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हाथरस : वित्तविहीन कॉलेजों के स्टाफ का शोषण कर रही माशिप
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हसायन (हाथरस)
माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज वैश्विक महामारी के दौरान परीक्षा के नाम पर तरह-तरह के नियम और अनियमित आदेश जारी कर वित्तविहीन कॉलेज के शिक्षक-शिक्षिकाओं व संचालकों का खुले रूप से शोषण करने पर तुला है।
यह बातें माध्यम वित्तविहीन शिक्षक महासभा के जिलाध्यक्ष आरपी शर्मा ने शिक्षक विधायक आकाश अग्रवाल को पत्र लिखकर कही हैं। उन्होंने कहा है कि पिछले सत्र में भी बिना परीक्षा कराए ही छात्र-छात्राओं को प्रोन्नत करा दिया गया था। इस वजह से किसी भी अभिभावक ने पिछले सत्र का शुल्क जमा नहीं किया है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा कराने के नाम पर करोड़ों रुपये का परीक्षा शुल्क अपने खातों में जमा करा लिया है।
उन्होंने कहा कि सरकारी कॉलेजों के शिक्षक-शिक्षिकाओं को तो वेतन मिल रहा है, लेकिन वित्तविहीन कॉलेजों के शिक्षक बिना वेतन के घर पर बैठे हुए हैं। कोरोना संक्रमण को हथियार बनाकर सरकारी विद्यालयों व भूखे मर रहे वित्तविहीन कॉलेजों के शिक्षक-शिक्षिकाओं और संचालकों का नए-नए आदेश जारी कर उत्पीड़न किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि पहले हाईस्कूल के अर्द्ध वार्षिक व प्री बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांक अपलोड कराने के बाद फिर कक्षा नौ के प्राप्तांक अपलोड कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब शासन ने फिर उपस्थिति पंजिका, प्रवेश पंजिका और गृह परीक्षाओं की मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका को डीआईओएस कार्यालय पर जमा कराने के आदेश दिए हैं।
उन्होंने कहा है कि कॉलेजों ने गृह परीक्षाएं करा दी हैं। अब हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा कराने की जिम्मेदारी परिषद व शासन की है। उन्होंने कहा है कि गृह परीक्षा के आधार पर छात्र-छात्राओं को प्रोन्नत करना अनियमित है। उन्होंने शिक्षक विधायक आकाश अग्रवाल व उमेश द्विवेदी से शासन के शिक्षामंत्री के समक्ष शिक्षकों की समस्याओं को रखते हुए बोर्ड परीक्षा कराने पर विचार करने की मांग की है।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज वैश्विक महामारी के दौरान परीक्षा के नाम पर तरह-तरह के नियम और अनियमित आदेश जारी कर वित्तविहीन कॉलेज के शिक्षक-शिक्षिकाओं व संचालकों का खुले रूप से शोषण करने पर तुला है।
यह बातें माध्यम वित्तविहीन शिक्षक महासभा के जिलाध्यक्ष आरपी शर्मा ने शिक्षक विधायक आकाश अग्रवाल को पत्र लिखकर कही हैं। उन्होंने कहा है कि पिछले सत्र में भी बिना परीक्षा कराए ही छात्र-छात्राओं को प्रोन्नत करा दिया गया था। इस वजह से किसी भी अभिभावक ने पिछले सत्र का शुल्क जमा नहीं किया है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा कराने के नाम पर करोड़ों रुपये का परीक्षा शुल्क अपने खातों में जमा करा लिया है।
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उन्होंने कहा कि सरकारी कॉलेजों के शिक्षक-शिक्षिकाओं को तो वेतन मिल रहा है, लेकिन वित्तविहीन कॉलेजों के शिक्षक बिना वेतन के घर पर बैठे हुए हैं। कोरोना संक्रमण को हथियार बनाकर सरकारी विद्यालयों व भूखे मर रहे वित्तविहीन कॉलेजों के शिक्षक-शिक्षिकाओं और संचालकों का नए-नए आदेश जारी कर उत्पीड़न किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि पहले हाईस्कूल के अर्द्ध वार्षिक व प्री बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांक अपलोड कराने के बाद फिर कक्षा नौ के प्राप्तांक अपलोड कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब शासन ने फिर उपस्थिति पंजिका, प्रवेश पंजिका और गृह परीक्षाओं की मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका को डीआईओएस कार्यालय पर जमा कराने के आदेश दिए हैं।
उन्होंने कहा है कि कॉलेजों ने गृह परीक्षाएं करा दी हैं। अब हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा कराने की जिम्मेदारी परिषद व शासन की है। उन्होंने कहा है कि गृह परीक्षा के आधार पर छात्र-छात्राओं को प्रोन्नत करना अनियमित है। उन्होंने शिक्षक विधायक आकाश अग्रवाल व उमेश द्विवेदी से शासन के शिक्षामंत्री के समक्ष शिक्षकों की समस्याओं को रखते हुए बोर्ड परीक्षा कराने पर विचार करने की मांग की है।