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हाथरस: बारिश से साथ हुई ओलावृष्टि से हजारों बीघा फसल बर्बाद
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हाथरस: 36 मुरसान क्षेत्र के एक गांव में ओलावृष्टि के बाद ओलों को हाथ में लेकर दिखाता एक किसान।
- फोटो : HATHRAS
बारिश से साथ हुई ओलावृष्टि से हजारों बीघा फसल बर्बाद
कई इलाकों में बारिश के साथ पड़े ओले, किसानोें ने नुकसान की भरपाई की मांग की
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। बरसात के साथ सोमवार की रात्रि में जिले के कई इलाकों में ओलावृष्टि हुई। मुरसान और हसायन क्षेत्र में हुई इस ओलावृष्टि से हजारों बीघा फसल नष्ट हो गई। यही नहीं काफी जीव-जंतु भी मर गए। कुछ स्थानों पर तो ओलावृष्टि की तीव्रता इतनी विकट रही कि कुछ दीवारों व टीनशेड में छेद हो गए। कुछ लोगों के ओलावृष्टि से घायल होने की भी जानकारी मिली है।
मुरसान क्षेत्र के गांव खुटीपुरी से लेकर मुगरिया तक सोमवार की रात को ओलावृष्टि होने के कारण किसानों की हजारों बीघा फसल बर्बाद हो गई। सोमवार की रात को अचानक बादलों की गड़गड़ाहट हुई और बारिश के साथ ओले गिरना शुरू हो गए। अचानक इतनी तेज ओलावृष्टि हुई कि लोग समझ ही नहीं पाए। ओलावृष्टि होने से काफी जीव मर गए। ओलावृष्टि से पौधों की डालियां भी टूट-टूटकर नीचे गिरने लगी। यह देखकर कुछ लोग खुले में बंधे हुए अपने पशुओं को ओलावृष्टि से बचाने के लिए गए तो वह भी घायल हो गए। तेज गति से ओलावृष्टि होने के कारण कई घरोें की दीवारोें और टीन शेड में भी छेद हो गए। इस ओलावृष्टि से हजारों बीघा आलू, लाहा और गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है।
मंगलवार की सुबह जब किसान अपने खेतों पर गए तो पता चला के उनकी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। मंगलवार की सुबह गांव मुगरिया, सेनपुर, पिथा, खुटीपुरी के किसान गांव पिथा में एकत्रित हुए और उन्होंने प्रशासन को इस भारी नुकसान के बारे में फोन से अवगत कराया है। किसानों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. श्यौराज सिंह का कहना है कि ओलावृष्टि से सरसों और आलू की फसल को नुकसान होगा। जैसा कि सुनने में आ रहा है हसायन व मुरसान में ओलावृष्टि हुई है। फसल में इससे हुए नुकसान का आंकलन विभागीय टीम द्वारा किया जाएगा।
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कई इलाकों में बारिश के साथ पड़े ओले, किसानोें ने नुकसान की भरपाई की मांग की
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। बरसात के साथ सोमवार की रात्रि में जिले के कई इलाकों में ओलावृष्टि हुई। मुरसान और हसायन क्षेत्र में हुई इस ओलावृष्टि से हजारों बीघा फसल नष्ट हो गई। यही नहीं काफी जीव-जंतु भी मर गए। कुछ स्थानों पर तो ओलावृष्टि की तीव्रता इतनी विकट रही कि कुछ दीवारों व टीनशेड में छेद हो गए। कुछ लोगों के ओलावृष्टि से घायल होने की भी जानकारी मिली है।
मुरसान क्षेत्र के गांव खुटीपुरी से लेकर मुगरिया तक सोमवार की रात को ओलावृष्टि होने के कारण किसानों की हजारों बीघा फसल बर्बाद हो गई। सोमवार की रात को अचानक बादलों की गड़गड़ाहट हुई और बारिश के साथ ओले गिरना शुरू हो गए। अचानक इतनी तेज ओलावृष्टि हुई कि लोग समझ ही नहीं पाए। ओलावृष्टि होने से काफी जीव मर गए। ओलावृष्टि से पौधों की डालियां भी टूट-टूटकर नीचे गिरने लगी। यह देखकर कुछ लोग खुले में बंधे हुए अपने पशुओं को ओलावृष्टि से बचाने के लिए गए तो वह भी घायल हो गए। तेज गति से ओलावृष्टि होने के कारण कई घरोें की दीवारोें और टीन शेड में भी छेद हो गए। इस ओलावृष्टि से हजारों बीघा आलू, लाहा और गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है।
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मंगलवार की सुबह जब किसान अपने खेतों पर गए तो पता चला के उनकी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। मंगलवार की सुबह गांव मुगरिया, सेनपुर, पिथा, खुटीपुरी के किसान गांव पिथा में एकत्रित हुए और उन्होंने प्रशासन को इस भारी नुकसान के बारे में फोन से अवगत कराया है। किसानों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. श्यौराज सिंह का कहना है कि ओलावृष्टि से सरसों और आलू की फसल को नुकसान होगा। जैसा कि सुनने में आ रहा है हसायन व मुरसान में ओलावृष्टि हुई है। फसल में इससे हुए नुकसान का आंकलन विभागीय टीम द्वारा किया जाएगा।
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