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हाथरस: दो माह बाद भी अभी तक सच नहीं आया सामने
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हाथरस: बिटिया के गांव में एक छत पर सीआरपीएफ के जवानों ने तैयार कराया मोर्चा।
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
चंदपा क्षेत्र की बिटिया की मौत को आज दो माह हो चुके हैं, लेेकिन अभी तक इस बहुचर्चित मामले का सच सामने नहीं आया है। सीबीआई भी डेढ़ माह इस बहुचर्चित कांड की जांच कर रही है। लगातार गांव जा रही है। घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है, लेकिन इस कांड के असली गुनहगार कौन हैं, इस सवाल का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है। चारों आरोपियों को गांधीनगर (गुजरात) में पॉलीग्राफी व अन्य टेस्ट के लिए ले जाया गया है। सबकी टकटकी इस बात पर लगी है कि आखिर सीबीआई की जांच में अभी कितना वक्त और लगेगा।
चंदपा क्षेत्र की एक बिटिया के साथ घटना की शुरुआत 14 सितंबर से हुई थी। 14 सितंबर को बिटिया पर जानलेवा हमले का मुकदमा गांव के ही संदीप ठाकुर के खिलाफ दर्ज कराया गया था। बिटिया वाल्मीकि जाति की थी। जिला अस्पताल से 14 सितंबर को ही बिटिया को अलीगढ़ रेफर कर दिया गया था। इस दौरान पुलिस ने विवेचना शुरू की तो विवेचना में यह बात भी सामने आई कि इस बिटिया के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। पुलिस ने बिटिया के बयान के आधार पर संदीप के अलावा गांव के ही रामू, रवि और एक आरोपी, जिसे बाद में नाबालिग बताया गया, को आरोपित किया। चारों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया। इस दौरान मामले में सियासत शुरू हो गई।
भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर जब अलीगढ़ आए और वहां बिटिया के परिजनों से बातचीत की तो पूरे देश में यह मामला गर्मा गया। 28 सितंबर को बिटिया को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भेज दिया गया। वहां 29 सितंबर को उसने आखिरी सांस ली। इसके बाद जब बिटिया की दिल्ली में मौत हो गई तो इस प्रकरण ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 29 सितंबर की रात्रि में ही प्रशासन ने गांव में परिजनों की बिना इजाजत के जबरन बिटिया के शव का अंतिम संस्कार कर दिया था, जिसके बाद माहौल और बिगड़ गया। उसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा विपक्षी दलों के नेता भी बिटिया के घर पर आए और उसके परिजनों को सांत्वना दी। बिटिया के मामले में पूरा का पूरा विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया था। देश भर में इस घटना को लेकर प्रदर्शन हुए। ठाकुर समाज भी आरोपियों के समर्थन में एकजुट हो गया था।
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उसने बिटिया के परिजनों पर हॉरर किलिंग का आरोप लगाना शुरू कर दिया। यह आरोप भी लगाए गए कि बिटिया के गांव के ही संदीप से प्रेम संबंध थे और इसके चलते भाई और मां ने उसकी हत्या कर आरोप दूसरे लोगों पर मढ़ दिया। इससे जातीय तनाव भी फैल गया। हालात कई बार बेकाबू हुए। इसे संभालने के लिए पूरे प्रशासनिक अमले को खासा पसीना बहाना पड़ा। प्रदेश सरकार ने तत्कालीन एसपी सहित छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। यहां तक कि मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। ऐसे में प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। इस मामले में सियासत करने वालों पर भी शिकंजा कसा गया। नेताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए। प्रदेश सरकार का आरोप था कि इस घटना की आड़ में जातीय दंगा फैलानी की साजिश थी। इसे लेकर भी मुकदमे भी दर्ज हुए। इनकी जांच एसटीएफ कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बिटिया के घर पर सीआरपीएफ सुरक्षा की कमान संभाले हुए है। वहीं पिछले डेढ़ माह से बिटिया के मामले की जांच सीबीआई कर रही है। कई बार सीबीआई बिटिया के परिजनों, आरोपियों के परिजनों और गांव के लोगों सहित इस घटना से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ कर चुकी है। चारो आरोपियों को गांधीनगर (गुजरात) में पॉलीग्राफी व अन्य टेस्ट कराने के लिए ले जाया गया है। यह आरोपी अभी वहीं है। हर पहलू से सीबीआई की जांच जारी है। पिछले दिनों सीबीआई हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच में अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल कर चुकी है, लेकिन अभी तक इस घटना का सच सामने नहीं आया है। लोग यह जानने को आतुर हैं कि आखिर सच क्या है। असली गुनहगार कौन हैं और इस केस का राजफाश होने में अभी कितना वक्त लगेगा।
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चंदपा क्षेत्र की बिटिया की मौत को आज दो माह हो चुके हैं, लेेकिन अभी तक इस बहुचर्चित मामले का सच सामने नहीं आया है। सीबीआई भी डेढ़ माह इस बहुचर्चित कांड की जांच कर रही है। लगातार गांव जा रही है। घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है, लेकिन इस कांड के असली गुनहगार कौन हैं, इस सवाल का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है। चारों आरोपियों को गांधीनगर (गुजरात) में पॉलीग्राफी व अन्य टेस्ट के लिए ले जाया गया है। सबकी टकटकी इस बात पर लगी है कि आखिर सीबीआई की जांच में अभी कितना वक्त और लगेगा।
चंदपा क्षेत्र की एक बिटिया के साथ घटना की शुरुआत 14 सितंबर से हुई थी। 14 सितंबर को बिटिया पर जानलेवा हमले का मुकदमा गांव के ही संदीप ठाकुर के खिलाफ दर्ज कराया गया था। बिटिया वाल्मीकि जाति की थी। जिला अस्पताल से 14 सितंबर को ही बिटिया को अलीगढ़ रेफर कर दिया गया था। इस दौरान पुलिस ने विवेचना शुरू की तो विवेचना में यह बात भी सामने आई कि इस बिटिया के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। पुलिस ने बिटिया के बयान के आधार पर संदीप के अलावा गांव के ही रामू, रवि और एक आरोपी, जिसे बाद में नाबालिग बताया गया, को आरोपित किया। चारों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया। इस दौरान मामले में सियासत शुरू हो गई।
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भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर जब अलीगढ़ आए और वहां बिटिया के परिजनों से बातचीत की तो पूरे देश में यह मामला गर्मा गया। 28 सितंबर को बिटिया को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भेज दिया गया। वहां 29 सितंबर को उसने आखिरी सांस ली। इसके बाद जब बिटिया की दिल्ली में मौत हो गई तो इस प्रकरण ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 29 सितंबर की रात्रि में ही प्रशासन ने गांव में परिजनों की बिना इजाजत के जबरन बिटिया के शव का अंतिम संस्कार कर दिया था, जिसके बाद माहौल और बिगड़ गया। उसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा विपक्षी दलों के नेता भी बिटिया के घर पर आए और उसके परिजनों को सांत्वना दी। बिटिया के मामले में पूरा का पूरा विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया था। देश भर में इस घटना को लेकर प्रदर्शन हुए। ठाकुर समाज भी आरोपियों के समर्थन में एकजुट हो गया था।
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उसने बिटिया के परिजनों पर हॉरर किलिंग का आरोप लगाना शुरू कर दिया। यह आरोप भी लगाए गए कि बिटिया के गांव के ही संदीप से प्रेम संबंध थे और इसके चलते भाई और मां ने उसकी हत्या कर आरोप दूसरे लोगों पर मढ़ दिया। इससे जातीय तनाव भी फैल गया। हालात कई बार बेकाबू हुए। इसे संभालने के लिए पूरे प्रशासनिक अमले को खासा पसीना बहाना पड़ा। प्रदेश सरकार ने तत्कालीन एसपी सहित छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। यहां तक कि मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। ऐसे में प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। इस मामले में सियासत करने वालों पर भी शिकंजा कसा गया। नेताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए। प्रदेश सरकार का आरोप था कि इस घटना की आड़ में जातीय दंगा फैलानी की साजिश थी। इसे लेकर भी मुकदमे भी दर्ज हुए। इनकी जांच एसटीएफ कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बिटिया के घर पर सीआरपीएफ सुरक्षा की कमान संभाले हुए है। वहीं पिछले डेढ़ माह से बिटिया के मामले की जांच सीबीआई कर रही है। कई बार सीबीआई बिटिया के परिजनों, आरोपियों के परिजनों और गांव के लोगों सहित इस घटना से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ कर चुकी है। चारो आरोपियों को गांधीनगर (गुजरात) में पॉलीग्राफी व अन्य टेस्ट कराने के लिए ले जाया गया है। यह आरोपी अभी वहीं है। हर पहलू से सीबीआई की जांच जारी है। पिछले दिनों सीबीआई हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच में अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल कर चुकी है, लेकिन अभी तक इस घटना का सच सामने नहीं आया है। लोग यह जानने को आतुर हैं कि आखिर सच क्या है। असली गुनहगार कौन हैं और इस केस का राजफाश होने में अभी कितना वक्त लगेगा।