दिया और उनकी गर्दन में कई जगह काट लिया। तब परिजन उन्हें अस्पताल ले गए।
चरन सिंह राजपूत (38) कहते हैं कि गांव में लगातार बंदरों का आतंक बढ़ रहा है। पहले तो एक दो बंदर आए थे लेकिन इस समय करीब दो दर्जन बंदरों को झुंड है, जो घर के बाहर के सामान को तो नुकसान पहुंचा ही रहे है, अंदर घुसकर भी सामान व लोगों को नुकसान पहुंचा रहे है। उन्होंने जल्द बंदरों को पकड़ने की मांग की है। डीएफओ एके श्रीवास्तव का कहना है कि कटखने बंदरों को पकड़ने के लिए टीम की व्यवस्था की जा रही है। जल्द ही गांव में टीम भेजकर बंदरों को पकड़वाया जाएगा।