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हाथरस : फर्जी दस्तावेजों से हड़पे 21 लाख रुपये

Sat, 27 Feb 2021 12:11 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2021 12:11 AM IST
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Hathras: Rs 21 lakh seized from fake documents
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सादाबाद (हाथरस)
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कोतवाली में शुक्रवार की देर शाम को न्यायालय के आदेश पर फर्जी दस्तावेजों से 21 लाख रुपये हड़पने का मुकदमा दर्ज कराया गया। मानिकपुर (जलेसर रोड) सहपऊ निवासी कमलेश जैन पत्नी सुभाष जैन ने इस मुकदमे में विमलेश, धर्मेंद्र, हरिओम, अनवर सिंह, अंकित, अतुल निवासीगण बुढ़ाइच और कमल सिंह निवासी बहादुरपुर देवकरन सहपऊ को नामजद किया है।
कमलेश का आरोप है कि उन्होंने गांव सहपऊ स्थित कृषि भूमि का विक्रय पत्र अपनी सह हिस्सेदार नीलम जैन और राममूर्ति देवी के साथ संयुक्त रूप से उचित प्रतिफल देकर धर्मेंद्र और हरिओम निवासी बुढ़ाइच से 12 फरवरी 2018 को सब रजिस्ट्रार के समक्ष पंजीकृत कराया था। आरोप है कि धर्मेंद्र और हरिओम ने इस भूमि को अपने बाबा स्वर्गीय राजपाल सिंह द्वारा 15 अक्तूबर 2008 को पंजीकृत वसीयत के हिसाब से स्वयं के नाम और अपने तहेरे भाई अंकित व अतुल निवासी बुढ़ाइच के नाम किया जाना और वसीयत के आधार पर अपना नाम खतौनी में दर्ज होना बताया था।
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यह भी बताया था कि वह अपनी भूमि में से अंश भाग का विक्रय पत्र 21 जनवरी 2016 को कृष्ण कुमार दीक्षित की कंपनी के नाम कर चुके हैं। कमलेश जैन ने बताया कि उसने इन लोगों पर विश्वास करके 21 लाख रुपये देकर नौ मार्च 2018 को बैनामा कराया था। उसकी रजिस्ट्री भी 12 फरवरी 2018 को हुई थी और विक्रय पत्र के आधार पर दाखिल-खारिज भी हो गई। हरिओम और धर्मेंद्र ने विक्रय पत्र करने के बाद अपने तहेरे भाइयों, उनके पिता और अपनी मां से मिलकर अपने नाम की गई वसीयत को असत्य बताते हुए भूमि में वारिसान के आधार पर अपनी मां विमलेश का नाम तहसील से दर्ज करा दिया।
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इसकी जानकारी होने होने पर उन्होंने विमलेश के नाम 13 दिसंबर 2019 को हुए आदेश को खारिज करा दिया, लेकिन इन लोगों ने साजिश करके उसके व अन्य सह हिस्सेदारों की संपत्ति को हड़पने की खातिर धोखाधड़ी करके दोबारा 12 नवंबर 2020 को अपना नाम अंकित करा दिया। विमलेश देवी ने साठगांठ कर अपने व कमल सिंह के नाम से बिना धनराशि के धोखाधड़ी कर सब रजिस्ट्रार कार्यालय सादाबाद में कूटरचित विक्रय पत्र का निष्पादन करा दिया।

कमलेश ने बताया कि इसकी जानकारी उसे 15 जनवरी 2021 को प्रमाणित प्रतिलिपि लेने पर हुई। फर्जी प्रलेख के आधार पर यह लोग उसकी भूमि को हड़पने के लिए प्रयासरत हैं और विमलेश देवी का भूमि में एक तिहाई हिस्सा बता रहे हैं, जबकि यह नामजद लोग उसे व अन्य व्यक्तियों को अपनी संपूर्ण भूमि विक्रय करके 21 लाख रुपये ले चुके हैं। जब धनराशि को वापस करने के लिए इनसे कहा गया तो इन लोगों ने साफ इंकार कर दिया। यह फर्जी दस्तावेज तहसील पर तैयार कराकर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में 17 दिसंबर 2020 को पंजीकृत कराया गया है। इन सबने मिलकर इस तरह जालसाजी करने का गिरोह बनाया हुआ है।
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