{"_id":"5c758a64bdec224c0b48a759","slug":"101551207012-jalaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओडीएफ के बाद भी हाथों से नहीं छूट रहा लोटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओडीएफ के बाद भी हाथों से नहीं छूट रहा लोटा
विज्ञापन
सरावन/माधौगढ़। शासन प्रशासन ने घर-घर शौचालय बनवाकर दिसंबर में ब्लाक को ओडीएफ घोषित कर दिया। लेकिन इसके बाद हाल ही में हुई क्षेत्र पंचायत की बैठक में डेढ़ दर्जन गांवों के प्रधानों की लापरवाही का मामला सामने आया। शौचालय बनवाने के लिए खातों में दो लाख से पांच लाख रुपये होने के बावजूद भी प्रधान, सचिव शौचालय बनवाने में रुचि नहीं दिखा रहे है, जिससे ग्रामीण शौच के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं।
बता दें कि ब्लाक को ओडीएफ बनाने के लिए अधिकारियों ने बैठकें आयोजित की और शौचालयों बनवाने में ज्यादा रुचि दिखा रहे प्रधानों का सम्मान भी किया। साथ ही शौचालय बनवाने की प्रधान, सचिव के अलावा सफाई कर्मचारी, पंचायत मित्र, कोटेदारों को भी जिम्मेदारी दी गई, फिर भी ब्लाक के गांव ओडीएफ नहीं हो सके। बेस लाइन 2011-12 के मुताबिक ब्लाक ओडीएफ हो गया, लेकिन हकीकत और कुछ है।
क्षेत्र पंचायत की बैठक में शौचालयों में प्रधानों द्वारा रुपये लेने की बात पर हंगामा तो हुआ कि रुपये न मिलने पर शौचालय आधे अधूरे पड़े है, ग्रामीण शौचक्रिया के लिए बाहर जाने को मजबूर है। बीडीओ प्रेमचंद वर्मा ने प्रधानों से एक सप्ताह के अंदर आधे अधूरे शौचालय बनवाने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
लाखों रुपये पड़े हैं खाते में
निर्मल भारत के तहत डेढ़ दर्जन गांवों में शौचालय बनवाने के लिए लाखों रुपये खातों में होने के बावजूद शौचालय नहीं बन पा रहे है। ब्लाक के गांव धमना में 1.71 लाख, रामहेतपुरा में 2.13 लाख रुपये, ऊंचा में 2.72 लाख रुपये, महाराजपुरा में 6 लाख रुपये, मड़ोरी में 1.66 लाख रुपये, गढ़िया में 3.75 लाख रुपये बोहरा में 6.81 लाख रुपये, सूपा में 3.98 लाख रुपये, विजदुआ में 2 लाख रुपये, रसूलपुर में 2.69 लाख रुपये, भंगा में 2.29 लाख रुपये, रूपापुर मे 4.54 लाख रुपये, गोरा भूपका में 2.29 लाख रुपये, जैतपुरा में 4.36 लाख रुपये, असहना में 6.65 लाख रुपये खातों की शोभा बढ़ा रहा है। प्रधान सचिव शौचालय बनवाने में रुचि नहीं ले रहे है। एडीओ पचांयत महेश पाल का कहना है कि सचिवों को निर्देश दे दिए गए है कि मौके पर जाकर अधूरे पड़े शौचालय की दूसरी किस्त दें। वंचित पात्र लोगों के शौचालय बनवाएं। एसडीएम मनोज कुमार ने कहा कि सभी बीडीओ को हिदायत दी जाएगी कि वे प्रधानों के खाते में शौचालय की धनराशि पहुंचाना सुनिश्चित करें, इसके बाद भी यदि किसी प्रधान की लापरवाही सामने आई तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी किस्त पाने को भटक रहे पात्र
सरकार द्वारा भले ही प्रदेश को ओडीएफ घोषित कर दिया हो लेकिन आज भी जिले में लोग खुले में शौच को जा रहे है। ग्राम प्रधानों के खाते में पैसा होने के बाद भी पात्रों को पैसा नहीं मिल पा रहा है। सुविधा शुल्क न देने के कारण दूसरी किस्त पाने के लिए पात्र भटक रहे है।
माधौगढ़ तहसील की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत सरावन में बेस लाइन 2011-12 के हिसाब से 1087 शौचालय स्वीकृत हुए थे जिससे पुन: सर्वे कराकर 800 परिवारों को और जोड़ा गया था, जिससे पात्र सूची 1887 हो गई थी। सरकार द्वारा फिर सर्वे कराकर 300 लोगों को सूची से हटा दिया गया क्योंकि इन लोगों के पास पूर्व में शौचालय बने थे। इस प्रकार 1587 लोगों की सूची बनी थी। जिसमें मात्र 341 लोगों के शौचालय बने हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अनिल याज्ञिक कहते हैं कि उनकी ग्राम पंचायत में ढाई माह से पैसा नहीं आया है। ग्राम प्रधान गोहनी संतोष कुमार कहते हैं कि 30 शौचालय अधूरे पड़े है। ग्राम पंचायत पडकुला में 40 शौचालय अधूरे पड़े हैं।
विज्ञापन
बता दें कि ब्लाक को ओडीएफ बनाने के लिए अधिकारियों ने बैठकें आयोजित की और शौचालयों बनवाने में ज्यादा रुचि दिखा रहे प्रधानों का सम्मान भी किया। साथ ही शौचालय बनवाने की प्रधान, सचिव के अलावा सफाई कर्मचारी, पंचायत मित्र, कोटेदारों को भी जिम्मेदारी दी गई, फिर भी ब्लाक के गांव ओडीएफ नहीं हो सके। बेस लाइन 2011-12 के मुताबिक ब्लाक ओडीएफ हो गया, लेकिन हकीकत और कुछ है।
विज्ञापन
क्षेत्र पंचायत की बैठक में शौचालयों में प्रधानों द्वारा रुपये लेने की बात पर हंगामा तो हुआ कि रुपये न मिलने पर शौचालय आधे अधूरे पड़े है, ग्रामीण शौचक्रिया के लिए बाहर जाने को मजबूर है। बीडीओ प्रेमचंद वर्मा ने प्रधानों से एक सप्ताह के अंदर आधे अधूरे शौचालय बनवाने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
लाखों रुपये पड़े हैं खाते में
निर्मल भारत के तहत डेढ़ दर्जन गांवों में शौचालय बनवाने के लिए लाखों रुपये खातों में होने के बावजूद शौचालय नहीं बन पा रहे है। ब्लाक के गांव धमना में 1.71 लाख, रामहेतपुरा में 2.13 लाख रुपये, ऊंचा में 2.72 लाख रुपये, महाराजपुरा में 6 लाख रुपये, मड़ोरी में 1.66 लाख रुपये, गढ़िया में 3.75 लाख रुपये बोहरा में 6.81 लाख रुपये, सूपा में 3.98 लाख रुपये, विजदुआ में 2 लाख रुपये, रसूलपुर में 2.69 लाख रुपये, भंगा में 2.29 लाख रुपये, रूपापुर मे 4.54 लाख रुपये, गोरा भूपका में 2.29 लाख रुपये, जैतपुरा में 4.36 लाख रुपये, असहना में 6.65 लाख रुपये खातों की शोभा बढ़ा रहा है। प्रधान सचिव शौचालय बनवाने में रुचि नहीं ले रहे है। एडीओ पचांयत महेश पाल का कहना है कि सचिवों को निर्देश दे दिए गए है कि मौके पर जाकर अधूरे पड़े शौचालय की दूसरी किस्त दें। वंचित पात्र लोगों के शौचालय बनवाएं। एसडीएम मनोज कुमार ने कहा कि सभी बीडीओ को हिदायत दी जाएगी कि वे प्रधानों के खाते में शौचालय की धनराशि पहुंचाना सुनिश्चित करें, इसके बाद भी यदि किसी प्रधान की लापरवाही सामने आई तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी किस्त पाने को भटक रहे पात्र
सरकार द्वारा भले ही प्रदेश को ओडीएफ घोषित कर दिया हो लेकिन आज भी जिले में लोग खुले में शौच को जा रहे है। ग्राम प्रधानों के खाते में पैसा होने के बाद भी पात्रों को पैसा नहीं मिल पा रहा है। सुविधा शुल्क न देने के कारण दूसरी किस्त पाने के लिए पात्र भटक रहे है।
माधौगढ़ तहसील की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत सरावन में बेस लाइन 2011-12 के हिसाब से 1087 शौचालय स्वीकृत हुए थे जिससे पुन: सर्वे कराकर 800 परिवारों को और जोड़ा गया था, जिससे पात्र सूची 1887 हो गई थी। सरकार द्वारा फिर सर्वे कराकर 300 लोगों को सूची से हटा दिया गया क्योंकि इन लोगों के पास पूर्व में शौचालय बने थे। इस प्रकार 1587 लोगों की सूची बनी थी। जिसमें मात्र 341 लोगों के शौचालय बने हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अनिल याज्ञिक कहते हैं कि उनकी ग्राम पंचायत में ढाई माह से पैसा नहीं आया है। ग्राम प्रधान गोहनी संतोष कुमार कहते हैं कि 30 शौचालय अधूरे पड़े है। ग्राम पंचायत पडकुला में 40 शौचालय अधूरे पड़े हैं।