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छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण में बरती लापरवाही
अमर उजाला, हाथरस
Updated Sat, 10 Dec 2016 11:43 PM IST
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केजीबीवी की बीमार छात्राएं जिला अस्पताल में उपचार कराते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं में से कई को गैस, निमोनिया और टायफाइड की शिकायत पाई गई है। डॉक्टरों के मुताबिक छात्राओं को यह समस्या पिछले कई दिनों से है। हैरत की बात यह है कि एक हफ्ते पहले ही सरकारी डॉक्टरों की एक टीम ने छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया था।
डॉक्टराें की इस टीम ने सभी छात्राओं को फिट करार दिया था, जबकि कई छात्राओं ने टीम के डॉक्टरों को अपनी समस्याओं के बारे में बताया था, जिस पर गौर नहीं किया गया। सरकार ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य के परीक्षण के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
इस योजना में बच्चों के किसी बीमारी से ग्रसित होने पर जिला अस्पताल रेफर करने और गंभीर बीमारी होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कर उपचार कराने का प्रावधान है। इलाज का सारा खर्चा सरकार उठाती है। बावजूद इसके सरकारी डॉक्टर बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की खानापूरी कर रहे हैं।
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जिला अस्पताल में भर्ती बीमार छात्राओं में से एक नेहा ने बताया कि एक हफ्ते पहले उनके यहां डॉक्टरों की एक टीम आई थी। इस टीम ने नेहा के नाखून, आंख और जीभ देखी। इसके बाद नेहा को फिट करार दे दिया, जबकि नेहा ने अपने हाथ में एक गांठ होने की बात न केवल टीम के डॉक्टरों को बताई थी, बल्कि शिक्षिकाओं को भी इसकी जानकारी दी गई थी।
नेहा की इस समस्या पर किसी ने गौर नहीं किया। डॉक्टर अगर नेहा की बारीकी से जांच करते तो उन्हें टॉयफाइड के लक्षणों का पता चल सकता था। यही नहीं एक साथ 23 छात्राओं की सेहत बिगड़ने से साफ है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत छात्राओं की सेहत की जांच सही तरीके से नहीं की गई।
छात्राओं की आखिरी बार मेडिकल जांच कब हुई थी, इसकी तो मुझे जानकारी नहीं है, लेकिन यह बात बिल्कुल सही है कि यह छात्राएं ठंड से ही बीमार हुई हैं और इसमें स्टाफ की लापरवाही रही है। जांच चल रही है। रिपोर्ट आने पर जरूर कार्रवाई की जाएगी।
-रेखा सुमन, बीएसए हाथरस
जिला अस्पताल में भर्ती छात्रा शिवानी की हालत शनिवार को फिर बिगड़ गई। तेज पेट दर्द होने पर छात्रा बिलखकर रोने लगी। इस पर डॉक्टरों ने उसे उपचार दिया। डॉक्टरों ने दो दिन पहले छात्रा का अल्ट्रासाउंड कराया था। डॉक्टरों के मुताबिक छात्रा की आंतों में सूजन है। गैस और सर्दी के कारण यह सूजन आई है।
छात्राओं के बीमार होने के मामले में जांच की मुझे करनी है, इसकी जानकारी मुझे मौखिक रूप से मिल चुकी है। हालांकि अभी तक इसका लिखित आदेश अभी नहीं मिला है। आदेश मिलते ही जांच शुरू कर दी जाएगी।
- राकेश गुप्ता, एसडीएम सदर
कुछ छात्राएं अभी तक जिला अस्पताल में भर्ती हैं। तीन छात्राओं को मियादी बुखार की शिकायत है। सभी बच्चियों का नियमित चेक अप कराया जा रहा है और बेहतर तरीके से इनकी देखभाल की जा रही है।
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
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डॉक्टराें की इस टीम ने सभी छात्राओं को फिट करार दिया था, जबकि कई छात्राओं ने टीम के डॉक्टरों को अपनी समस्याओं के बारे में बताया था, जिस पर गौर नहीं किया गया। सरकार ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य के परीक्षण के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
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इस योजना में बच्चों के किसी बीमारी से ग्रसित होने पर जिला अस्पताल रेफर करने और गंभीर बीमारी होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कर उपचार कराने का प्रावधान है। इलाज का सारा खर्चा सरकार उठाती है। बावजूद इसके सरकारी डॉक्टर बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की खानापूरी कर रहे हैं।
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जिला अस्पताल में भर्ती बीमार छात्राओं में से एक नेहा ने बताया कि एक हफ्ते पहले उनके यहां डॉक्टरों की एक टीम आई थी। इस टीम ने नेहा के नाखून, आंख और जीभ देखी। इसके बाद नेहा को फिट करार दे दिया, जबकि नेहा ने अपने हाथ में एक गांठ होने की बात न केवल टीम के डॉक्टरों को बताई थी, बल्कि शिक्षिकाओं को भी इसकी जानकारी दी गई थी।
नेहा की इस समस्या पर किसी ने गौर नहीं किया। डॉक्टर अगर नेहा की बारीकी से जांच करते तो उन्हें टॉयफाइड के लक्षणों का पता चल सकता था। यही नहीं एक साथ 23 छात्राओं की सेहत बिगड़ने से साफ है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत छात्राओं की सेहत की जांच सही तरीके से नहीं की गई।
छात्राओं की आखिरी बार मेडिकल जांच कब हुई थी, इसकी तो मुझे जानकारी नहीं है, लेकिन यह बात बिल्कुल सही है कि यह छात्राएं ठंड से ही बीमार हुई हैं और इसमें स्टाफ की लापरवाही रही है। जांच चल रही है। रिपोर्ट आने पर जरूर कार्रवाई की जाएगी।
-रेखा सुमन, बीएसए हाथरस
जिला अस्पताल में भर्ती छात्रा शिवानी की हालत शनिवार को फिर बिगड़ गई। तेज पेट दर्द होने पर छात्रा बिलखकर रोने लगी। इस पर डॉक्टरों ने उसे उपचार दिया। डॉक्टरों ने दो दिन पहले छात्रा का अल्ट्रासाउंड कराया था। डॉक्टरों के मुताबिक छात्रा की आंतों में सूजन है। गैस और सर्दी के कारण यह सूजन आई है।
छात्राओं के बीमार होने के मामले में जांच की मुझे करनी है, इसकी जानकारी मुझे मौखिक रूप से मिल चुकी है। हालांकि अभी तक इसका लिखित आदेश अभी नहीं मिला है। आदेश मिलते ही जांच शुरू कर दी जाएगी।
- राकेश गुप्ता, एसडीएम सदर
कुछ छात्राएं अभी तक जिला अस्पताल में भर्ती हैं। तीन छात्राओं को मियादी बुखार की शिकायत है। सभी बच्चियों का नियमित चेक अप कराया जा रहा है और बेहतर तरीके से इनकी देखभाल की जा रही है।
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल